उर्वरक मूल्य वृद्धि का बोझ किसानों पर नहीं, केंद्र सरकार ने उठाया: पीयूष गोयल
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार, 23 मई को नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में स्पष्ट किया कि वैश्विक बाज़ार में उर्वरक कीमतों में आई तीव्र वृद्धि का बोझ देश के किसानों पर नहीं डाला गया है — यह पूरा वित्तीय भार केंद्र सरकार ने स्वयं वहन किया है। उन्होंने इसे कृषि क्षेत्र की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
उर्वरक सुरक्षा की स्थिति
मध्य पूर्व संकट के बावजूद भारत की उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला मज़बूत बनी हुई है। सरकार ने घरेलू उत्पादन और आयात दोनों मोर्चों पर त्वरित कदम उठाते हुए यह सुनिश्चित किया कि सभी प्रमुख श्रेणियों के किसानों की ज़रूरत से अधिक उर्वरक उपलब्ध रहे। देश में इस समय 199.65 लाख मीट्रिक टन (LMT) का भंडार उपलब्ध है, जो मौसमी माँग के 51 प्रतिशत से अधिक की पूर्ति करने में सक्षम है।
गौरतलब है कि इस मौसम के लिए सामान्य बफर स्तर लगभग 33 प्रतिशत माना जाता है — वर्तमान भंडार उससे काफी ऊपर है। अधिकारियों के अनुसार, यह बेहतर अग्रिम स्टॉकिंग और कुशल लॉजिस्टिक्स प्रबंधन का परिणाम है।
उत्पादन और आयात में उछाल
हाल के संकट काल के बाद घरेलू उत्पादन और आयात में उल्लेखनीय तेज़ी आई है। कुल उपलब्धता में लगभग 97 लाख मीट्रिक टन (LMT) की वृद्धि दर्ज की गई है। इसमें घरेलू उत्पादन का योगदान 76.78 LMT रहा, जबकि भारतीय बंदरगाहों पर पहुँचे आयातित उर्वरकों का हिस्सा 19.94 LMT रहा।
आत्मनिर्भरता और वैश्विक व्यापार
गोयल ने कहा कि हर मायने में भारत ने विश्व को एक ऐसी अर्थव्यवस्था का उदाहरण दिया है जो आत्मनिर्भरता के पथ पर अग्रसर है और समान तथा निष्पक्ष शर्तों पर वैश्विक संबंध स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि यह भारत द्वारा किए गए नौ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाँच देशों की सफल यात्राओं में परिलक्षित होता है, जिनसे सभी क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।
मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारत के लिए निवेश के व्यापक अवसर खोलेगा और दोनों देशों के पारस्परिक विकास में योगदान देगा।
बारह वर्षों के सुधारों का परिणाम
गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत की वर्तमान मज़बूत स्थिति संयोगवश नहीं है। उनके अनुसार, यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 12 वर्षों के संरचनात्मक सुधारों, लक्षित रणनीतियों, परिणामोन्मुखी कार्यों और परिवर्तनकारी पहलों का सुनियोजित परिणाम है।
आने वाले खरीफ सीज़न को देखते हुए सरकार का यह दावा कृषि क्षेत्र के लिए राहत की खबर है — हालाँकि विशेषज्ञ यह देखना चाहेंगे कि सब्सिडी का यह बोझ दीर्घकालिक राजकोषीय स्थिरता को किस हद तक प्रभावित करता है।