क्या बॉलीवुड के लोग खुद को भगवान समझते हैं? बांग्लादेशी खिलाड़ी की खरीद पर अनिरुद्धाचार्य महाराज का गुस्सा
सारांश
Key Takeaways
- बॉलीवुड का प्रभाव और उसकी जिम्मेदारी जरूरी है।
- अनैतिकता का विरोध करना चाहिए।
- खिलाड़ियों की खरीद में संवेदनशीलता होनी चाहिए।
- समाज में जागरूकता फैलाना आवश्यक है।
- हिंदू
वृंदावन, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता शाहरुख खान की टीम, कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर), द्वारा बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को 9 करोड़ रुपये में खरीदने के बाद विवाद बढ़ गया है। इस खरीद पर विरोध प्रदर्शन के चलते बीसीसीआई ने केकेआर को इस बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम से बाहर करने का निर्देश दिया है। इसी बीच, वृंदावन के कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और बॉलीवुड पर तीखी आलोचना की है।
अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा, "बॉलीवुड के लोग खुद को भगवान समझते हैं। उन्हें लगता है कि वे जो भी करें, कोई उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकता क्योंकि बॉलीवुड बहुत ताकतवर है। उनके पास पैसे की कोई कमी नहीं है, इसलिए उनमें घमंड है कि कोई उन्हें छू नहीं सकता। वे खुलेआम गुटखा और शराब का प्रचार करते हैं। वे समाज को अनैतिकता की शिक्षा देते हैं। क्या सच में कोई उन्हें रोक पाया है? बॉलीवुड का मतलब है ताकत। वे खुद में ही ताकतवर लोग हैं।
बीसीसीआई द्वारा केकेआर को बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को टीम से बाहर करने के निर्देश पर अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा, "हम यहां कहते हैं, 'सह खेलती, खड़ी सखा।' जो आपके साथ खेलता है, वही दोस्त है। हमारा मित्र कौन है? जो हमारे हिंदुओं को जलाता है।
उन्होंने आगे कहा कि आज ही मैंने सुना कि एक बच्चे को पीट-पीटकर मार डाला गया। जो हमारे हिंदुओं से इतनी नफरत करते हैं, हम उनके साथ क्रिकेट क्यों खेलें? क्या आप 9 करोड़ में खरीददारी कर रहे हैं? आपके पास पैसा है, लेकिन क्या आप उन्हें यह नहीं समझा सकते कि हम भारत के लोग हैं? आप हिंदुओं को जिंदा जलाकर, भारत से पैसे कमाकर उन लोगों को धन भेज रहे हैं जो हिंदुओं से घोर नफरत करते हैं।
अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि फिल्म उद्योग की भूमिका क्या है? वे भारत की जनता को अपनी फिल्में बेचकर पैसे कमाते हैं और फिर उस धन को अन्यत्र बांट देते हैं। भारत की जनता ही उन्हें सुपर-डुपर स्टार बनाती है, जबकि उनका दिल बांग्लादेशियों के लिए धड़कता है। क्या यह हमारे साथ धोखा नहीं है? यह छल है। आपने हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है और उनके भरोसे को तोड़ा है। इसे विश्वासघात कहते हैं।