मोहनीश बहल का जन्मदिन: 5 फ्लॉप के बाद पायलट बनने की राह पर थे, सलमान खान ने 'मैंने प्यार किया' से बदली किस्मत
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता मोहनीश बहल का जन्म 14 अगस्त 1961 को मुंबई में हुआ था। 1980 के दशक के मध्य में लगातार पाँच-छह फिल्मों की नाकामी के बाद उन्होंने बॉलीवुड छोड़कर विमानन क्षेत्र में जाने का फैसला कर लिया था और कमर्शियल फ्लाइंग लाइसेंस की तैयारी शुरू कर दी थी। लेकिन एक जिम में सलमान खान से हुई मुलाकात ने उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दी।
पाँच फ्लॉप और टूटा हुआ हौसला
मोहनीश बहल ने 1983 में फिल्म 'बेकरार' से बतौर सह-अभिनेता अपना करियर शुरू किया, जो बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह नाकाम रही। इसके बाद 'तेरी बाहों में' (1984) भी फ्लॉप रही। रामसे ब्रदर्स की हॉरर फिल्म 'पुराना मंदिर' (1984) ने कुछ दर्शक जुटाए, लेकिन उस दौर में हॉरर फिल्मों को 'बी-ग्रेड' सिनेमा माना जाता था, जिससे उनके करियर को कोई ठोस फायदा नहीं हुआ।
निराशा इतनी गहरी थी कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से नाता तोड़ने का मन बना लिया और पायलट बनने की दिशा में कदम बढ़ा दिए। यह ऐसे समय में आया जब उनकी माँ, दिग्गज अभिनेत्री नूतन, हमेशा उन्हें यही समझाती थीं कि समय बीत जाता है और जीवन कभी खत्म नहीं होता।
सलमान खान की दोस्ती और 'मैंने प्यार किया' का मोड़
जिम में हुई एक मुलाकात में सलमान खान और मोहनीश बहल के बीच गहरी दोस्ती हो गई। जब राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्म 'मैंने प्यार किया' (1989) के लिए कास्टिंग चल रही थी, तब सलमान खान ने खलनायक 'जीवन' की भूमिका के लिए मोहनीश बहल का नाम सुझाया। यह एक अवसर उनके लगभग समाप्त हो चुके करियर को पुनर्जीवित करने के लिए काफी था।
फिल्म की ऐतिहासिक व्यावसायिक सफलता ने मोहनीश बहल को बॉलीवुड में स्थापित कर दिया। गौरतलब है कि यह वही राजश्री प्रोडक्शंस था जिसने बाद में उनकी नकारात्मक छवि को भी तोड़ा।
राजश्री की फिल्मों ने बनाया परिवारों का चहेता
'हम आपके हैं कौन' (1994) और 'हम साथ-साथ हैं' (1999) में एक आदर्श और संस्कारी भाई की भूमिका निभाकर मोहनीश बहल भारतीय परिवारों के बीच घर-घर पहचाने जाने वाले चेहरा बन गए। यह उनके करियर का वास्तविक टर्निंग पॉइंट था — खलनायक से पारिवारिक नायक तक का सफर।
टेलीविजन पर 'डॉ. शशांक' की अमिट छाप
2002 में स्टार प्लस के मेडिकल ड्रामा 'संजीवनी: अ मेडिकल बून' में डॉ. शशांक गुप्ता की भूमिका ने उन्हें टेलीविजन पर भी उतनी ही पहचान दिलाई। यह शो एचआईवी और अन्य गंभीर चिकित्सा मुद्दों पर संवेदनशीलता से बात करने वाला भारतीय टेलीविजन का पहला कार्यक्रम माना जाता है।
इस भूमिका के लिए उन्हें 2003 में इंडियन टेलीविजन एकेडमी (ITA) का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला। बाद में 'कुछ तो लोग कहेंगे' (2011) में डॉ. आशुतोष की भूमिका को दर्शकों ने सराहा, हालाँकि लंबे शूटिंग शेड्यूल के कारण पीठ में गंभीर दर्द की समस्या होने पर उन्हें शो बीच में छोड़ना पड़ा। 2019 में 17 साल बाद उन्होंने 'संजीवनी 2' में डॉ. शशांक के रूप में वापसी की।
समृद्ध पारिवारिक विरासत और निजी जीवन
मोहनीश बहल की पारिवारिक पृष्ठभूमि भारतीय सिनेमा से गहराई से जुड़ी है। उनकी माँ दिग्गज अभिनेत्री नूतन थीं और पिता लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीश बहल। उनकी नानी शोभना समर्थ और मौसी तनुजा भी जानी-मानी अभिनेत्रियाँ रही हैं, जबकि अभिनेत्री काजोल उनकी चचेरी बहन हैं।
निजी जीवन में उन्होंने 23 अप्रैल 1992 को अभिनेत्री एकता सोहिनी (आरती बहल) से विवाह किया। उनकी दो बेटियाँ हैं — प्रनूतन और कृषा। बड़ी बेटी प्रनूतन ने 2019 में सलमान खान द्वारा निर्मित फिल्म 'नोटबुक' से अभिनय में कदम रखा। उनकी अंतिम फिल्म 'पानीपत' (2019) रही और वर्तमान में वे पारिवारिक व्यावसायिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।