13 जुलाई 2026
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पीएमएवाई-जी: शिवराज सिंह चौहान ने 12 राज्यों को ₹10,021 करोड़ जारी किए, मार्च 2029 तक 'सभी के लिए आवास' लक्ष्य

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पीएमएवाई-जी: शिवराज सिंह चौहान ने 12 राज्यों को ₹10,021 करोड़ जारी किए, मार्च 2029 तक 'सभी के लिए आवास' लक्ष्य

सारांश

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 12 राज्यों को ₹10,021 करोड़ की मंजूरी दी — पीएमएवाई-जी के तहत चालू वित्त वर्ष में अब तक का सबसे बड़ा आवंटन। 4.95 करोड़ घरों के लक्ष्य में से 3.05 करोड़ पूरे हो चुके हैं, लेकिन मार्च 2029 की समयसीमा से पहले 1 करोड़ से अधिक घर अभी बाकी हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 28 मई 2026 को पीएमएवाई-जी के तहत 12 राज्यों को ₹10,021.42 करोड़ की 'मूल स्वीकृति' जारी की।
वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक कुल ₹21,142 करोड़ से अधिक की स्वीकृति जारी हो चुकी है।
योजना के 4.95 करोड़ घरों के लक्ष्य में से 3.91 करोड़ को मंजूरी और 3.05 करोड़ का निर्माण पूरा।
स्वीकृत घरों में लगभग 75% महिलाओं के नाम या संयुक्त स्वामित्व में हैं।
चालू वर्ष का आवास लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना अधिक; समयसीमा मार्च 2029 ।
पिछड़े राज्यों को 30 जून 2026 तक आधारित प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 28 मई 2026 को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के अंतर्गत 12 राज्यों को ₹10,021.42 करोड़ की 'मूल स्वीकृति' जारी की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में की गई यह मंजूरी मार्च 2029 तक 'सभी के लिए आवास' के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

किन राज्यों को मिली स्वीकृति

जिन 12 राज्यों को यह वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई, उनमें असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। ये राज्य देश के ग्रामीण आवास अभाव के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पहले ही ₹11,121 करोड़ की मंजूरी जारी की जा चुकी थी। अब ₹10,021 करोड़ से अधिक की अतिरिक्त स्वीकृति के साथ चालू वित्त वर्ष में कुल आवंटन उल्लेखनीय रूप से बढ़ गया है।

योजना की प्रगति और लक्ष्य

केंद्रीय मंत्री चौहान ने कार्यक्रम में बताया कि पीएमएवाई-जी के तहत 4.95 करोड़ घरों के कुल लक्ष्य के मुकाबले 3.91 करोड़ घरों के लिए पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है और 3.05 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण पूरा हो चुका है। सचिव कंसल ने यह भी बताया कि चालू वर्ष का आवास लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना अधिक है।

गौरतलब है कि पीएमएवाई-जी 2016 में शुरू की गई थी और तब से यह ग्रामीण भारत में आवास उपलब्धता का सबसे बड़ा केंद्रीय कार्यक्रम बना हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार 2029 की समयसीमा से पहले लक्ष्य पूरा करने का दबाव महसूस कर रही है।

महिला सशक्तिकरण और बुनियादी सुविधाएँ

मंत्री चौहान ने बताया कि पीएमएवाई-जी के तहत स्वीकृत लगभग 75 प्रतिशत घर या तो महिलाओं के नाम पर हैं या संयुक्त स्वामित्व में हैं, जिससे महिलाओं की गरिमा, आत्मसम्मान और सामाजिक सुरक्षा को बल मिलता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है — इन घरों के साथ सड़कें, बिजली, पीने का पानी, एलपीजी कनेक्शन और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा, 'जब घर अच्छा होता है तो जीवन आसान हो जाता है। हम केवल घर नहीं बना रहे हैं, बल्कि बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़कें, बिजली, पीने का पानी, एलपीजी कनेक्शन और शौचालय आदि से सुसज्जित घर बना रहे हैं।'

राज्यों को निर्देश और चुनौतियाँ

मंत्री ने स्वीकार किया कि कुछ राज्य अभी भी 2024-25 और 2025-26 के लक्ष्यों के अनुरूप आधारित प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं। उन्होंने इन राज्यों से 30 जून 2026 तक प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया। जिन गरीब परिवारों के पास जमीन नहीं है, उनके लिए राज्यों से भूमि उपलब्ध कराने की विशेष पहल करने को भी कहा गया।

उन्होंने राज्यों की उन नवाचारी पहलों की सराहना भी की जिनमें हेल्पलाइन, शिकायत निवारण प्रणाली, वर्षा जल संचयन, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन और राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं।

आगे क्या

मंत्री चौहान ने पीएमएवाई-जी के प्रत्येक लाभार्थी से 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत कम से कम एक पौधा लगाने की अपील की। केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित प्रयासों से मार्च 2029 की समयसीमा के भीतर शेष 1.04 करोड़ घरों के निर्माण को पूरा करना अब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

021 करोड़ की यह स्वीकृति संख्या में बड़ी है, लेकिन असली कसौटी यह है कि शेष 1 करोड़ से अधिक घर मार्च 2029 से पहले ज़मीन पर खड़े हों। यह ऐसे समय में आया है जब कुछ राज्य 2024-25 के लक्ष्य भी पूरे नहीं कर पाए हैं — जो बताता है कि फंड जारी करना और निर्माण पूरा करना दो अलग चुनौतियाँ हैं। भूमिहीन गरीबों की समस्या का उल्लेख मंत्री ने खुद किया, लेकिन इसका ठोस समाधान अभी राज्यों के विवेक पर छोड़ा गया है। बिना केंद्रीय भूमि-आवंटन तंत्र के, सबसे वंचित लाभार्थी एक बार फिर योजना के दायरे से बाहर रह सकते हैं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएमएवाई-जी के तहत 12 राज्यों को ₹10,021 करोड़ क्यों जारी किए गए?
केंद्र सरकार ने मार्च 2029 तक 'सभी के लिए आवास' के लक्ष्य को पूरा करने की गति बनाए रखने के लिए यह राशि जारी की है। यह वित्त वर्ष 2026-27 में पहले जारी ₹11,121 करोड़ के अतिरिक्त है।
पीएमएवाई-जी का अब तक का कुल प्रदर्शन कैसा रहा है?
4.95 करोड़ घरों के कुल लक्ष्य में से 3.91 करोड़ घरों को मंजूरी मिल चुकी है और 3.05 करोड़ से अधिक का निर्माण पूरा हो चुका है। शेष लक्ष्य मार्च 2029 की समयसीमा से पहले पूरा करना है।
किन 12 राज्यों को यह मंजूरी मिली है?
असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश को यह स्वीकृति वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जारी की गई।
पीएमएवाई-जी में महिलाओं को क्या विशेष लाभ मिलता है?
योजना के तहत स्वीकृत लगभग 75 प्रतिशत घर या तो महिलाओं के नाम पर हैं या संयुक्त स्वामित्व में हैं। इससे महिलाओं की संपत्ति में हिस्सेदारी और सामाजिक सुरक्षा को बल मिलता है।
जिन राज्यों ने अभी तक लक्ष्य पूरे नहीं किए, उनके लिए क्या निर्देश हैं?
मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐसे राज्यों को 30 जून 2026 तक 2024-25 और 2025-26 की आधारित प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। साथ ही भूमिहीन गरीब परिवारों के लिए जमीन उपलब्ध कराने की विशेष पहल करने को भी कहा गया है।
राष्ट्र प्रेस
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