अली फजल ने 'शेखर टुनाइट' पर खोला दिल — 'बेटी ने सिनेमा और ज़िंदगी देखने का नज़रिया बदल दिया'
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेता अली फजल ने हाल ही में अभिनेता शेखर सुमन के चर्चित शो 'शेखर टुनाइट' में शिरकत की, जहाँ उन्होंने पिता बनने के बाद अपनी ज़िंदगी में आए गहरे बदलावों को बेबाकी से साझा किया। मुंबई में रिकॉर्ड हुए इस शो के प्रोमो में अली फजल भावुक नज़र आए और बताया कि बेटी के जन्म ने उनकी सोच, संवेदनशीलता और सिनेमा को देखने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है।
फादरहुड का एहसास — शब्दों से परे
शो में जब शेखर सुमन ने अली से उनकी ज़िंदगी के बारे में पूछा, तो अभिनेता ने कहा, 'पिता बनने के बाद ज़िंदगी पूरी तरह बदल चुकी है। फादरहुड एक ऐसा अनुभव है, जिसे शब्दों में पूरी तरह बयान नहीं किया जा सकता। लोग इसके बारे में कितनी भी बात करें, लेकिन जब तक कोई खुद इस एहसास को महसूस नहीं करता, तब तक इसकी असली गहराई समझ नहीं आती। यह दुनिया का सबसे सच्चा एहसास है।'
अली फजल ने यह भी जोड़ा कि पिता बनने के बाद उनकी सोच में एक नई संवेदनशीलता आई है। उनके शब्दों में, 'मेरी बेटी ने मुझे छोटी-छोटी चीज़ों की अहमियत समझाई है। जब भी मैं उसे देखता हूँ, तो ज़िंदगी का एक नया रूप दिखाई देता है।'
बच्चों की दुनिया और सिनेमा की एडिटिंग — एक अनोखी तुलना
बातचीत के दौरान अली फजल ने बच्चों के स्वभाव और सिनेमा के बीच एक दिलचस्प समानता खींची। उन्होंने कहा, 'बच्चों का व्यवहार बिल्कुल सिनेमा की एडिटिंग जैसा होता है। बच्चे एक पल में कुछ और सोच रहे होते हैं और अगले ही पल उनकी दुनिया बदल जाती है — जैसे फिल्म में एक कट के बाद पूरा सीन बदल जाता है।'
अभिनेता ने आगे कहा कि बेटी को देखकर उन्हें समझ आया कि 'यही असली फोकस और असली सिनेमा है, क्योंकि बच्चों की दुनिया पूरी तरह अप्रत्याशित होती है।' यह तुलना उनके अभिनेता और पिता — दोनों रूपों की गहरी समझ को दर्शाती है।
बच्चे का आकर्षण — कमरे में मौजूद हर किसी की नज़र
अली फजल ने एक रोचक उदाहरण देते हुए कहा, 'अगर किसी कमरे में कोई बच्चा खेल रहा हो, तो वहाँ मौजूद सभी लोगों का ध्यान अपने आप उसी बच्चे की तरफ चला जाता है। यह बात मैंने हमेशा महसूस की है, और अब पिता बनने के बाद इसे और गहराई से समझ पाया हूँ।'
गौरतलब है कि अली फजल और उनकी पत्नी ऋचा चड्ढा ने हाल ही में पितृत्व की इस नई पारी की शुरुआत की है, और दोनों अपनी बेटी को लेकर सोशल मीडिया पर भी खुशी ज़ाहिर करते रहे हैं।
सिनेमा पर पितृत्व का असर
अभिनेता ने स्वीकार किया कि बेटी के आने के बाद वे सिनेमा को भी पहले से कहीं ज़्यादा भावनात्मक नज़रिए से देखने लगे हैं। उनके अनुसार, 'बच्चों की अपनी एक अलग दुनिया होती है — उनका अपना संगीत, अपनी लय और अपनी ऊर्जा। कभी वे बेहद शांत और प्यारे लगते हैं, तो कभी बहुत शोर मचाते हैं, लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी खूबसूरती है।'
यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड में कई अभिनेता पितृत्व और मातृत्व के अनुभवों को सार्वजनिक मंचों पर साझा कर रहे हैं — जो दर्शकों से एक नई, व्यक्तिगत स्तर पर जुड़ाव बनाने की कोशिश है। अली फजल की यह बेबाक बातचीत उनके प्रशंसकों को उनके इंसानी पहलू से रूबरू कराती है।