15 अक्टूबर 2026
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राजपाल यादव चेक बाउंस केस: सुप्रीम कोर्ट ने पासपोर्ट रिलीज का आदेश दिया, मीडिएशन का निर्देश

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राजपाल यादव चेक बाउंस केस: सुप्रीम कोर्ट ने पासपोर्ट रिलीज का आदेश दिया, मीडिएशन का निर्देश

सारांश

चेक बाउंस के सात मामलों में उलझे अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत — ₹85 लाख की बकाया रकम जमा होने के बाद पासपोर्ट रिलीज का आदेश मिला। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने दोनों पक्षों को मीडिएशन सेंटर भेजा, जो 2010 के ₹5 करोड़ के कर्ज विवाद का अंत हो सकता है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 15 अक्टूबर 2026 को अभिनेता राजपाल यादव का पासपोर्ट रिलीज करने का निचली अदालत को आदेश दिया।
शेष ₹85 लाख की रकम 13 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा कराई गई; कुल जमा रकम ₹2 करोड़ ।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने दोनों पक्षों को मीडिएशन सेंटर भेजने का निर्देश दिया।
मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ ₹5 करोड़ के कर्ज से जुड़े 7 चेक बाउंस मामलों का है।
राजपाल यादव ने 2010 में फिल्म 'अता पता लापता' के लिए यह कर्ज लिया था; फिल्म 2012 में बॉक्स ऑफिस पर असफल रही।

सर्वोच्च न्यायालय ने 15 अक्टूबर 2026 को अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस के सात मामलों में बड़ी राहत देते हुए निचली अदालत को उनका पासपोर्ट रिलीज करने का आदेश दिया। अदालत ने साथ ही दोनों पक्षों को विवाद सुलझाने के लिए मीडिएशन सेंटर भेजने का निर्देश भी दिया।

अदालत में क्या हुआ

गुरुवार को सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि अदालत की पूर्व निर्धारित समयसीमा के अनुसार 13 अक्टूबर तक शेष ₹85 लाख भी सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करा दिए गए हैं। वकील ने यह भी बताया कि अभिनेता को एक कार्यक्रम के लिए कनाडा जाना है, जिससे उन्हें आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद है। इस अनुरोध पर अदालत ने पासपोर्ट रिलीज का आदेश पारित किया।

चीफ जस्टिस की टिप्पणी और मीडिएशन का निर्देश

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने दोनों पक्षों से सवाल किया कि वे आपस में बैठकर इस विवाद का समाधान क्यों नहीं निकाल लेते। अदालत ने विवाद को बातचीत के माध्यम से सुलझाने के लिए दोनों पक्षों को मध्यस्थता केंद्र भेजने का निर्देश दिया। अब दोनों पक्ष मध्यस्थता प्रक्रिया के ज़रिए मामले का हल खोजने का प्रयास करेंगे।

पिछली सुनवाई और रकम जमा करने की पृष्ठभूमि

पिछली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने राजपाल यादव को कुल ₹2 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया था। अभिनेता की ओर से बताया गया था कि ₹1 करोड़ 15 लाख का इंतजाम हो चुका है, जबकि शेष ₹85 लाख पुश्तैनी जमीन की बिक्री से जुटाए जाने थे। जमीन की रजिस्ट्री में देरी के कारण पूरी रकम समय पर जमा करने में परेशानी आ रही थी। अदालत ने बाकी रकम जमा करने के लिए 13 अक्टूबर तक का समय दिया था, जिसे अब पूरा कर दिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि: फिल्म का कर्ज और चेक बाउंस

यह पूरा मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े सात चेक बाउंस मामलों से जुड़ा है। साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म 'अता पता लापता' के निर्माण के लिए इस कंपनी से करीब ₹5 करोड़ का कर्ज लिया था। फिल्म साल 2012 में रिलीज हुई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।

इसके बाद कर्ज की वापसी को लेकर विवाद शुरू हो गया। शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि रकम लौटाने के लिए दिए गए चेक बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गए, जिसके बाद कंपनी ने राजपाल यादव के खिलाफ सात अलग-अलग मामले दर्ज कराए।

आगे क्या होगा

अब मामला मध्यस्थता के चरण में पहुँच गया है। यदि मीडिएशन सफल रही तो दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौते से यह लंबा विवाद समाप्त हो सकता है। सर्वोच्च न्यायालय की यह पहल दर्शाती है कि अदालत इस मामले को न्यायिक प्रक्रिया के बजाय आपसी सुलह से सुलझाए जाने को प्राथमिकता दे रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजपाल यादव का चेक बाउंस केस क्या है?
राजपाल यादव ने 2010 में फिल्म 'अता पता लापता' बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब ₹5 करोड़ का कर्ज लिया था। फिल्म 2012 में बॉक्स ऑफिस पर असफल रही और कर्ज वापसी के लिए दिए गए चेक बाउंस होने पर कंपनी ने उनके खिलाफ 7 अलग मामले दर्ज कराए।
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव का पासपोर्ट क्यों रिलीज करने का आदेश दिया?
राजपाल यादव के वकील ने अदालत को बताया कि अभिनेता को एक कार्यक्रम के लिए कनाडा जाना है, जिससे उन्हें आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही, शेष ₹85 लाख की रकम 13 अक्टूबर तक जमा करा दी गई थी। इन दोनों आधारों पर सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को पासपोर्ट रिलीज करने का निर्देश दिया।
मीडिएशन सेंटर भेजने का क्या मतलब है?
मीडिएशन यानी मध्यस्थता एक वैकल्पिक विवाद निपटान प्रक्रिया है जिसमें एक तटस्थ मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौते तक पहुँचने में मदद करता है। सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव और मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को इसी प्रक्रिया के ज़रिए विवाद सुलझाने का निर्देश दिया है।
अदालत ने राजपाल यादव को कितनी रकम जमा करने को कहा था?
सर्वोच्च न्यायालय ने पिछली सुनवाई में राजपाल यादव को कुल ₹2 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया था। इसमें से ₹1 करोड़ 15 लाख पहले जमा किए गए और शेष ₹85 लाख 13 अक्टूबर को जमा कराए गए।
इस मामले में आगे क्या होगा?
अब दोनों पक्ष मध्यस्थता केंद्र में आपसी बातचीत से समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। यदि मीडिएशन सफल रहती है तो मामला अदालत के बाहर सुलझ सकता है, अन्यथा सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी।
राष्ट्र प्रेस
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