3 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण में एआई चैटबॉट और डिजिटल प्लेटफॉर्म: सरकार ने संसद को दी जानकारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण में एआई चैटबॉट और डिजिटल प्लेटफॉर्म: सरकार ने संसद को दी जानकारी

सारांश

भारत के सांख्यिकी मंत्रालय ने राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षणों में एआई चैटबॉट, CAPI प्लेटफॉर्म और NMDS 2.0 जैसे उपकरण अपनाए हैं। GDP, CPI और IIP के आधार वर्ष में भी संशोधन हुआ। यह कदम भारतीय सांख्यिकी प्रणाली को वैश्विक मानकों के करीब लाने की दिशा में अहम है।

मुख्य बातें

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षणों में एआई-इनेबल्ड चैटबॉट और CAPI प्लेटफॉर्म अपनाए हैं।
राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने 3 अगस्त को राज्यसभा में यह जानकारी दी।
GDP, CPI और IIP के आधार वर्ष में संशोधन किया गया है।
NMDS 2.0 और SQF के ज़रिए डेटा हार्मोनाइजेशन और गुणवत्ता ढाँचा मज़बूत किया गया।
पुराने OCMS-2006 की जगह PRAIMS प्रणाली और परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड लॉन्च किया गया।
SDG नेशनल इंडिकेटर फ्रेमवर्क को यूएन के GIF के अनुरूप, किंतु भारतीय प्राथमिकताओं के अनुसार अनुकूलित किया गया।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षणों को आधुनिक स्वरूप देने के लिए एआई-इनेबल्ड चैटबॉट, कंप्यूटर-असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यू (CAPI) और मल्टीलिंगुअल डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनाए हैं। 3 अगस्त को राज्यसभा में यह जानकारी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने दी। यह कदम भारत के राष्ट्रीय सांख्यिकीय इकोसिस्टम को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की व्यापक पहल का हिस्सा है।

आधुनिकीकरण में क्या-क्या शामिल है

ई-सिगमा सिस्टम के साथ एकीकृत CAPI प्लेटफॉर्म, एआई-इनेबल्ड चैटबॉट और मल्टीलिंगुअल इंटरफेस — ये तीनों उपकरण सर्वेक्षण प्रक्रिया को तेज़ और अधिक सटीक बनाने के लिए लागू किए गए हैं। मंत्री ने बताया कि तेजी से बदलते सामाजिक-आर्थिक संकेतकों की ज़रूरतों को देखते हुए कम अवधि वाले सर्वेक्षण भी शुरू किए गए हैं।

इसके साथ ही कुछ सर्वेक्षणों के लिए सैंपलिंग फ्रेम को मज़बूत करने हेतु प्रशासनिक डेटासेट को एकीकृत किया गया है, जिससे सर्वेक्षण की कार्यक्षमता में सुधार हुआ है और आधिकारिक आँकड़े समय पर तैयार हो रहे हैं।

मैक्रोइकॉनॉमिक आँकड़ों में सुधार

मंत्रालय ने प्रमुख आर्थिक संकेतकों — सकल घरेलू उत्पाद (GDP), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) — के आधार वर्ष में संशोधन किया है। यह संशोधन आँकड़ों की समकालीन प्रासंगिकता सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी माना जा रहा था।

डेटा हार्मोनाइजेशन और गुणवत्ता ढाँचा

डेटा को एकरूप बनाने के लिए मंत्रालय ने नेशनल मेटाडेटा स्ट्रक्चर (NMDS 2.0) अपनाया है, स्टैटिस्टिकल क्वालिटी असेसमेंट फ्रेमवर्क (SQF) लागू किया है और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण मानकों के साथ तालमेल बिठाया है। राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि मंत्रालय वैश्विक सांख्यिकीय मानकों और सर्वोत्तम तौर-तरीकों की भारतीय संदर्भ में उपयुक्तता की नियमित समीक्षा भी करता है।

सतत विकास लक्ष्य और बुनियादी ढाँचा निगरानी

मंत्रालय ने यूएन सांख्यिकी आयोग द्वारा स्थापित ग्लोबल इंडिकेटर फ्रेमवर्क (GIF) के अनुरूप सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स – नेशनल इंडिकेटर फ्रेमवर्क (NIF) तैयार किया है। मंत्री के अनुसार, यह ढाँचा वैश्विक संकेतकों पर आधारित होने के बावजूद भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और नीतिगत संदर्भों के अनुसार अनुकूलित किया गया है।

बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में मंत्रालय ने पुराने OCMS-2006 की जगह PRAIMS (प्रोजेक्ट असेसमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग और एनालिटिक्स) प्रणाली लागू की है और एक परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड भी लॉन्च किया है, जो मानकीकृत संकेतकों के ज़रिए प्रमुख बुनियादी ढाँचा क्षेत्रों के प्रदर्शन को प्रदर्शित करता है।

गौरतलब है कि यह आधुनिकीकरण ऐसे समय में हो रहा है जब भारत के सांख्यिकीय आँकड़ों की विश्वसनीयता पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। इन सुधारों से आँकड़ों की पारदर्शिता और नीति-निर्माण की गुणवत्ता दोनों पर दीर्घकालिक असर पड़ने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये तकनीकी बदलाव आँकड़ों की स्वतंत्र सत्यापन-क्षमता को भी बढ़ाते हैं। GDP और CPI के आधार वर्ष संशोधन जैसे कदम तकनीकी रूप से आवश्यक हैं, पर इनकी विश्वसनीयता तभी स्थापित होगी जब कार्यप्रणाली सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो। भारतीय सांख्यिकी प्रणाली पर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की आलोचना के बीच NMDS 2.0 और SQF जैसे ढाँचे सही दिशा में हैं — बशर्ते इनका क्रियान्वयन केवल कागज़ों तक सीमित न रहे।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के आधुनिकीकरण में क्या-क्या बदलाव किए गए हैं?
मंत्रालय ने एआई-इनेबल्ड चैटबॉट, CAPI प्लेटफॉर्म और मल्टीलिंगुअल इंटरफेस अपनाए हैं, जो ई-सिगमा सिस्टम से जुड़े हैं। इसके अलावा कम अवधि के सर्वेक्षण और प्रशासनिक डेटासेट का एकीकरण भी किया गया है।
NMDS 2.0 और SQF क्या हैं?
NMDS 2.0 यानी नेशनल मेटाडेटा स्ट्रक्चर 2.0 एक ढाँचा है जो सांख्यिकीय डेटा को एकरूप और मानकीकृत बनाता है। SQF यानी स्टैटिस्टिकल क्वालिटी असेसमेंट फ्रेमवर्क आँकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है।
GDP और CPI के आधार वर्ष में संशोधन क्यों किया गया?
मंत्रालय के अनुसार, आधार वर्ष संशोधन इसलिए ज़रूरी था ताकि आर्थिक संकेतक समकालीन आर्थिक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित कर सकें। GDP, CPI और IIP तीनों के आधार वर्ष में यह बदलाव किया गया है।
SDG नेशनल इंडिकेटर फ्रेमवर्क क्या है और यह UN के GIF से कैसे अलग है?
SDG नेशनल इंडिकेटर फ्रेमवर्क (NIF) यूएन के ग्लोबल इंडिकेटर फ्रेमवर्क (GIF) पर आधारित है, लेकिन इसे भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और नीतिगत संदर्भों के अनुसार अनुकूलित किया गया है। यह सतत विकास लक्ष्यों की निगरानी भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप करता है।
PRAIMS क्या है और यह पुरानी प्रणाली से कैसे बेहतर है?
PRAIMS यानी प्रोजेक्ट असेसमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग और एनालिटिक्स — यह पुराने OCMS-2006 की जगह लाई गई प्रणाली है। यह केंद्रीय क्षेत्र के बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की निगरानी के लिए मानकीकृत संकेतकों और एक परफॉर्मेंस डैशबोर्ड के ज़रिए अधिक पारदर्शी और वास्तविक-समय ट्रैकिंग प्रदान करती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले