23 सितंबर 2026
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सनराइज सेक्टर्स संभालेंगे अगले वैश्विक निवेश चक्र की बागडोर, SBI चेयरमैन CS सेट्टी ने बताया भारत के लिए बड़ा मौका

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सनराइज सेक्टर्स संभालेंगे अगले वैश्विक निवेश चक्र की बागडोर, SBI चेयरमैन CS सेट्टी ने बताया भारत के लिए बड़ा मौका

सारांश

SBI चेयरमैन CS सेट्टी का संदेश साफ है — अगला वैश्विक निवेश चक्र नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे सनराइज सेक्टर्स से संचालित होगा, और भारत के पास इसे भुनाने की क्षमता है — बशर्ते बैंकिंग क्षेत्र भी उसी रफ़्तार से खुद को नया करे।

मुख्य बातें

SBI चेयरमैन सीएस सेट्टी ने 23 सितंबर 2026 को 13वें SBI बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव में सनराइज सेक्टर्स को अगले वैश्विक निवेश चक्र का मुख्य चालक बताया।
नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर , बैटरी स्टोरेज , ग्रीन हाइड्रोजन , रोबोटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी को प्रमुख उभरते क्षेत्र बताया गया।
सेट्टी के अनुसार, भारत की असली चुनौती प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि उसे वैश्विक स्तर की बौद्धिक संपदा और व्यावसायिक उद्यमों में रूपांतरित करना है।
बैंकिंग क्षेत्र को पूंजी-गहन और तकनीक-आधारित उद्योगों के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण मॉडल विकसित करने की ज़रूरत बताई गई।
सेट्टी ने कहा कि भारत को विश्वस्तरीय कंपनियाँ खड़ी करनी होंगी जो अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में सफलतापूर्वक प्रतिस्पर्धा कर सकें।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन सीएस सेट्टी ने 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 13वें SBI बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में कहा कि वैश्विक निवेश का अगला बड़ा दौर नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन, रोबोटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी जैसे 'सनराइज सेक्टर्स' द्वारा संचालित होगा। उन्होंने रेखांकित किया कि इस परिवर्तन को गति देने में भारत का बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र निर्णायक भूमिका अदा करेगा।

सनराइज सेक्टर्स: अगले निवेश चक्र का केंद्र

सेट्टी के अनुसार, आने वाले वर्षों में वैश्विक पूंजी का बड़ा हिस्सा इन उभरते उद्योगों की ओर प्रवाहित होने की प्रबल संभावना है। इससे न केवल आर्थिक विकास को बल मिलेगा, बल्कि तकनीकी प्रगति और नए रोज़गार अवसरों का भी सृजन होगा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था जीवाश्म ईंधन-आधारित ढाँचे से हरित और डिजिटल-प्रथम मॉडल की ओर तेज़ी से करवट ले रही है।

भारत की मज़बूत स्थिति और मौजूदा अवसर

सेट्टी ने कहा कि भारत इस वैश्विक बदलाव का लाभ उठाने की दृष्टि से अनुकूल स्थिति में है। देश के पास कुशल कार्यबल, मज़बूत उद्यमशीलता इकोसिस्टम और तेज़ी से विकसित होती तकनीकी क्षमताएँ मौजूद हैं, जो वैश्विक निवेश आकर्षित करने में सहायक हो सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रतिभा या नवाचार की कमी नहीं है, बल्कि इन क्षमताओं को व्यावसायिक रूप से सफल उद्यमों, उन्नत तकनीकों, मज़बूत विनिर्माण आधार और वैश्विक स्तर की बौद्धिक संपदा में रूपांतरित करने की है।

गौरतलब है कि भारत सरकार पहले ही सेमीकंडक्टर मिशन और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विस्तार जैसे कार्यक्रमों के ज़रिये इसी दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। ऐसे में SBI प्रमुख का यह बयान उस नीतिगत दिशा को वित्तीय क्षेत्र की स्वीकृति की मुहर लगाता है।

बैंकिंग क्षेत्र को भी करना होगा खुद को नया

SBI चेयरमैन ने उभरती अर्थव्यवस्था में बैंकों और वित्तीय संस्थानों की बदलती भूमिका पर ज़ोर दिया। उनका कहना था कि जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था उच्च मूल्य वाले विनिर्माण, हरित प्रौद्योगिकियों और नवाचार-आधारित विकास की ओर आगे बढ़ेगी, वित्तीय क्षेत्र को अपने वित्तपोषण मॉडल और ढाँचे में भी समानांतर बदलाव लाना होगा।

सेट्टी ने कहा कि पूंजी-गहन और तकनीक-आधारित उद्योगों की ज़रूरतें पारंपरिक क्षेत्रों से भिन्न होती हैं। इसलिए बैंकिंग प्रणाली को इन क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण और विशेष वित्तीय समाधान उपलब्ध कराने होंगे।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा और नेतृत्व का लक्ष्य

SBI प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि आर्थिक विकास का लक्ष्य केवल उच्च वृद्धि दर हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उस वृद्धि को वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और उद्योगों में नेतृत्व में तब्दील करना भी उतना ही ज़रूरी है। उन्होंने कहा, 'भारत को विश्वस्तरीय कंपनियों के निर्माण की अपनी क्षमता को और मज़बूत करना होगा, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में सफलतापूर्वक प्रतिस्पर्धा कर सकें।'

सेट्टी का यह संदेश स्पष्ट है — बैंक नवाचार, निवेश और विस्तार को समर्थन देने वाले वित्तीय ढाँचे के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाएँगे। यदि भारत को सनराइज सेक्टर्स में वैश्विक प्रतिस्पर्धा हासिल करनी है, तो वित्तीय संस्थानों को भी उसी गति से विकसित और अनुकूलित होना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि SBI जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक — जो अभी भी कृषि और MSME ऋण के पारंपरिक बोझ तले काम करते हैं — वास्तव में ग्रीन हाइड्रोजन या सेमीकंडक्टर जैसे उच्च-जोखिम, दीर्घकालिक क्षेत्रों के लिए वित्तपोषण मॉडल कितनी तेज़ी से विकसित कर सकते हैं। भारत की विनिर्माण GDP हिस्सेदारी और स्टार्टअप यूनिकॉर्न संख्या के बीच की खाई यह दर्शाती है कि नवाचार को पैमाने पर ले जाना अभी भी कमज़ोर कड़ी है। कॉन्क्लेव के मंच से दिए गए इस संदेश को ठोस नीतिगत प्रतिबद्धता में बदलने की ज़रूरत है — केवल उद्घाटन भाषण बनकर न रह जाए।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सनराइज सेक्टर्स क्या हैं और इन्हें भविष्य का निवेश क्षेत्र क्यों माना जा रहा है?
सनराइज सेक्टर्स वे उभरते उद्योग हैं जो तेज़ तकनीकी बदलाव और हरित परिवर्तन की लहर पर सवार हैं — जैसे नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन, रोबोटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी। SBI चेयरमैन सीएस सेट्टी के अनुसार, वैश्विक पूंजी का बड़ा हिस्सा आने वाले वर्षों में इन्हीं क्षेत्रों में प्रवाहित होगा।
SBI चेयरमैन ने भारत के लिए किस अवसर का ज़िक्र किया?
सेट्टी ने कहा कि भारत के पास कुशल कार्यबल, मज़बूत उद्यमशीलता इकोसिस्टम और विकसित होती तकनीकी क्षमताएँ हैं जो वैश्विक निवेश आकर्षित करने में मददगार हो सकती हैं। असली अवसर ऐसी कंपनियाँ खड़ी करने में है जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में देश को नेतृत्व दिला सकें।
भारत के बैंकिंग क्षेत्र को सनराइज सेक्टर्स के लिए क्या बदलाव करने होंगे?
सेट्टी के अनुसार, पारंपरिक वित्तपोषण मॉडल पूंजी-गहन और तकनीक-आधारित उद्योगों की ज़रूरतें पूरी नहीं कर सकते। बैंकों को दीर्घकालिक वित्तपोषण और विशेष वित्तीय समाधान विकसित करने होंगे, और नवाचार व विस्तार को समर्थन देने वाले वित्तीय ढाँचे का निर्माण करना होगा।
13वाँ SBI बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव कहाँ और कब हुआ?
यह कॉन्क्लेव 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ। SBI चेयरमैन सीएस सेट्टी ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सनराइज सेक्टर्स और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता पर अपने विचार रखे।
भारत की सबसे बड़ी चुनौती क्या है — प्रतिभा की कमी या कुछ और?
सेट्टी ने स्पष्ट किया कि भारत की सबसे बड़ी चुनौती प्रतिभा या नवाचार की कमी नहीं है। असली चुनौती इन क्षमताओं को व्यावसायिक रूप से सफल उद्यमों, उन्नत तकनीकों, मज़बूत विनिर्माण आधार और वैश्विक स्तर की बौद्धिक संपदा में रूपांतरित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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