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उर्वरक मूल्य वृद्धि का बोझ किसानों पर नहीं, केंद्र सरकार ने उठाया: पीयूष गोयल

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उर्वरक मूल्य वृद्धि का बोझ किसानों पर नहीं, केंद्र सरकार ने उठाया: पीयूष गोयल

सारांश

वैश्विक उर्वरक कीमतें चढ़ीं, लेकिन किसान बेफिक्र — केंद्र सरकार ने पूरा बोझ खुद उठाया। 199.65 LMT के रिकॉर्ड भंडार और 9 FTA की पृष्ठभूमि में पीयूष गोयल का यह बयान खरीफ सीज़न से ठीक पहले आया है।

मुख्य बातें

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 23 मई को कहा कि वैश्विक उर्वरक मूल्य वृद्धि का बोझ किसानों पर नहीं डाला गया — पूरा खर्च केंद्र सरकार ने वहन किया।
देश में वर्तमान उर्वरक भंडार 199.65 लाख मीट्रिक टन (LMT) , जो मौसमी माँग के 51% से अधिक — सामान्य बफर स्तर 33% से काफी ऊपर।
हाल के संकट के बाद कुल उपलब्धता में 97 LMT की वृद्धि; घरेलू उत्पादन 76.78 LMT , आयात 19.94 LMT ।
भारत ने अब तक 9 मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए; भारत-कनाडा FTA से निवेश के नए अवसर खुलने की उम्मीद।
गोयल ने कहा — यह स्थिति 12 वर्षों के संरचनात्मक सुधारों और मोदी सरकार की परिणामोन्मुखी नीतियों का परिणाम है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार, 23 मई को नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में स्पष्ट किया कि वैश्विक बाज़ार में उर्वरक कीमतों में आई तीव्र वृद्धि का बोझ देश के किसानों पर नहीं डाला गया है — यह पूरा वित्तीय भार केंद्र सरकार ने स्वयं वहन किया है। उन्होंने इसे कृषि क्षेत्र की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।

उर्वरक सुरक्षा की स्थिति

मध्य पूर्व संकट के बावजूद भारत की उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला मज़बूत बनी हुई है। सरकार ने घरेलू उत्पादन और आयात दोनों मोर्चों पर त्वरित कदम उठाते हुए यह सुनिश्चित किया कि सभी प्रमुख श्रेणियों के किसानों की ज़रूरत से अधिक उर्वरक उपलब्ध रहे। देश में इस समय 199.65 लाख मीट्रिक टन (LMT) का भंडार उपलब्ध है, जो मौसमी माँग के 51 प्रतिशत से अधिक की पूर्ति करने में सक्षम है।

गौरतलब है कि इस मौसम के लिए सामान्य बफर स्तर लगभग 33 प्रतिशत माना जाता है — वर्तमान भंडार उससे काफी ऊपर है। अधिकारियों के अनुसार, यह बेहतर अग्रिम स्टॉकिंग और कुशल लॉजिस्टिक्स प्रबंधन का परिणाम है।

उत्पादन और आयात में उछाल

हाल के संकट काल के बाद घरेलू उत्पादन और आयात में उल्लेखनीय तेज़ी आई है। कुल उपलब्धता में लगभग 97 लाख मीट्रिक टन (LMT) की वृद्धि दर्ज की गई है। इसमें घरेलू उत्पादन का योगदान 76.78 LMT रहा, जबकि भारतीय बंदरगाहों पर पहुँचे आयातित उर्वरकों का हिस्सा 19.94 LMT रहा।

आत्मनिर्भरता और वैश्विक व्यापार

गोयल ने कहा कि हर मायने में भारत ने विश्व को एक ऐसी अर्थव्यवस्था का उदाहरण दिया है जो आत्मनिर्भरता के पथ पर अग्रसर है और समान तथा निष्पक्ष शर्तों पर वैश्विक संबंध स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि यह भारत द्वारा किए गए नौ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाँच देशों की सफल यात्राओं में परिलक्षित होता है, जिनसे सभी क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।

मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारत के लिए निवेश के व्यापक अवसर खोलेगा और दोनों देशों के पारस्परिक विकास में योगदान देगा।

बारह वर्षों के सुधारों का परिणाम

गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत की वर्तमान मज़बूत स्थिति संयोगवश नहीं है। उनके अनुसार, यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 12 वर्षों के संरचनात्मक सुधारों, लक्षित रणनीतियों, परिणामोन्मुखी कार्यों और परिवर्तनकारी पहलों का सुनियोजित परिणाम है।

आने वाले खरीफ सीज़न को देखते हुए सरकार का यह दावा कृषि क्षेत्र के लिए राहत की खबर है — हालाँकि विशेषज्ञ यह देखना चाहेंगे कि सब्सिडी का यह बोझ दीर्घकालिक राजकोषीय स्थिरता को किस हद तक प्रभावित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक रूप से आकर्षक है — लेकिन राजकोषीय दृष्टि से यह दीर्घकालिक चिंता का विषय भी है। उर्वरक सब्सिडी पहले से ही केंद्रीय बजट की सबसे बड़ी मदों में से एक है, और वैश्विक कीमतों में हर उछाल इस बोझ को और भारी करता है। 199.65 LMT का भंडार प्रभावशाली है, लेकिन असली सवाल यह है कि यह सब्सिडी मॉडल कब तक टिकाऊ रहेगा — खासकर तब जब भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ उर्वरक आयात को महँगा बनाए रखें। 9 FTA और 5 देशों की यात्राओं का उल्लेख व्यापक आर्थिक कथा गढ़ता है, पर उर्वरक सुरक्षा और व्यापार कूटनीति के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए ठोस आँकड़े अभी भी अपेक्षित हैं।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उर्वरक मूल्य वृद्धि का बोझ किसानों पर क्यों नहीं पड़ा?
केंद्र सरकार ने वैश्विक उर्वरक कीमतों में आई वृद्धि की भरपाई सब्सिडी के माध्यम से स्वयं की, जिससे किसानों को बाज़ार मूल्य पर उर्वरक नहीं खरीदना पड़ा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 23 मई को इसकी पुष्टि की।
भारत में अभी उर्वरक का कितना भंडार है?
देश में वर्तमान में 199.65 लाख मीट्रिक टन (LMT) उर्वरक का भंडार है, जो मौसमी माँग के 51 प्रतिशत से अधिक की पूर्ति करने में सक्षम है। यह सामान्य बफर स्तर लगभग 33 प्रतिशत से काफी अधिक है।
भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते का क्या महत्व है?
पीयूष गोयल के अनुसार, भारत-कनाडा FTA भारत के लिए निवेश के व्यापक अवसर खोलेगा और दोनों देशों के पारस्परिक विकास में योगदान देगा। यह भारत के 9 FTA में से एक है।
मध्य पूर्व संकट का भारत की उर्वरक आपूर्ति पर क्या असर पड़ा?
मध्य पूर्व संकट के बावजूद भारत की उर्वरक सुरक्षा मज़बूत बनी रही। सरकार ने घरेलू उत्पादन और आयात बढ़ाकर कुल उपलब्धता में लगभग 97 LMT की वृद्धि की, जिसमें घरेलू उत्पादन 76.78 LMT और आयात 19.94 LMT रहा।
गोयल ने भारत की आर्थिक स्थिति के बारे में क्या कहा?
गोयल ने कहा कि भारत की वर्तमान मज़बूत स्थिति 12 वर्षों के संरचनात्मक सुधारों, लक्षित रणनीतियों और परिवर्तनकारी पहलों का परिणाम है। उन्होंने भारत को आत्मनिर्भरता के पथ पर अग्रसर और विश्व के साथ निष्पक्ष शर्तों पर जुड़ी अर्थव्यवस्था बताया।
राष्ट्र प्रेस
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