1 अक्टूबर 2026
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स्वच्छ भारत मिशन के 12 साल: एआई रोबोट, ईवी और डिजिटल डैशबोर्ड से बदल रही शहरी सफाई

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स्वच्छ भारत मिशन के 12 साल: एआई रोबोट, ईवी और डिजिटल डैशबोर्ड से बदल रही शहरी सफाई

सारांश

झाड़ू से रोबोट तक — स्वच्छ भारत मिशन के 12 साल में भारतीय शहरों की सफाई-व्यवस्था की कायापलट हो रही है। रायपुर का एफएसएम डैशबोर्ड, तिरुवनंतपुरम का एआई रोबोट, गुंटूर-चेन्नई के ईवी बेड़े और इंदौर का आईसीसीसी — ये सब मिलकर बता रहे हैं कि स्वच्छता अब तकनीक का मिशन बन चुकी है।

मुख्य बातें

स्वच्छ भारत मिशन के 12 वर्ष पूरे होने पर 1 अक्टूबर 2026 को सरकारी फैक्टशीट जारी हुई, जिसमें एआई, ईवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग का ब्यौरा दिया गया।
रायपुर नगर निगम ने यूपीवाईओजी प्लेटफॉर्म पर डिजिटल एफएसएम डैशबोर्ड से ऑनलाइन सेप्टिक टैंक सफाई बुकिंग शुरू की।
तिरुवनंतपुरम में एआई-संचालित जी-स्पाइडर रोबोट नहर सफाई में लगाया गया, जो जहरीली गैसों के संपर्क से कर्मचारियों को बचाता है।
गुंटूर में 200 से अधिक इलेक्ट्रिक ऑटो से सालाना 71,000 लीटर डीजल की बचत और एक दशक में 21,000 टन उत्सर्जन कटौती का अनुमान।
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन के 5,478 ई-रिक्शा रोज़ाना 41 टन कार्बन उत्सर्जन कम करते हैं — सालाना 15,160 टन की बचत।
इंदौर में 100 इलेक्ट्रिक वाहन और आईसीसीसी के माध्यम से रियल-टाइम जीपीएस-आधारित निगरानी लागू।

स्वच्छ भारत मिशन के 12 वर्ष पूरे होने की पूर्व संध्या पर 1 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार ने एक फैक्टशीट जारी की, जिसमें बताया गया कि देश के शहरी निकाय अब सफाई-सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ यह मिशन अब परंपरागत झाड़ू-बाल्टी की दुनिया से निकलकर सेंसर, रोबोट और रियल-टाइम ट्रैकिंग की दुनिया में प्रवेश कर चुका है।

डिजिटल डैशबोर्ड से सेप्टिक टैंक प्रबंधन

रायपुर नगर निगम ने यूपीवाईओजी प्लेटफॉर्म पर आधारित एक डिजिटल 'फिकल स्लज मैनेजमेंट' (एफएसएम) डैशबोर्ड प्रोटोटाइप पेश किया है। यह प्लेटफॉर्म आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स और नेशनल अर्बन डिजिटल मिशन से जुड़ा है।

इस प्रणाली के ज़रिए निवासी घर बैठे ऑनलाइन डी-स्लजिंग सेवाएं बुक कर सकते हैं, डिजिटल भुगतान कर सकते हैं और पूरी प्रक्रिया को ट्रैक कर सकते हैं। पहले इस काम के लिए नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी डालते ही सिस्टम स्वचालित रूप से पता खोज लेता है और एक सिंगल-पेज फॉर्म से बुकिंग हो जाती है।

काम पूरा होने के बाद ड्राइवर तस्वीरें अपलोड करते हैं और डैशबोर्ड शहर को वाहनों की निगरानी तथा संसाधन-नियोजन में मदद करता है। गौरतलब है कि यह डिजिटल निगरानी सीवर की हाथ से होने वाली खतरनाक सफाई से मशीनीकृत सफाई की ओर बढ़ने में सहायक है।

तिरुवनंतपुरम में एआई रोबोट से नहर सफाई

तिरुवनंतपुरम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने अमायिझानचन नहर की सफाई के लिए एआई-संचालित जी-स्पाइडर (SPIDER) रोबोट तैनात किया है। यह रोबोट मशीन विज़न और सेंसर इंटेलिजेंस की मदद से जमा कचरे का पता लगाता है, उसका आकलन करता है और उसे हटाता है।

रोबोट अलग-अलग तरह के कचरे, पानी के बहाव और बनावट से जुड़ी चुनौतियों के अनुसार रियल-टाइम में खुद को ढाल लेता है। इसके 'फाइव-डिग्री-ऑफ-फ्रीडम' तंत्र में मिले-जुले और अनियमित आकार के कचरे को उठाने के लिए बायोमिमेटिक पंजे का उपयोग होता है, और निकाले गए कचरे को सीधे निर्धारित कलेक्शन गाड़ियों में डाल दिया जाता है।

यह प्रणाली जहरीली गैसों, दूषित पानी और खतरनाक कचरे के सीधे संपर्क को घटाकर कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। ऊंचे जल-स्तर और लगातार बहाव की परिस्थितियों में भी यह रोबोट काम कर सकता है।

ईवी बेड़े से कार्बन उत्सर्जन में कमी

गुंटूर शहर में 200 से अधिक इलेक्ट्रिक ऑटो घर-घर कचरा संग्रह कर रहे हैं। हर गाड़ी में जीपीएस ट्रैकिंग लगी है, जिससे रियल-टाइम निगरानी संभव है। इस पहल से हर साल 71,000 लीटर से अधिक डीजल की खपत समाप्त हो गई है और अनुमान है कि एक दशक में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 21,000 टन की कमी आएगी।

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन ने अपने सभी 15 जोन में 5,478 बैटरी-चालित ई-रिक्शा तैनात किए हैं जो रोज़ाना लगभग 40 किलोमीटर चलते हैं। यह बेड़ा प्रतिदिन लगभग 41 टन कार्बन उत्सर्जन कम करता है, जो सालाना 15,160 टन की बचत है।

इंदौर ने मुख्य इलाकों में घर-घर कचरा संग्रह के लिए 100 इलेक्ट्रिक वाहन लगाए हैं। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) के ज़रिए रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग सेवा की पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित करती है।

12 साल में मिशन का बदलता स्वरूप

सरकारी फैक्टशीट के अनुसार 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ स्वच्छ भारत मिशन अब डिजिटल, सेंसर-आधारित और इलेक्ट्रिक शहरी सफाई-व्यवस्था में रूपांतरित हो चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत के शहरों में बढ़ती आबादी और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियाँ पारंपरिक तरीकों की सीमाएँ उजागर कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई और ईवी का यह मेल न केवल पर्यावरणीय लाभ देता है, बल्कि उन सफाई कर्मचारियों की जान का जोखिम भी कम करता है जो खतरनाक परिस्थितियों में काम करते रहे हैं। आगे की राह में इन प्रयोगों को देश के बाकी शहरों तक विस्तार देना और इनके दीर्घकालिक प्रभाव को मापना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ये पाँच-छह चुनिंदा शहरों के पायलट प्रोजेक्ट हैं — देश के हज़ारों शहरी निकायों का प्रतिनिधित्व नहीं करते। असली सवाल यह है कि रायपुर और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों की तकनीकी सफलता उन कस्बों तक कैसे पहुँचेगी जहाँ बजट, बुनियादी ढाँचा और तकनीकी क्षमता सीमित है। साथ ही, जी-स्पाइडर जैसे रोबोट और ईवी बेड़े से हाथ से सफाई करने वाले कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा — यह मानवीय पहलू फैक्टशीट में अनुपस्थित है। मिशन का डिजिटल रूपांतरण तभी सार्थक होगा जब स्केलेबिलिटी और सामाजिक न्याय दोनों सुनिश्चित हों।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वच्छ भारत मिशन कब शुरू हुआ और अब तक क्या बदला?
स्वच्छ भारत मिशन 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ था और 2026 में इसके 12 वर्ष पूरे हो रहे हैं। सरकारी फैक्टशीट के अनुसार यह मिशन अब परंपरागत सफाई से डिजिटल, सेंसर-आधारित और इलेक्ट्रिक शहरी सफाई-व्यवस्था में रूपांतरित हो चुका है।
तिरुवनंतपुरम में जी-स्पाइडर रोबोट क्या करता है?
जी-स्पाइडर एक एआई-संचालित नहर-सफाई रोबोट है जो मशीन विज़न और सेंसर इंटेलिजेंस से कचरे का पता लगाता, आकलन करता और हटाता है। यह जहरीली गैसों और दूषित पानी के सीधे संपर्क को कम करके सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
गुंटूर और चेन्नई के इलेक्ट्रिक वाहन पर्यावरण को कितना फायदा दे रहे हैं?
गुंटूर के 200 से अधिक इलेक्ट्रिक ऑटो से सालाना 71,000 लीटर से अधिक डीजल की बचत हो रही है और एक दशक में 21,000 टन उत्सर्जन कटौती का अनुमान है। ग्रेटर चेन्नई के 5,478 ई-रिक्शा प्रतिदिन 41 टन और सालाना 15,160 टन कार्बन उत्सर्जन कम करते हैं।
रायपुर का डिजिटल एफएसएम डैशबोर्ड कैसे काम करता है?
रायपुर नगर निगम का यह डैशबोर्ड यूपीवाईओजी प्लेटफॉर्म पर आधारित है और निवासियों को ऑनलाइन डी-स्लजिंग सेवाएं बुक करने, डिजिटल भुगतान करने और प्रक्रिया ट्रैक करने की सुविधा देता है। मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी डालते ही सिस्टम स्वचालित रूप से पता खोज लेता है और एक सिंगल-पेज फॉर्म से बुकिंग हो जाती है।
इंदौर में स्वच्छता के लिए कौन सी तकनीक अपनाई गई है?
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर ने मुख्य इलाकों में घर-घर कचरा संग्रह के लिए 100 इलेक्ट्रिक वाहन तैनात किए हैं। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) के ज़रिए रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग से सेवा की निगरानी और पारदर्शिता बनाए रखी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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