क्या सोने की तेजी से भारतीय परिवारों की संपत्ति में 2025 में रिकॉर्ड 117 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई?
सारांश
Key Takeaways
- 117 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति में वृद्धि।
- सोने की कीमत में प्रति 10 ग्राम 57,000 रुपए का उछाल।
- हाइब्रिड फंड्स में निवेश का सुझाव।
- 2025 में भारतीय शेयर बाजार में स्थिरता।
- सोना एक सुरक्षित निवेश विकल्प।
नई दिल्ली, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सोने की कीमतों में आई तेज वृद्धि के कारण 2025 में भारतीय परिवारों की कुल संपत्ति में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी देखी गई है। एचडीएफसी म्यूचुअल फंड की ईयरबुक 2026 के अनुसार, साल 2025 में भारतीय परिवारों की संपत्ति में लगभग 117 लाख करोड़ रुपए या लगभग 1.3 ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि हुई है, जिससे परिवारों की खर्च करने की क्षमता भी मजबूत हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में सोने की कीमतों में वृद्धि के चलते यह संपत्ति में सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है।
2025 में 15 दिसंबर तक सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम करीब 57,000 रुपए तक पहुंच गई। इससे पहले, 2024 में सोने की कीमतों में 14,000 रुपए प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हुई थी।
सोने की कीमतों में इस तेज वृद्धि से लोगों की संपत्ति में बड़ा इजाफा हुआ है, जिसके कारण सोने के बदले लिए जाने वाले रिटेल लोन में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2025 भारतीय शेयर बाजार के लिए स्थिरता का साल रहा। वहीं, सोना जैसे वैकल्पिक निवेश ने बेहतरीन प्रदर्शन किया।
जब शेयर बाजार पर दबाव था, तब सोना एक सुरक्षित निवेश के रूप में उभरा और निवेशकों का भरोसा जीता।
हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में भारत का प्रदर्शन वैश्विक बाजारों के मुकाबले कमजोर रहा, जिससे दुनिया के कुल शेयर बाजार मूल्य में भारत की हिस्सेदारी में गिरावट आई।
निफ्टी का प्रदर्शन वैश्विक और उभरते बाजारों के मुकाबले करीब 25 प्रतिशत कमजोर रहा, जो पिछले 30 वर्षों का सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है। हालांकि, इस गिरावट से भारतीय बाजार का वैल्यूएशन अब अपने लंबे समय के औसत स्तर के करीब आ गया है।
वैश्विक स्तर पर, 2025 में सोना, उभरते बाजार, यूरोप और 'मैग्निफिसेंट 7' स्टॉक ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, तेल, अमेरिकी डॉलर और बिटकॉइन जैसे निवेश विकल्पों का प्रदर्शन कमजोर रहा।
रिपोर्ट बताती है कि कई सालों की तेजी के बाद 2025 में स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों का प्रदर्शन लार्ज-कैप शेयरों से कमज़ोर रहा।
हालांकि, बाजार के सभी सेगमेंट में मूल्यांकन में कमी आई है, फिर भी लार्ज-कैप स्टॉक्स अभी भी बेहतर निवेश विकल्प माने जा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 30 प्रतिशत स्मॉल-कैप शेयर अपने 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर से 30 प्रतिशत या उससे अधिक गिर चुके हैं।
निवेश को लेकर सलाह देते हुए एचडीएफसी म्यूचुअल फंड ने कहा है कि नए निवेशकों को हाइब्रिड फंड्स पर विचार करना चाहिए। इन फंड्स में इक्विटी, डेट और सोने का मिश्रण होता है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव के समय निवेशकों को बेहतर संतुलन और सुरक्षा मिलती है।