तारापुर परमाणु स्टेशन में प्राथमिक शीतलक पंप परीक्षण सुविधा का उद्घाटन, TAPS 1 और 2 को मिला 10 साल का जीवन विस्तार
सारांश
मुख्य बातें
परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के सचिव एवं परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) के अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती ने बुधवार, 17 जून 2026 को महाराष्ट्र के तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन (TAPS) में प्राथमिक शीतलक पंप परीक्षण सुविधा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्व के सबसे पुराने कार्यरत जुड़वां रिएक्टरों — TAPS 1 और 2 — के लिए हाल ही में स्वीकृत 10 वर्षीय जीवन विस्तार की प्रगति की भी समीक्षा की।
उद्घाटन और समीक्षा का महत्व
मोहंती ने न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और कर्मचारियों से संवाद किया और भारत के पहले परमाणु ऊर्जा स्टेशन के सुरक्षित, विश्वसनीय एवं दक्ष संचालन को सुनिश्चित करने में उनके योगदान की सराहना की।
इस अवसर पर बोलते हुए मोहंती ने कहा, 'विश्व के सबसे पुराने कार्यरत परमाणु रिएक्टरों, TAPS यूनिट 1 और 2 का निरंतर संचालन, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और संचालकों की पीढ़ियों के समर्पण तथा हमारी नियामक एवं तकनीकी क्षमताओं की परिपक्वता का प्रमाण है। एक दशक का जीवनकाल विस्तार प्रौद्योगिकी अधिग्रहण से तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर भारत के परिवर्तन को दर्शाता है।'
TAPS की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1969 में परिचालन में आए TAPS 1 और 2 ने भारत में वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा उत्पादन का सूत्रपात किया और तारापुर को सोवियत ब्लॉक के बाहर एशिया का पहला परमाणु ऊर्जा स्टेशन बनाया। पिछले साढ़े पाँच दशकों में इस स्टेशन ने भारत की परमाणु इंजीनियरिंग क्षमताओं, परिचालन प्रथाओं और सुरक्षा संस्कृति को आकार देने में मूलभूत भूमिका निभाई है।
गौरतलब है कि TAPS 1 और 2 ने अब तक 100 अरब यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली का उत्पादन किया है और 8 करोड़ 60 लाख टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड के समकक्ष उत्सर्जन को कम करने में योगदान दिया है।
जीवन विस्तार कार्यक्रम की बारीकियाँ
परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) द्वारा प्रदान की गई यह मंजूरी एक व्यापक आधुनिकीकरण और जीवन-विस्तार कार्यक्रम के बाद मिली है। इस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण प्रणालियों और घटकों का निरीक्षण, नवीनीकरण एवं प्रतिस्थापन; रिएक्टर अखंडता मूल्यांकन के लिए उन्नत स्वदेशी प्रौद्योगिकियों की तैनाती; विद्युत प्रणालियों का आधुनिकीकरण; और दीर्घकालिक परिचालन विश्वसनीयता बढ़ाने के उपाय शामिल थे।
NPCIL के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) वी. राजेश ने कहा, 'TAPS 1 और 2 परमाणु सुरक्षा और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। निरंतर उन्नयन और नवाचार के माध्यम से ये इकाइयाँ राष्ट्र के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों का समर्थन करने वाली सुदृढ़ परिसंपत्तियों में परिवर्तित हो गई हैं।'
स्थल निदेशक की प्रतिक्रिया
तारापुर साइट के निदेशक अजय कुमार भोले ने 'शून्य क्षति' के सिद्धांत के साथ परियोजना के क्रियान्वयन को रेखांकित करते हुए कहा, 'TAPS 1 और 2 का सफल जीवनकाल विस्तार और आधुनिकीकरण NPCIL की तकनीकी परिपक्वता और सुरक्षा पर उसके अटूट ध्यान को दर्शाता है।'
भोले ने आगे जोड़ा कि जैसे-जैसे भारत 'विकसित भारत' की परिकल्पना की ओर बढ़ रहा है, विश्वसनीय, चौबीसों घंटे और कम कार्बन उत्सर्जन वाली बिजली उपलब्ध कराने में परमाणु ऊर्जा की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और परमाणु ऊर्जा को आधार-भार ऊर्जा के रूप में पुनर्स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।