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तारापुर परमाणु स्टेशन में प्राथमिक शीतलक पंप परीक्षण सुविधा का उद्घाटन, TAPS 1 और 2 को मिला 10 साल का जीवन विस्तार

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तारापुर परमाणु स्टेशन में प्राथमिक शीतलक पंप परीक्षण सुविधा का उद्घाटन, TAPS 1 और 2 को मिला 10 साल का जीवन विस्तार

सारांश

दुनिया के सबसे पुराने कार्यरत जुड़वां रिएक्टरों को नया जीवन मिला है। 1969 से चल रहे TAPS 1 और 2 को AERB से 10 साल का विस्तार मिला और अब तारापुर में नई प्राथमिक शीतलक पंप परीक्षण सुविधा भी शुरू हो गई — भारत की परमाणु आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस कदम।

मुख्य बातें

AEC अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती ने 17 जून 2026 को तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन में प्राथमिक शीतलक पंप परीक्षण सुविधा का उद्घाटन किया।
TAPS 1 और 2 को परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) से 10 वर्षीय जीवन विस्तार की मंजूरी मिली।
ये रिएक्टर 1969 में शुरू हुए थे और सोवियत ब्लॉक के बाहर एशिया के पहले परमाणु ऊर्जा स्टेशन हैं।
TAPS ने अब तक 100 अरब यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली उत्पादन और 8 करोड़ 60 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कटौती की।
जीवन विस्तार कार्यक्रम में स्वदेशी प्रौद्योगिकियों से रिएक्टर अखंडता मूल्यांकन और विद्युत प्रणालियों का आधुनिकीकरण शामिल।

परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के सचिव एवं परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) के अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती ने बुधवार, 17 जून 2026 को महाराष्ट्र के तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन (TAPS) में प्राथमिक शीतलक पंप परीक्षण सुविधा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्व के सबसे पुराने कार्यरत जुड़वां रिएक्टरों — TAPS 1 और 2 — के लिए हाल ही में स्वीकृत 10 वर्षीय जीवन विस्तार की प्रगति की भी समीक्षा की।

उद्घाटन और समीक्षा का महत्व

मोहंती ने न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और कर्मचारियों से संवाद किया और भारत के पहले परमाणु ऊर्जा स्टेशन के सुरक्षित, विश्वसनीय एवं दक्ष संचालन को सुनिश्चित करने में उनके योगदान की सराहना की।

इस अवसर पर बोलते हुए मोहंती ने कहा, 'विश्व के सबसे पुराने कार्यरत परमाणु रिएक्टरों, TAPS यूनिट 1 और 2 का निरंतर संचालन, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और संचालकों की पीढ़ियों के समर्पण तथा हमारी नियामक एवं तकनीकी क्षमताओं की परिपक्वता का प्रमाण है। एक दशक का जीवनकाल विस्तार प्रौद्योगिकी अधिग्रहण से तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर भारत के परिवर्तन को दर्शाता है।'

TAPS की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1969 में परिचालन में आए TAPS 1 और 2 ने भारत में वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा उत्पादन का सूत्रपात किया और तारापुर को सोवियत ब्लॉक के बाहर एशिया का पहला परमाणु ऊर्जा स्टेशन बनाया। पिछले साढ़े पाँच दशकों में इस स्टेशन ने भारत की परमाणु इंजीनियरिंग क्षमताओं, परिचालन प्रथाओं और सुरक्षा संस्कृति को आकार देने में मूलभूत भूमिका निभाई है।

गौरतलब है कि TAPS 1 और 2 ने अब तक 100 अरब यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली का उत्पादन किया है और 8 करोड़ 60 लाख टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड के समकक्ष उत्सर्जन को कम करने में योगदान दिया है।

जीवन विस्तार कार्यक्रम की बारीकियाँ

परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) द्वारा प्रदान की गई यह मंजूरी एक व्यापक आधुनिकीकरण और जीवन-विस्तार कार्यक्रम के बाद मिली है। इस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण प्रणालियों और घटकों का निरीक्षण, नवीनीकरण एवं प्रतिस्थापन; रिएक्टर अखंडता मूल्यांकन के लिए उन्नत स्वदेशी प्रौद्योगिकियों की तैनाती; विद्युत प्रणालियों का आधुनिकीकरण; और दीर्घकालिक परिचालन विश्वसनीयता बढ़ाने के उपाय शामिल थे।

NPCIL के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) वी. राजेश ने कहा, 'TAPS 1 और 2 परमाणु सुरक्षा और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। निरंतर उन्नयन और नवाचार के माध्यम से ये इकाइयाँ राष्ट्र के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों का समर्थन करने वाली सुदृढ़ परिसंपत्तियों में परिवर्तित हो गई हैं।'

स्थल निदेशक की प्रतिक्रिया

तारापुर साइट के निदेशक अजय कुमार भोले ने 'शून्य क्षति' के सिद्धांत के साथ परियोजना के क्रियान्वयन को रेखांकित करते हुए कहा, 'TAPS 1 और 2 का सफल जीवनकाल विस्तार और आधुनिकीकरण NPCIL की तकनीकी परिपक्वता और सुरक्षा पर उसके अटूट ध्यान को दर्शाता है।'

भोले ने आगे जोड़ा कि जैसे-जैसे भारत 'विकसित भारत' की परिकल्पना की ओर बढ़ रहा है, विश्वसनीय, चौबीसों घंटे और कम कार्बन उत्सर्जन वाली बिजली उपलब्ध कराने में परमाणु ऊर्जा की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और परमाणु ऊर्जा को आधार-भार ऊर्जा के रूप में पुनर्स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की परमाणु नीति में एक रणनीतिक बदलाव का संकेत है — आयातित प्रौद्योगिकी पर निर्भरता से स्वदेशी दक्षता की ओर। हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि 55 साल पुराने रिएक्टरों को चालू रखना नई क्षमता निर्माण का विकल्प नहीं हो सकता। भारत के परमाणु ऊर्जा विस्तार की असली परीक्षा यह है कि कितनी जल्दी नए रिएक्टर — विशेषकर स्वदेशी PHWRs और SMRs — ग्रिड में जुड़ते हैं। पुराने संयंत्रों का आधुनिकीकरण एक आवश्यक कदम है, लेकिन यह 2070 के शुद्ध-शून्य लक्ष्य के लिए पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तारापुर में प्राथमिक शीतलक पंप परीक्षण सुविधा क्या है?
यह TAPS परिसर में स्थापित एक विशेष तकनीकी सुविधा है जो परमाणु रिएक्टरों में शीतलक परिसंचरण के लिए उपयोग होने वाले पंपों के परीक्षण और मूल्यांकन में सहायक है। इसका उद्घाटन 17 जून 2026 को AEC अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती ने किया।
TAPS 1 और 2 को कितने साल का जीवन विस्तार मिला और किसने दिया?
परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) ने TAPS 1 और 2 को 10 वर्षीय जीवन विस्तार की मंजूरी दी है। यह मंजूरी व्यापक निरीक्षण, आधुनिकीकरण और सुरक्षा मूल्यांकन के बाद प्रदान की गई।
TAPS 1 और 2 कब से चल रहे हैं और इनका महत्व क्या है?
TAPS 1 और 2 को 1969 में शुरू किया गया था, जिससे ये दुनिया के सबसे पुराने कार्यरत जुड़वां रिएक्टर हैं। ये सोवियत ब्लॉक के बाहर एशिया का पहला परमाणु ऊर्जा स्टेशन हैं और अब तक 100 अरब यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली उत्पादन कर चुके हैं।
जीवन विस्तार कार्यक्रम में क्या-क्या किया गया?
इस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण प्रणालियों का व्यापक निरीक्षण, नवीनीकरण एवं प्रतिस्थापन; स्वदेशी प्रौद्योगिकियों से रिएक्टर अखंडता मूल्यांकन; विद्युत प्रणालियों का आधुनिकीकरण; और परिचालन विश्वसनीयता बढ़ाने के उपाय शामिल थे। पूरा कार्यक्रम 'शून्य क्षति' के सिद्धांत पर क्रियान्वित किया गया।
TAPS के जीवन विस्तार से भारत के ऊर्जा लक्ष्यों पर क्या असर होगा?
TAPS 1 और 2 का निरंतर संचालन भारत को विश्वसनीय, कम कार्बन उत्सर्जन वाली आधार-भार बिजली उपलब्ध कराएगा। यह भारत के 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य और 'विकसित भारत' की परिकल्पना में परमाणु ऊर्जा की भूमिका को मजबूत करता है।
राष्ट्र प्रेस
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