एली अवराम: 14 साल में 'देवदास' देखी, स्वीडन से मुंबई तक का सफर और बॉलीवुड में धमाकेदार एंट्री
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेत्री एली अवराम का नाम आज हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में किसी पहचान का मोहताज नहीं है, लेकिन उनकी यह यात्रा स्टॉकहोम, स्वीडन से शुरू हुई थी — एक ऐसे शहर से जो बॉलीवुड की चमक-दमक से हजारों किलोमीटर दूर है। 29 जुलाई 1990 को जन्मी एली ने महज 14 साल की उम्र में संजय लीला भंसाली की फिल्म 'देवदास' देखी और उसी पल तय कर लिया कि उनकी मंजिल मुंबई है।
वह पल जिसने सब बदल दिया
एली अवराम का पूरा नाम एलिसाबेट अवरामिदू ग्रानलुंड है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वह करीब 14 साल की थीं, तब उन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्म 'देवदास' देखी। लगभग चार घंटे लंबी इस फिल्म के भव्य सेट, पारंपरिक भारतीय परिधान, संगीत और कलाकारों की अदाकारी ने उन्हें इस कदर मंत्रमुग्ध कर दिया कि वह पर्दे से नजरें नहीं हटा सकीं। उस वक्त उन्हें हिंदी भाषा तक नहीं आती थी, फिर भी उन्होंने मन में ठान लिया कि एक दिन वह हिंदी फिल्मों में काम करेंगी। बचपन से ही डांस, गायन और अभिनय में गहरी रुचि रखने वाली एली के लिए यह फिल्म एक निर्णायक मोड़ साबित हुई।
स्वीडन में सपने की नींव
17 साल की उम्र में एली ने अपने सपने की दिशा में पहला ठोस कदम उठाया और स्टॉकहोम के 'परदेसी डांस ग्रुप' से जुड़ गईं, जहाँ वह बॉलीवुड गानों पर परफॉर्म करने लगीं। इसके साथ ही उन्होंने स्वीडन में कुछ अभिनय परियोजनाओं में भी हिस्सा लिया। साल 2008 में आई स्वीडिश फिल्म 'फॉर्बिडन फ्रूट' में उन्होंने अभिनय किया, जिससे उन्हें पहला पेशेवर अनुभव मिला। यह ऐसे समय में आया जब वह अभी भी हिंदी सीखने की कोशिश कर रही थीं।
मुंबई में संघर्ष और शुरुआत
साल 2012 में एली ने बड़ा फैसला लिया और टूरिस्ट वीजा पर मुंबई पहुँच गईं — मकसद घूमना नहीं, बल्कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाना था। एक नई भाषा, नया देश और इंडस्ट्री की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच उन्होंने खुद को तैयार किया। उन्होंने हिंदी बोलना सीखा, डांस की ट्रेनिंग ली और लगातार ऑडिशन देती रहीं। गौरतलब है कि बिना किसी गॉडफादर या फिल्मी पृष्ठभूमि के एक विदेशी लड़की का बॉलीवुड में टिके रहना अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि थी।
पहला बड़ा मौका और पहचान
साल 2013 में रिलीज हुई फिल्म 'मिकी वायरस' एली की पहली बड़ी हिंदी फिल्म रही, जिसमें उन्होंने मनीष पॉल के साथ काम किया। हालाँकि फिल्म से सीमित पहचान मिली, लेकिन उसी साल टीवी रियलिटी शो 'बिग बॉस 7' में हिस्सा लेने के बाद वह घर-घर में पहचानी जाने लगीं। शो में उनकी मासूमियत और अलग अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आया।
फिल्मी सफर और आगे की राह
इसके बाद एली ने एक के बाद एक कई फिल्मों में काम किया। साल 2015 में वह कपिल शर्मा की फिल्म 'किस किसको प्यार करूं' में नजर आईं। इसके अलावा उन्होंने 'नाम शबाना', 'पोस्टर बॉयज', 'बाजार', 'मलंग', 'कोई जाने ना', 'गुडबाय' और 'गणपत' जैसी फिल्मों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। आमिर खान के साथ उनका गाना 'हर फन मौला' भी खासा चर्चित रहा। स्वीडन से मुंबई तक का यह सफर एली की जिद, मेहनत और उस एक फिल्म की ताकत का प्रमाण है जिसने एक किशोरी की जिंदगी की दिशा बदल दी।