क्या सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट पीएलआई के तहत 22 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी?

Click to start listening
क्या सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट पीएलआई के तहत 22 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी?

सारांश

सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट पीएलआई स्कीम के अंतर्गत 22 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देते हुए 41,863 करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा की है। यह कदम देश की इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा और रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगा।

Key Takeaways

  • 22 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है।
  • 41,863 करोड़ रुपए का निवेश होने की उम्मीद है।
  • 37,000 से ज्यादा रोजगार के अवसर sृजित होंगे।
  • ये प्रोजेक्ट्स 8 राज्यों में स्थापित होंगे।
  • ईसीएमएस योजना का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना है।

नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सरकार ने शुक्रवार को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के अंतर्गत 22 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन प्रोजेक्ट्स में करीब 41,863 करोड़ रुपए का निवेश और 37,000 से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

इन नए प्रोजेक्ट्स से देश की स्थिति इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता घटेगी।

मंजूरी प्राप्त 22 प्रोजेक्ट्स का आउटपुट 2.58 लाख करोड़ रुपए होने की संभावना है। जिन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है, उनमें डिक्सन, सैमसंग डिस्प्ले नोएडा प्राइवेट लिमिटेड, फॉक्सकॉन की युझान टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज का नाम शामिल है।

यह नई मंजूरी उन 24 आवेदन के अतिरिक्त है, जिसमें 12,704 करोड़ रुपए का निवेश हुआ था।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इस दौर की स्वीकृतियों में मोबाइल फोन, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और आईटी हार्डवेयर सहित 11 क्षेत्रों में विनिर्माण कार्य शामिल हैं। ये परियोजनाएं आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित आठ राज्यों में स्थापित की जाएंगी।

इंडस्ट्री लीडर्स ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि ईसीएमएस योजना की सफलता इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत के इरादे से क्रियान्वयन की ओर निर्णायक बदलाव का प्रतीक है।

आईईएसए और एसईएमआई इंडिया के अध्यक्ष अशोक चंदक ने कहा, “2025 के अंत तक, भारत ने एक विश्वसनीय और निवेश योग्य ईएसडीएम गंतव्य के रूप में वैश्विक विश्वास अर्जित कर लिया है। ईसीएमएस एक क्रांतिकारी बदलाव है क्योंकि एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र को केवल सेमीकंडक्टर ही नहीं, बल्कि कंपोनेंट्स, मैटेरियल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू एडिशन की आवश्यकता होती है।”

अगले चरण में उत्पादन बढ़ाने, मजबूत डिजाइन टीमों का निर्माण करने, स्थानीय स्तर पर सोर्सिंग करने और निर्मित उत्पादों में विश्व स्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

उन्होंने कहा, “ओईएम और सिस्टम कंपनियों को मेड-इन-इंडिया कंपोनेंट्स को सक्रिय रूप से अपनाना चाहिए, क्योंकि मांग सृजन आपूर्ति सृजन जितना ही महत्वपूर्ण है। वितरक भारतीय कंपोनेंट्स को पूरे भारत में और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”

मूल्य श्रृंखला को और अधिक मजबूत करने के लिए, सरकार ने 2025 में ईसीएमएस योजना शुरू की है।

यह योजना प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, विद्युत और यांत्रिक घटकों, कैमरा मॉड्यूल आदि के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

भारत एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता के रूप में उभरा है और मजबूत नीतिगत प्रयासों के परिणामस्वरूप, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पिछले 11 वर्षों में लगभग छह गुना बढ़ गया है और 2014-15 में 1.9 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2024-25 में 11.32 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

Point of View

बल्कि आयात पर निर्भरता को भी कम करेगा। सरकार के इस कदम से भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में एक प्रतिस्पर्धी स्थान प्राप्त होगा।
NationPress
02/01/2026

Frequently Asked Questions

ईसीएमएस योजना क्या है?
ईसीएमएस योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट का घरेलू विनिर्माण करना है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो सके।
इन प्रोजेक्ट्स से कितने रोजगार सृजित होंगे?
इन 22 प्रोजेक्ट्स से 37,000 से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
क्या ये प्रोजेक्ट्स सभी राज्यों में स्थापित होंगे?
हां, ये प्रोजेक्ट्स आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित आठ राज्यों में स्थापित होंगे।
सरकार का अगला कदम क्या होगा?
सरकार का अगला कदम उत्पादन बढ़ाना, मजबूत डिजाइन टीमों का निर्माण करना और विश्व स्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करना होगा।
भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमता में क्या वृद्धि हुई है?
भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमता पिछले 11 वर्षों में लगभग छह गुना बढ़ी है।
Nation Press