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सोना न खरीदें, विदेश न जाएँ — PM मोदी की अपील पर श्रीधर वेम्बू ने समझाई असली वजह

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सोना न खरीदें, विदेश न जाएँ — PM मोदी की अपील पर श्रीधर वेम्बू ने समझाई असली वजह

सारांश

जोहो के श्रीधर वेम्बू ने PM मोदी की सोना न खरीदने और विदेश न जाने की अपील का बचाव करते हुए कहा कि 7.8% की विकास दर के बावजूद भारत को ऊर्जा और तकनीक आयात के लिए विदेशी मुद्रा बचाना ज़रूरी है — ठीक वैसे जैसे पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं ने अपने उत्थान के दौर में किया था।

मुख्य बातें

जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने 2 सितंबर को सोशल मीडिया पर PM मोदी की अपील का आर्थिक तर्क समझाया।
वेम्बू के अनुसार, 7.8% की विकास दर के साथ ऊर्जा और प्रौद्योगिकी आयात की माँग भी बढ़ती है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बनता है।
सटीक मशीनों, सीपीयू , जीपीयू और उन्नत सॉफ्टवेयर के भुगतान के लिए विदेशी मुद्रा की ज़रूरत बढ़ रही है।
वेम्बू ने पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं का उदाहरण दिया, जिन्होंने तेज़ विकास के दौरान विदेशी मुद्रा संरक्षण को प्राथमिकता दी।
उन्होंने कहा कि जब भारत उन्नत तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा में आत्मनिर्भर हो जाएगा, तब यह प्रतिबंध की आवश्यकता नहीं रहेगी।

जोहो के मुख्य वैज्ञानिक और सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने बुधवार, 2 सितंबर को स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नागरिकों से विदेश यात्रा न करने, सोना न खरीदने और फिजूलखर्ची से बचने की अपील का मूल उद्देश्य भारत के तीव्र आर्थिक विकास के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षण करना है। वेम्बू ने यह बात एक सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिये सार्वजनिक बहस में रखी, जिसमें उन्होंने पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के ऐतिहासिक अनुभव से तुलना करते हुए इस नीतिगत सोच को समझाया।

वेम्बू ने क्या तर्क दिया

वेम्बू ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'अगर अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, तो प्रधानमंत्री हमसे विदेश यात्रा न करने, सोना न खरीदने, विदेश में शादी न करने आदि के लिए क्यों कह रहे हैं?' उन्होंने स्वयं इस सवाल का जवाब देते हुए समझाया कि तेज़ आर्थिक विस्तार के साथ-साथ आयातित ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकी की माँग भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ती है।

उन्होंने कहा, 'वास्तव में अर्थव्यवस्था जितनी तेज़ी से बढ़ती है, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी दोनों की आवश्यकता उतनी ही अधिक होती है।' वेम्बू के अनुसार, सटीक मशीनों, सामग्रियों, सीपीयू, जीपीयू और उन्नत सॉफ्टवेयर के भुगतान के लिए विदेशी मुद्रा की ज़रूरत लगातार बढ़ रही है।

आयात निर्भरता और विदेशी मुद्रा का संतुलन

वेम्बू ने माना कि भारत की अर्थव्यवस्था 'अच्छी दर से बढ़ रही है, लेकिन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हमारी आयात पर निर्भरता अभी भी बनी हुई है।' इस निर्भरता को संतुलित करने के लिए उन्होंने कहा कि देश को अधिक निर्यात करना होगा और घरेलू स्तर पर उन्नत तकनीक विकसित करनी होगी।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण और रक्षा प्रौद्योगिकी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन इन क्षेत्रों में पूर्ण स्वदेशीकरण में अभी वर्षों का समय लग सकता है।

पूर्वी एशिया से तुलना

वेम्बू ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा, 'देखिए पूर्वी एशिया को पश्चिम के बराबर आने में कितना समय लगा। उनकी अर्थव्यवस्थाएं तेज़ी से बढ़ रही थीं, जबकि वे विदेशी मुद्रा संरक्षण के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे।' गौरतलब है कि जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसी अर्थव्यवस्थाओं ने अपने तीव्र विकास के दशकों में उपभोग पर कड़े अनुशासन के साथ औद्योगिक क्षमता निर्माण को प्राथमिकता दी थी।

वेम्बू ने स्वीकार किया कि 'इन सभी क्षेत्रों में बराबरी करने में समय लगता है, जो अक्सर दशकों में मापा जाता है।' उन्होंने जोड़ा कि भारत ने 'अच्छी शुरुआत की है, लेकिन हमें समय चाहिए।'

भविष्य की राह

वेम्बू ने आशावादी दृष्टिकोण रखते हुए कहा, 'एक बार जब हम सभी उन्नत प्रौद्योगिकियों में दक्षता हासिल कर लेंगे और नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से ऊर्जा स्वतंत्रता प्राप्त कर लेंगे, जिसके लिए हम प्रौद्योगिकी विकसित करते हैं, तो हमें विदेशी मुद्रा का संरक्षण करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।' उनके अनुसार, सरकार अनावश्यक विदेशी यात्रा और सोने की खरीद पर रोक लगाकर इसी दीर्घकालिक लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश कर रही है। यह बहस आने वाले समय में भारत की व्यापक आर्थिक नीति पर और गहरी होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी ओर नागरिकों से खर्च में संयम बरतने की अपील करती है। पूर्वी एशिया की तुलना भी अधूरी है — उन देशों में राज्य-निर्देशित बचत नीतियाँ, मज़बूत औद्योगिक नीति और निर्यात-केंद्रित ढाँचा एक साथ लागू था, जबकि भारत में इनमें से कई स्तंभ अभी निर्माणाधीन हैं। असली सवाल यह है कि क्या व्यक्तिगत उपभोग पर अपील विदेशी मुद्रा संरक्षण का प्रभावी उपकरण है, या यह संरचनात्मक नीति की जगह नहीं ले सकती।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने नागरिकों से सोना न खरीदने और विदेश न जाने की अपील क्यों की?
श्रीधर वेम्बू के अनुसार, इस अपील का उद्देश्य भारत के तीव्र विकास चरण के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षण करना है। जब अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ती है, तो ऊर्जा और उन्नत तकनीक के आयात पर विदेशी मुद्रा का खर्च भी बढ़ता है, और सोने की खरीद व विदेश यात्रा इस भंडार पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
श्रीधर वेम्बू कौन हैं और उनकी राय क्यों मायने रखती है?
श्रीधर वेम्बू जोहो कॉर्पोरेशन के मुख्य वैज्ञानिक और सह-संस्थापक हैं, जो भारत की प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक है। वे भारतीय प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था पर अपने विचारों के लिए जाने जाते हैं और उनकी टिप्पणियाँ नीतिगत बहस में व्यापक रूप से उद्धृत होती हैं।
भारत की विदेशी मुद्रा पर दबाव किन कारणों से है?
वेम्बू के अनुसार, भारत अभी भी सटीक मशीनों, सीपीयू, जीपीयू, उन्नत सॉफ्टवेयर और ऊर्जा के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था बढ़ती है, इन आयातों की माँग भी बढ़ती है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है।
पूर्वी एशियाई देशों से भारत की तुलना किस संदर्भ में की गई है?
वेम्बू ने कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया जैसे पूर्वी एशियाई देशों ने भी तीव्र विकास के दौरान विदेशी मुद्रा संरक्षण को प्राथमिकता दी और दशकों की मेहनत के बाद पश्चिम के बराबर पहुँचे। उनका तर्क है कि भारत भी इसी रास्ते पर है और इसमें समय लगेगा।
क्या भविष्य में यह प्रतिबंध हट सकते हैं?
वेम्बू के अनुसार, जब भारत उन्नत प्रौद्योगिकियों में दक्षता हासिल कर लेगा और नवीकरणीय ऊर्जा के ज़रिये ऊर्जा स्वतंत्रता प्राप्त कर लेगा, तब विदेशी मुद्रा संरक्षण की यह ज़रूरत स्वाभाविक रूप से कम हो जाएगी। हालाँकि, इस लक्ष्य तक पहुँचने में अभी दशकों का समय लग सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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