राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण में एआई चैटबॉट और डिजिटल प्लेटफॉर्म: सरकार ने संसद को दी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षणों को आधुनिक स्वरूप देने के लिए एआई-इनेबल्ड चैटबॉट, कंप्यूटर-असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यू (CAPI) और मल्टीलिंगुअल डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनाए हैं। 3 अगस्त को राज्यसभा में यह जानकारी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने दी। यह कदम भारत के राष्ट्रीय सांख्यिकीय इकोसिस्टम को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की व्यापक पहल का हिस्सा है।
आधुनिकीकरण में क्या-क्या शामिल है
ई-सिगमा सिस्टम के साथ एकीकृत CAPI प्लेटफॉर्म, एआई-इनेबल्ड चैटबॉट और मल्टीलिंगुअल इंटरफेस — ये तीनों उपकरण सर्वेक्षण प्रक्रिया को तेज़ और अधिक सटीक बनाने के लिए लागू किए गए हैं। मंत्री ने बताया कि तेजी से बदलते सामाजिक-आर्थिक संकेतकों की ज़रूरतों को देखते हुए कम अवधि वाले सर्वेक्षण भी शुरू किए गए हैं।
इसके साथ ही कुछ सर्वेक्षणों के लिए सैंपलिंग फ्रेम को मज़बूत करने हेतु प्रशासनिक डेटासेट को एकीकृत किया गया है, जिससे सर्वेक्षण की कार्यक्षमता में सुधार हुआ है और आधिकारिक आँकड़े समय पर तैयार हो रहे हैं।
मैक्रोइकॉनॉमिक आँकड़ों में सुधार
मंत्रालय ने प्रमुख आर्थिक संकेतकों — सकल घरेलू उत्पाद (GDP), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) — के आधार वर्ष में संशोधन किया है। यह संशोधन आँकड़ों की समकालीन प्रासंगिकता सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी माना जा रहा था।
डेटा हार्मोनाइजेशन और गुणवत्ता ढाँचा
डेटा को एकरूप बनाने के लिए मंत्रालय ने नेशनल मेटाडेटा स्ट्रक्चर (NMDS 2.0) अपनाया है, स्टैटिस्टिकल क्वालिटी असेसमेंट फ्रेमवर्क (SQF) लागू किया है और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण मानकों के साथ तालमेल बिठाया है। राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि मंत्रालय वैश्विक सांख्यिकीय मानकों और सर्वोत्तम तौर-तरीकों की भारतीय संदर्भ में उपयुक्तता की नियमित समीक्षा भी करता है।
सतत विकास लक्ष्य और बुनियादी ढाँचा निगरानी
मंत्रालय ने यूएन सांख्यिकी आयोग द्वारा स्थापित ग्लोबल इंडिकेटर फ्रेमवर्क (GIF) के अनुरूप सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स – नेशनल इंडिकेटर फ्रेमवर्क (NIF) तैयार किया है। मंत्री के अनुसार, यह ढाँचा वैश्विक संकेतकों पर आधारित होने के बावजूद भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और नीतिगत संदर्भों के अनुसार अनुकूलित किया गया है।
बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में मंत्रालय ने पुराने OCMS-2006 की जगह PRAIMS (प्रोजेक्ट असेसमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग और एनालिटिक्स) प्रणाली लागू की है और एक परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड भी लॉन्च किया है, जो मानकीकृत संकेतकों के ज़रिए प्रमुख बुनियादी ढाँचा क्षेत्रों के प्रदर्शन को प्रदर्शित करता है।
गौरतलब है कि यह आधुनिकीकरण ऐसे समय में हो रहा है जब भारत के सांख्यिकीय आँकड़ों की विश्वसनीयता पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। इन सुधारों से आँकड़ों की पारदर्शिता और नीति-निर्माण की गुणवत्ता दोनों पर दीर्घकालिक असर पड़ने की उम्मीद है।