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माधुरी दीक्षित का खुलासा: '90 के दशक में मैगजीन कमेंट करती थीं, आज जैसी ट्रोलिंग नहीं थी'

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माधुरी दीक्षित का खुलासा: '90 के दशक में मैगजीन कमेंट करती थीं, आज जैसी ट्रोलिंग नहीं थी'

सारांश

माधुरी दीक्षित ने 'कौन होणार करोड़पति' के मंच से 90 के दशक की दुनिया और आज की सोशल मीडिया ट्रोलिंग के बीच का फ़र्क बयान किया। उनका कहना है — काम से प्यार और नीयत की सच्चाई ही असली ढाल है। पाँच दशकों के करियर वाली इस अभिनेत्री की बात आज के युवा कलाकारों के लिए एक ज़रूरी सीख है।

मुख्य बातें

माधुरी दीक्षित मराठी शो 'कौन होणार करोड़पति' में बतौर गेस्ट नज़र आईं।
उन्होंने कहा कि 90 के दशक में मैगजीन सेलेब्स पर कमेंट करती थीं, लेकिन आज की सोशल मीडिया ट्रोलिंग जैसा माहौल नहीं था।
अभिनेत्री ने बताया कि काम के प्रति लगाव और नीयत की सच्चाई ने उन्हें नकारात्मकता से दूर रखा।
माधुरी ने 1984 में फिल्म 'अबोध' से करियर शुरू किया और पाँच दशकों में 'तेजाब' , 'हम आपके हैं कौन..!' , 'देवदास' जैसी यादगार फिल्में दीं।
शो में शिव ठाकरे और गौतमी पाटिल भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।

अभिनेत्री माधुरी दीक्षित इन दिनों मराठी क्विज शो 'कौन होणार करोड़पति' में बतौर गेस्ट नज़र आ रही हैं। शो के एक विशेष एपिसोड के दौरान उन्होंने खुलकर बात की कि कैसे पिछले कुछ दशकों में आलोचना का स्वरूप बदल गया है — और आज के सोशल मीडिया युग की ट्रोलिंग उनके दौर से किस कदर अलग है।

शो में क्या हुआ

'कौन होणार करोड़पति' के इस स्पेशल एपिसोड में शिव ठाकरे और गौतमी पाटिल विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। बातचीत के दौरान शिव ठाकरे ने माधुरी से पूछा कि इतने लंबे और सफल करियर के बावजूद वे ज़मीन से कैसे जुड़ी रहीं और ट्रोलिंग के असर से खुद को कैसे बचाया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों के लिए थोड़ी-सी भी शोहरत संभालना मुश्किल हो जाती है।

माधुरी दीक्षित का जवाब

इस पर अभिनेत्री ने कहा, 'मुझे अपने काम से बहुत लगाव था और मैं जो भी करती हूँ, उसे सच्चे मन से करती हूँ। इसी वजह से मैंने कभी ट्रोलिंग पर ध्यान ही नहीं दिया। हाँ, उस समय कुछ मैगजीन्स थीं जो सेलेब्स के बारे में कमेंट करती थीं, लेकिन वो आज सोशल मीडिया के जैसा बिल्कुल भी नहीं था, जहाँ इतनी ज़्यादा ट्रोलिंग होती है और लोग एक ही बात को बार-बार कहते रहते हैं।'

उन्होंने आगे कहा, 'हम जो भी काम कर रहे हैं, उससे बस प्यार करना चाहिए और हमारी नीयत अच्छी होनी चाहिए। बस, फिर और कुछ ज़्यादा मायने नहीं रखता।'

माधुरी का करियर: पाँच दशकों का सफर

माधुरी दीक्षित ने 1984 में फिल्म 'अबोध' से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद वे हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में से एक बन गईं। 'तेजाब', 'राम लखन', 'दिल', 'साजन', 'बेटा', 'हम आपके हैं कौन..!', 'दिल तो पागल है', 'मृत्युदंड' और 'देवदास' जैसी फिल्मों ने उन्हें पर्दे पर अमर कर दिया। अपनी अभिनय प्रतिभा और बेमिसाल डांस के लिए मशहूर माधुरी का फिल्मी सफर पाँच दशकों से भी लंबा रहा है।

आम जनता पर असर

माधुरी की यह बात ऐसे समय में आई है जब सोशल मीडिया पर सेलेब्रिटी ट्रोलिंग एक गंभीर विषय बन चुकी है। गौरतलब है कि कई युवा कलाकार और सार्वजनिक हस्तियाँ ऑनलाइन नफ़रत के मानसिक दबाव को लेकर खुलकर बोल चुकी हैं। माधुरी की 'काम से प्यार' वाली सीख एक ऐसे दौर में सार्थक संदेश देती है जब डिजिटल आलोचना का पैमाना हर दिन बढ़ता जा रहा है।

आगे क्या

'कौन होणार करोड़पति' में माधुरी की उपस्थिति दर्शकों के बीच चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पाँच दशकों के करियर और अनगिनत यादगार किरदारों के साथ, माधुरी दीक्षित आज भी भारतीय मनोरंजन जगत की सबसे प्रभावशाली आवाज़ों में से एक हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब माधुरी की 'काम से प्यार करो' वाली सलाह एक सरल लेकिन गहरी बात कहती है। लेकिन यह भी ध्यान देना ज़रूरी है कि 90 के दशक की मैगजीन आलोचना और आज की 24×7 ट्रोलिंग की तुलना उस पीढ़ी के अनुभव को पूरी तरह नहीं समेट सकती, जिसके पास न डिजिटल सुरक्षा तंत्र था, न जागरूकता। बड़ी ज़िम्मेदारी इंडस्ट्री और प्लेटफॉर्म की है, न सिर्फ व्यक्तिगत मनोबल की।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माधुरी दीक्षित ने 'कौन होणार करोड़पति' में ट्रोलिंग को लेकर क्या कहा?
माधुरी दीक्षित ने कहा कि 90 के दशक में मैगजीन सेलेब्स पर कमेंट करती थीं, लेकिन वो आज की सोशल मीडिया ट्रोलिंग जैसा बिल्कुल नहीं था। उन्होंने बताया कि काम के प्रति लगाव और सच्ची नीयत ने उन्हें हमेशा फोकस बनाए रखा।
माधुरी दीक्षित किस मराठी शो में गेस्ट के तौर पर आई हैं?
माधुरी दीक्षित मराठी क्विज शो 'कौन होणार करोड़पति' में बतौर गेस्ट नज़र आ रही हैं। इस स्पेशल एपिसोड में शिव ठाकरे और गौतमी पाटिल भी विशेष अतिथि थे।
माधुरी दीक्षित ने फिल्मों में डेब्यू कब किया था?
माधुरी दीक्षित ने 1984 में फिल्म 'अबोध' से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद 'तेजाब', 'हम आपके हैं कौन..!', 'दिल तो पागल है' और 'देवदास' जैसी फिल्मों से वे हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शुमार हो गईं।
माधुरी दीक्षित ने फेम और ट्रोलिंग से बचने का क्या मंत्र बताया?
माधुरी ने कहा कि जो भी काम करें, उससे प्यार करें और नीयत अच्छी रखें — बस फिर और कुछ ज़्यादा मायने नहीं रखता। उन्होंने नकारात्मक कमेंट्स पर ध्यान न देने को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया।
90 के दशक और आज की सोशल मीडिया ट्रोलिंग में क्या फर्क है?
माधुरी दीक्षित के अनुसार, 90 के दशक में कुछ मैगजीन ही सेलेब्स पर टिप्पणी करती थीं, जबकि आज सोशल मीडिया पर एक ही बात को बार-बार दोहराया जाता है और ट्रोलिंग का पैमाना कहीं ज़्यादा बड़ा है।
राष्ट्र प्रेस
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