आंचल खुराना का टीवी कास्टिंग पर बड़ा खुलासा: ₹5-7 हज़ार रोज़ाना, अनुभव की अनदेखी
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री आंचल खुराना ने 2 जून 2026 को टेलीविजन इंडस्ट्री की कास्टिंग प्रक्रिया और पारिश्रमिक ढाँचे पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रतिभाशाली और अनुभवी कलाकारों की व्यवस्थित अनदेखी के कारण टीवी इंडस्ट्री का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
कास्टिंग में क्या हो रहा है गलत
खुराना के अनुसार, आजकल निर्माता और कास्टिंग टीमें कम बजट में काम करने वाले कलाकारों को प्राथमिकता दे रही हैं। नए कलाकार कम पारिश्रमिक पर काम करने को तैयार हो जाते हैं, जबकि 15 से अधिक वर्षों का अनुभव रखने वाले स्थापित कलाकारों की फीस अपेक्षाकृत अधिक होती है। उनके मुताबिक, सबसे अधिक नुकसान उन कलाकारों को हो रहा है जो न तो बड़े स्टार हैं और न ही नए — यानी मध्यम स्तर के अनुभवी कलाकार।
सोशल मीडिया फॉलोअर्स बनाम अभिनय क्षमता
खुराना ने कहा कि कई शो में केवल एक-दो अनुभवी कलाकार लिए जाते हैं और बाकी भूमिकाओं के लिए ऐसे लोगों को चुना जाता है जिन्हें अभिनय का पर्याप्त अनुभव नहीं होता। उनका मानना है कि सोशल मीडिया फॉलोअर्स, लोकप्रियता और आकर्षक व्यक्तित्व को अभिनय क्षमता से ऊपर रखा जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि एक कुशल अभिनेता दर्शकों से बेहतर जुड़ाव बनाता है और शो की समग्र गुणवत्ता को ऊँचा उठाता है।
पारिश्रमिक पर खुलासा
15 साल से अधिक समय से इंडस्ट्री में सक्रिय खुराना ने बताया कि उन्हें आज भी कई प्रोजेक्ट्स के लिए प्रतिदिन केवल ₹5,000 से ₹7,000 तक का भुगतान ऑफर किया जाता है। उन्होंने इसे अपने अनुभव और उपलब्धियों के मुकाबले 'निराशाजनक और अपमानजनक' बताया। यह ऐसे समय में आया है जब OTT प्लेटफॉर्म्स पर अनुभवी कलाकारों की माँग और पारिश्रमिक दोनों बढ़ रहे हैं।
टीवी बनाम OTT की चुनौती
खुराना ने चेतावनी दी कि टीवी शो पहले की तरह अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में टेलीविजन की दर्शक संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है, जबकि OTT और फिल्मों की लोकप्रियता बढ़ी है। उनके अनुसार, केवल कुछ वरिष्ठ कलाकार किसी शो को लंबे समय तक नहीं बचा सकते — पूरी कास्ट में प्रतिभा का संतुलन ज़रूरी है।
सुझाव और आगे की राह
खुराना ने सुझाव दिया कि कास्टिंग के दौरान अनुभवी कलाकारों के ऑडिशन सीधे चैनलों तक पहुँचाए जाने चाहिए, ताकि प्रतिभा को उचित अवसर मिल सके। उनका मानना है कि यदि इंडस्ट्री ने अपने काम करने के तरीकों में सुधार नहीं किया, तो आने वाले वर्षों में टेलीविजन की प्रासंगिकता और घटती जाएगी।