अंजू महेंद्रू ने संजीव कुमार की पुण्यतिथि पर शेयर की दुर्लभ थ्रोबैक तस्वीर, लिखा 'मिस यू माय ब्रो'
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेत्री अंजू महेंद्रू ने 7 नवंबर 2026 को दिवंगत अभिनेता संजीव कुमार की पुण्यतिथि पर सोशल मीडिया के ज़रिए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने दोनों की एक दुर्लभ ब्लैक एंड व्हाइट थ्रोबैक तस्वीर साझा करते हुए लिखा — 'मिस यू माय ब्रो' — जो उनके गहरे व्यक्तिगत रिश्ते की झलक देती है।
वह दुर्लभ तस्वीर जो सब कुछ कह देती है
साझा की गई तस्वीर में संजीव कुमार फॉर्मल सूट और पैटर्न वाली टाई में नज़र आ रहे हैं, जबकि अंजू महेंद्रू उनके बगल में खड़ी हैं। यह श्वेत-श्याम तस्वीर दोनों के बीच के निजी और भावनात्मक जुड़ाव को उनके परदे के रिश्ते से कहीं बढ़कर दर्शाती है। केवल चार शब्दों — 'मिस यू माय ब्रो' — में अंजू ने अपनी पीड़ा और स्नेह दोनों को समेट दिया।
परदे से परे था उनका रिश्ता
अंजू महेंद्रू और संजीव कुमार ने हिंदी सिनेमा की दो फिल्मों में साथ काम किया था। पहली फिल्म 'दस्तक' थी, जो 1970 में रिलीज़ हुई और जिसका निर्देशन राजिंदर सिंह बेदी ने किया था। दूसरी फिल्म 'मुक्ति' थी, जो 1977 में पर्दे पर आई और जिसे राज तिलक ने निर्देशित किया। इन्हीं फिल्मों के दौरान दोनों के बीच एक गहरी और आत्मीय दोस्ती पनपी, जो जीवनभर बनी रही। अंजू उन्हें प्यार से 'हरि' कहकर बुलाती थीं — जो उनके असली नाम हरिहर जेठालाल जरीवाला का संक्षिप्त रूप था।
संजीव कुमार: हिंदी सिनेमा का बहुमुखी सितारा
संजीव कुमार का जन्म 9 जुलाई 1938 को हुआ था। उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपने आप को सबसे बहुमुखी अभिनेताओं में एक के रूप में स्थापित किया — चाहे गंभीर भूमिका हो, हास्य हो या भावनात्मक। उनकी सबसे यादगार फिल्मों में 'शोले' का ठाकुर बलदेव सिंह का किरदार आज भी अमर है। इसके अलावा 'आंधी', 'मौसम', 'अंगूर', 'त्रिशूल', 'खिलौना', 'सीता और गीता', 'पति पत्नी और वो', 'मंचली', 'नमकीन' और 'हीरो' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय की गहराई ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
महज 47 वर्ष की उम्र में हुई असमय विदाई
संजीव कुमार का 6 नवंबर 1985 को केवल 47 वर्ष की आयु में दिल के दौरे के कारण निधन हो गया था। उनका यह असमय जाना हिंदी सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति थी। गौरतलब है कि आज भी उनकी पुण्यतिथि पर उनके प्रशंसक, साथी कलाकार और करीबी उन्हें उतनी ही गर्मजोशी से याद करते हैं — अंजू महेंद्रू की यह पोस्ट उसी अमिट यादों की एक और कड़ी है।