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पीयूष गोयल और सर्बानंद सोनोवाल की बैठक: विदेशी व्यापार को सुगम बनाने पर बड़ा फैसला

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पीयूष गोयल और सर्बानंद सोनोवाल की बैठक: विदेशी व्यापार को सुगम बनाने पर बड़ा फैसला

सारांश

पीयूष गोयल और सर्बानंद सोनोवाल ने 22 मई को निर्यातकों, आयातकों और पोर्ट अधिकारियों के साथ सीधी बैठक की। सरकार ने 'संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण' के तहत व्यापार प्रक्रियाओं को तेज़, जवाबदेह और भविष्योन्मुखी बनाने की प्रतिबद्धता जताई।

मुख्य बातें

पीयूष गोयल और सर्बानंद सोनोवाल ने 22 मई 2026 को निर्यातकों, आयातकों और पोर्ट अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता की।
सरकार 'संपूर्ण सरकारी (Whole-of-Government) दृष्टिकोण' के तहत व्यापार एवं लॉजिस्टिक्स सुधारों को आगे बढ़ा रही है।
बैठक का उद्देश्य व्यापारिक समस्याओं का सीधे हितधारकों से संवाद कर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना था।
सरकार का लक्ष्य पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत कर भारत को वैश्विक व्यापार का प्रमुख केंद्र बनाना है।
'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को और मज़बूत करने और भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बनाने पर ज़ोर दिया गया।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 22 मई 2026 को नई दिल्ली में कहा कि केंद्र सरकार भारत के व्यापार तंत्र को अधिक सुगम, तेज़, आधुनिक और भविष्योन्मुखी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के साथ संयुक्त रूप से एक उच्चस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता की, जिसमें देश के निर्यातकों, आयातकों और पोर्ट अधिकारियों से सीधा संवाद किया गया।

बैठक का उद्देश्य और स्वरूप

गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस बैठक का मूल उद्देश्य व्यापार से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं को सीधे हितधारकों से समझना और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना था। बैठक में निर्यातकों, आयातकों तथा पोर्ट अधिकारियों ने अपनी परिचालन चुनौतियाँ सरकार के सामने रखीं।

गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत अपने वार्षिक निर्यात लक्ष्यों को बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी हिस्सेदारी मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है।

सरकार की प्रतिबद्धता और 'संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण'

केंद्रीय मंत्री गोयल ने स्पष्ट किया कि सरकार 'संपूर्ण सरकारी (Whole-of-Government) दृष्टिकोण' के तहत काम कर रही है, जिसमें विभिन्न मंत्रालय और विभाग समन्वित रूप से व्यापार एवं लॉजिस्टिक्स सुधारों को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार समयबद्ध और समन्वित कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि व्यापार से जुड़े मुद्दों का तेज़ी से समाधान हो सके।

यह दृष्टिकोण व्यापार सुधारों को एकल मंत्रालय की सीमा से बाहर निकालकर अंतर-विभागीय सहयोग का ढाँचा तैयार करता है — जो पिछले कुछ वर्षों में बंदरगाह विलंब और सीमा-शुल्क निकासी में देरी जैसी पुरानी समस्याओं के समाधान के लिए ज़रूरी माना जाता रहा है।

पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स सुधार

गोयल ने बताया कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसका उद्देश्य उद्योगों और व्यापार जगत को बेहतर सुविधाएँ देना तथा भारत को वैश्विक व्यापार का एक मज़बूत केंद्र बनाना है।

मंत्री ने कहा कि सरकार एक ऐसा व्यापारिक इकोसिस्टम तैयार कर रही है जो तेज़, प्रभावी, जवाबदेह और भविष्य की ज़रूरतों के अनुरूप हो।

आम कारोबारियों और निर्यातकों पर असर

इस पहल से भारतीय निर्यातकों और आयातकों को सीमा-शुल्क निकासी में तेज़ी, पोर्ट पर प्रतीक्षा समय में कमी और दस्तावेज़ीकरण प्रक्रिया में सरलता मिलने की उम्मीद है। गोयल ने कहा कि इससे 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को और मज़बूती मिलेगी और भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में नई संभावनाएँ प्राप्त होंगी।

सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य भारतीय व्यापारियों को वैश्विक बाज़ार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है — एक ऐसी महत्वाकांक्षा जो भारत के बढ़ते निर्यात लक्ष्यों के साथ सीधे जुड़ी है। आने वाले हफ्तों में बैठक में उठाए गए मुद्दों पर ठोस कार्ययोजना सामने आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो विकसित अर्थव्यवस्थाओं के 8% के मुकाबले काफी अधिक है। 'संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण' का नारा नया नहीं है — यह देखना होगा कि इस बार विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय वास्तव में ज़मीन पर उतरता है या नहीं। निर्यातकों की शिकायतें — सीमा-शुल्क में देरी, पोर्ट पर जाम — वर्षों से दोहराई जाती रही हैं; इस बैठक की विश्वसनीयता इसके बाद जारी होने वाली ठोस कार्ययोजना पर टिकी है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल और सर्बानंद सोनोवाल की बैठक किस विषय पर हुई?
यह बैठक भारत के विदेशी व्यापार को सुगम, तेज़ और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से आयोजित की गई। इसमें निर्यातकों, आयातकों और पोर्ट अधिकारियों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं और समाधानों पर चर्चा हुई।
'संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण' का व्यापार सुधारों में क्या अर्थ है?
'संपूर्ण सरकारी (Whole-of-Government) दृष्टिकोण' का अर्थ है कि वाणिज्य, पत्तन और अन्य संबंधित मंत्रालय एकजुट होकर व्यापार एवं लॉजिस्टिक्स सुधारों को लागू करेंगे। यह एकल मंत्रालय की सीमा से परे अंतर-विभागीय समन्वय का ढाँचा है।
इस बैठक से निर्यातकों और आयातकों को क्या फ़ायदा होगा?
सरकार की प्रतिबद्धता के अनुसार, इससे सीमा-शुल्क निकासी में तेज़ी, पोर्ट पर प्रतीक्षा समय में कमी और दस्तावेज़ीकरण प्रक्रिया में सरलता आने की उम्मीद है। इससे 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को भी बल मिलेगा।
सरकार पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के लिए क्या कदम उठा रही है?
गोयल के अनुसार, सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसका दीर्घकालिक लक्ष्य भारत को वैश्विक व्यापार का एक प्रमुख केंद्र बनाना है।
इस बैठक के बाद आगे क्या होगा?
मंत्री गोयल ने संकेत दिया कि बैठक में उठाए गए मुद्दों पर समयबद्ध और समन्वित कार्रवाई की जाएगी। आने वाले हफ्तों में ठोस कार्ययोजना और अनुवर्ती कदमों की घोषणा संभावित है।
राष्ट्र प्रेस
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