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आरबीआई ने एनबीएफसी को रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर सुझाव देने को कहा, जोखिम और अनुपालन पर सख्त निर्देश

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आरबीआई ने एनबीएफसी को रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर सुझाव देने को कहा, जोखिम और अनुपालन पर सख्त निर्देश

सारांश

RBI ने NBFC के साथ उच्चस्तरीय बैठक में रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर सुझाव माँगे और डिजिटल ऋण के तेज़ विस्तार के बीच जोखिम नियंत्रण, एसआरओ की भूमिका और डेटा सुरक्षा अनुपालन पर कड़े निर्देश दिए — यह संकेत है कि केंद्रीय बैंक NBFC क्षेत्र को वैश्विक मानकों के करीब लाने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने NBFC से प्रस्तावित रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर राय और सुझाव माँगे हैं।
RBI ने NBFC को नए उत्पादों और व्यवसाय मॉडलों से जुड़े जोखिमों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान और समाधान करने का निर्देश दिया।
स्वतः-नियमन संस्थाओं (SRO) को समानांतर नियामक नहीं, बल्कि उद्योग की 'पहली सुरक्षा पंक्ति' के रूप में कार्य करने को कहा गया।
NBFC को RBI डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
RBI, NBFC नियामक ढाँचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने पर विचार कर रहा है।
ग्राहक शिकायत समाधान तंत्र को निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रभावी बनाने पर भी ज़ोर दिया गया।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (NBFC) से प्रस्तावित रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर उनकी राय और सुझाव माँगे हैं। केंद्रीय बैंक ने NBFC के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में आंतरिक अनुपालन, ऑडिट तंत्र और जोखिम प्रबंधन ढाँचे को सुदृढ़ बनाने पर विशेष ज़ोर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, यह बैठक 17 अगस्त 2026 से पिछले सप्ताह आयोजित हुई और तेज़ी से बढ़ते लेंडिंग सेगमेंट में उभरते जोखिमों की निगरानी इसका मुख्य एजेंडा रहा।

मुख्य घटनाक्रम

RBI ने NBFC के वरिष्ठ प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे नए उत्पादों और व्यवसाय मॉडलों से जुड़े जोखिमों की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान करें और उन्हें समय रहते दूर करें। केंद्रीय बैंक का मानना है कि संभावित कमज़ोरियों को शुरुआत में ही नियंत्रित करने से वित्तीय स्थिरता बनाए रखी जा सकती है।

इसके साथ ही, RBI ने यह भी स्वीकार किया कि NBFC प्रायः प्रौद्योगिकी-आधारित ऋण उत्पादों और नवीन व्यवसाय मॉडलों को अपनाने में अग्रणी रहते हैं। नियामक के अनुसार, इन कंपनियों के अनुभव से प्राप्त जानकारी नए उभरते क्षेत्रों के लिए नियामक ढाँचा तैयार करने में सहायक हो सकती है।

वैश्विक मानकों के अनुरूप नियामक ढाँचा

सूत्रों के अनुसार, RBI NBFC के लिए नियामक ढाँचे को वैश्विक मानकों के अधिक निकट लाने पर सक्रिय रूप से विचार कर रहा है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारतीय वित्तीय क्षेत्र में डिजिटल ऋण और तकनीक-चालित व्यवसाय मॉडलों का विस्तार तेज़ी से हो रहा है।

गौरतलब है कि यह नियामक की उस व्यापक निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत तेज़ी से बढ़ रहे ऋण उत्पादों और प्रौद्योगिकी-आधारित मॉडलों से जुड़े जोखिमों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

एसआरओ की भूमिका पर स्पष्टता

बैठक में स्वतः-नियमन संस्थाओं (SRO) की भूमिका पर भी महत्त्वपूर्ण चर्चा हुई। RBI ने स्पष्ट किया कि SRO को समानांतर नियामक के रूप में नहीं, बल्कि उद्योग की 'पहली सुरक्षा पंक्ति' के रूप में काम करना चाहिए — अर्थात नियमों का पालन सुनिश्चित करना और उभरते जोखिमों को समय पर चिह्नित कर उन्हें दूर करने में सहयोग देना।

ग्राहक सेवा और डिजिटल अनुपालन पर निर्देश

RBI ने NBFC को यह भी निर्देश दिया कि वे ग्राहकों की शिकायतों के समाधान के लिए अपने तंत्र को और प्रभावी बनाएँ तथा यह सुनिश्चित करें कि शिकायतों का निपटारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर हो। इसके अतिरिक्त, NBFC से कहा गया कि वे RBI के डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम का पूर्णतः पालन करें — विशेषकर इसलिए क्योंकि ऋणदाता अब ग्राहक अधिग्रहण, अंडरराइटिंग और सर्विसिंग के लिए डिजिटल चैनलों पर अधिक निर्भर होते जा रहे हैं।

आगे क्या होगा

RBI की यह पहल NBFC क्षेत्र में नियामक अनुशासन को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर NBFC की प्रतिक्रिया के बाद केंद्रीय बैंक अंतिम दिशानिर्देश जारी करेगा, जो डिजिटल ऋण बाज़ार के भविष्य की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं ग्राहक शिकायतों और डेटा सुरक्षा उल्लंघनों के मामले भी बढ़े हैं। SRO को 'पहली सुरक्षा पंक्ति' बताना एक चतुर कदम है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये संस्थाएँ उद्योग के हितों से ऊपर उठकर स्वतंत्र रूप से काम कर पाएँगी। वैश्विक मानकों की बात करना सराहनीय है, पर जब तक अनुपालन का सत्यापन-योग्य ढाँचा नहीं बनता, ये निर्देश केवल कागज़ी अनुशासन बनकर रह सकते हैं।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई ने एनबीएफसी से रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर राय क्यों माँगी है?
RBI तेज़ी से बढ़ते डिजिटल ऋण बाज़ार में जोखिम नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए NBFC के लिए रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों का नया ढाँचा तैयार कर रहा है। इस प्रक्रिया में NBFC के अनुभव और सुझावों को शामिल करने के उद्देश्य से यह परामर्श प्रक्रिया शुरू की गई है।
एनबीएफसी के लिए आरबीआई के नए निर्देशों में क्या शामिल है?
RBI ने NBFC को आंतरिक ऑडिट और जोखिम प्रबंधन ढाँचा मजबूत करने, नए उत्पादों से जुड़े जोखिमों की प्रारंभिक पहचान करने, ग्राहक शिकायत समाधान में सुधार करने और डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क व डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
स्वतः-नियमन संस्थाओं (एसआरओ) की भूमिका आरबीआई के अनुसार क्या होनी चाहिए?
RBI ने स्पष्ट किया है कि SRO को समानांतर नियामक की तरह नहीं, बल्कि उद्योग की 'पहली सुरक्षा पंक्ति' के रूप में काम करना चाहिए। उनका कार्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना और उभरते जोखिमों को समय पर चिह्नित कर उन्हें दूर करने में सहयोग देना है।
डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क के अनुपालन पर आरबीआई का क्या रुख है?
RBI ने NBFC को निर्देश दिया है कि वे डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम का पूर्णतः पालन करें, विशेषकर जब ऋणदाता ग्राहक अधिग्रहण, अंडरराइटिंग और सर्विसिंग के लिए डिजिटल चैनलों पर अधिक निर्भर हो रहे हैं।
क्या आरबीआई एनबीएफसी के नियामक ढाँचे में बड़े बदलाव की तैयारी में है?
रिपोर्टों के अनुसार, RBI NBFC के नियामक ढाँचे को वैश्विक मानकों के अधिक निकट लाने पर विचार कर रहा है। रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर NBFC की प्रतिक्रिया प्राप्त होने के बाद केंद्रीय बैंक अंतिम दिशानिर्देश जारी करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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