असम का स्वच्छ भारत मिशन रोडमैप: GIS मॉनिटरिंग, सर्कुलर इकोनॉमी और पुरस्कार प्रणाली से बदलेगी सफाई की तस्वीर
सारांश
मुख्य बातें
असम सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन को राज्य में एक निरंतर, जन-भागीदारी वाले अभियान में रूपांतरित करने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है। 12 अगस्त को गुवाहाटी में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इस रोडमैप की रूपरेखा तय की गई, जिसमें व्यवहार परिवर्तन, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और ज़मीनी स्तर पर नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को केंद्र में रखा गया है। यह पहल असम के ग्रामीण और शहरी — दोनों क्षेत्रों को एक साथ लक्षित करती है।
मुख्य घटनाक्रम
बुधवार की बैठक में अधिकारियों ने स्वच्छता से जुड़े बुनियादी ढाँचे को केवल बनाने तक सीमित न रखकर उसके सुचारु संचालन, रखरखाव और दीर्घकालिक टिकाऊपन पर विशेष ज़ोर दिया। चर्चा में वेस्ट सेग्रीगेशन (कचरे को स्रोत पर ही अलग करना), ग्रे-वॉटर मैनेजमेंट, सीवेज और अपशिष्ट जल उपचार तथा जलवायु के अनुकूल स्वच्छता पद्धतियाँ अपनाने जैसे अहम बिंदु शामिल रहे।
गौरतलब है कि यह समीक्षा ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार स्वच्छ भारत मिशन के अगले चरण की तैयारियों में जुटी है और राज्यों से ठोस क्रियान्वयन योजनाएँ माँगी जा रही हैं।
तकनीक का उपयोग
रोडमैप में GIS-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम के ज़रिये स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के परिणामों पर रियल-टाइम नज़र रखने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, कचरा संग्रह, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सर्कुलर इकोनॉमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था) को बढ़ावा देने की रणनीति भी तैयार की गई है।
अधिकारियों के अनुसार, तकनीक-आधारित निगरानी से जवाबदेही सुनिश्चित होगी और योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता आएगी।
पुरस्कार प्रणाली: शहरी और ग्रामीण दोनों स्तरों पर
प्रस्तावित रोडमैप का एक प्रमुख घटक एक वार्षिक पुरस्कार प्रणाली है, जो स्वच्छता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों, शहरी स्थानीय निकायों, पंचायतों और ज़मीनी संस्थाओं को प्रोत्साहित करेगी।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के अंतर्गत, बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरी स्थानीय निकायों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक नगर निगम, नगर बोर्ड और टाउन कमेटी के सर्वश्रेष्ठ वार्ड को ज़िला स्तर पर पुरस्कार दिए जाएंगे।
स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत, पंचायती राज संस्थाओं के प्रदर्शन के आधार पर ज़िलों का मूल्यांकन होगा। ग्राम पंचायत स्तर पर भी सर्वश्रेष्ठ वार्डों के लिए वार्षिक पुरस्कार शुरू किए जाएंगे। इसके साथ ही, गाँवों में स्वच्छता के आधार पर सबसे साफ़ सड़क की पहचान कर उसे सम्मानित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है — जो ज़मीनी स्तर पर प्रतिस्पर्धा और सामुदायिक गर्व को बढ़ावा देगा।
आम जनता पर असर
इस रोडमैप का सबसे व्यापक असर असम के ग्रामीण और शहरी निवासियों पर पड़ेगा। कचरे को स्रोत पर अलग करने की अनिवार्यता से घरेलू स्तर पर व्यवहार परिवर्तन की अपेक्षा होगी, जबकि ग्रे-वॉटर और सीवेज प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था से सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार अपेक्षित है। पुरस्कार प्रणाली से नागरिकों में स्वामित्व की भावना विकसित होने की उम्मीद है।
क्या होगा आगे
रोडमैप अभी प्रस्तावित चरण में है और इसके क्रियान्वयन की समयसीमा तथा बजट का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। आलोचकों का कहना है कि असम जैसे बड़े और विविध भूगोल वाले राज्य में ज़मीनी स्तर तक पहुँच सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। योजना की सफलता काफी हद तक स्थानीय निकायों की क्षमता और संसाधन उपलब्धता पर निर्भर करेगी।