REIT और InvIT बन सकते हैं भारत के अगले बड़े निवेश इंजन: SEBI कार्यकारी निदेशक मनिंदर चीमा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की कार्यकारी निदेशक मनिंदर चीमा ने 22 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कहा कि रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अगले बड़े निवेश इंजन साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये दोनों साधन खुदरा निवेशकों को नियमित आय प्रदान करने वाले महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर सकते हैं।
REIT और InvIT की विकास क्षमता
मनिंदर चीमा के अनुसार, REIT और InvIT अभी भारत की GDP के 1.5 प्रतिशत के स्तर पर हैं, लेकिन इनमें 5 प्रतिशत तक पहुँचने की क्षमता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय अर्थव्यवस्था बुनियादी ढाँचे और रियल एस्टेट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश की ओर अग्रसर है। गौरतलब है कि ये दोनों साधन तेज़ी से बढ़ता हुआ एसेट क्लास हैं, जो निवेशकों को रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में भागीदारी का अवसर देते हैं।
इन निवेश साधनों की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इनसे उत्पन्न कैश फ्लो का 90 प्रतिशत निवेशकों को वितरित करना अनिवार्य होता है। यह नियमित यील्ड-आधारित आय चाहने वाले खुदरा निवेशकों के लिए इन्हें विशेष रूप से आकर्षक बनाती है।
तृतीय-पक्ष परिसंपत्तियों का विस्तार
चीमा ने बताया कि SEBI इस बात पर विचार कर रहा है कि REIT और InvIT को केवल प्रायोजक समूहों की परिसंपत्तियों तक सीमित रखने की बजाय तृतीय पक्ष की परिसंपत्तियाँ खरीदने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा, 'इस प्रस्ताव पर परामर्श प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।' यदि यह ढाँचा लागू होता है तो उपलब्ध परियोजनाओं और परिसंपत्तियों का दायरा काफी बढ़ जाएगा।
इससे इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट क्षेत्र में एसेट मोनेटाइजेशन को नई गति मिल सकती है, साथ ही निवेशकों के लिए विकल्पों का विस्तार भी होगा।
सार्वजनिक परिसंपत्तियों का मोनेटाइजेशन
SEBI की कार्यकारी निदेशक ने यह भी कहा कि नियामक सरकार के साथ मिलकर सार्वजनिक परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग पर काम कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSU) के पास मौजूद बड़ी भूमि संपत्तियों को आर्थिक गतिविधियों में लाने की बात कही।
चीमा के अनुसार, 'देश में कई ऐसी परिसंपत्तियाँ हैं जिनका पूरा उपयोग नहीं हो रहा है और उन्हें उत्पादक आर्थिक संसाधनों में बदलने के लिए नीतिगत सहयोग आवश्यक है।' सरकार की प्राथमिकताओं में भी सार्वजनिक परिसंपत्तियों का मोनेटाइजेशन प्रमुख रूप से शामिल है।
डिमैट 2.0 और कॉर्पोरेट बॉन्ड टोकनाइजेशन
SEBI वित्तीय बाज़ारों के डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाने के लिए डिमैट 2.0 के दूसरे चरण पर भी सक्रिय है। इसके तहत भविष्य में टोकनाइज्ड बॉन्ड ट्रेडिंग की सुविधा शुरू की जा सकती है। फिलहाल कॉर्पोरेट बॉन्ड टोकनाइजेशन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
चीमा ने बताया कि अपेक्षाकृत कम लिक्विडिटी वाले एसेट्स टोकनाइजेशन के लिए अधिक उपयुक्त हैं, क्योंकि इससे डिलीवरी वर्सेस पेमेंट (DVP) जैसे लेन-देन अधिक कुशल और सुरक्षित बनाए जा सकते हैं। कॉर्पोरेट बॉन्ड्स के साथ शुरू होने वाला यह प्रयोग भविष्य में अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों के लिए भी रास्ता खोल सकता है, हालाँकि डिमैट 2.0 के अगले चरण के लिए अभी कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है।
आगे की राह
SEBI के इस नीतिगत दिशा-निर्धारण से स्पष्ट है कि नियामक REIT और InvIT को खुदरा निवेश की मुख्यधारा में लाने के प्रति प्रतिबद्ध है। तृतीय-पक्ष परिसंपत्ति अधिग्रहण, सार्वजनिक संपत्ति मोनेटाइजेशन और बॉन्ड टोकनाइजेशन — तीनों मोर्चों पर एक साथ काम होना भारतीय पूँजी बाज़ार के गहरे पुनर्गठन का संकेत देता है।