राजपाल यादव चेक बाउंस केस: ₹1.15 करोड़ जमा, बाकी ₹85 लाख के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दी 13 अक्टूबर की मोहलत
सारांश
मुख्य बातें
सुप्रीम कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को अभिनेता राजपाल यादव के चेक बाउंस मामले में सुनवाई करते हुए शेष ₹85 लाख RTGS के ज़रिए 13 अक्टूबर 2026 तक जमा करने का निर्देश दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष यादव के वकील ने बताया कि अदालत द्वारा तय की गई ₹2 करोड़ की शर्त में से ₹1 करोड़ 15 लाख का इंतज़ाम हो चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
अदालत में यादव के वकील ने स्पष्ट किया कि शेष ₹85 लाख की व्यवस्था उनकी पुश्तैनी ज़मीन की बिक्री से होनी है। खरीदार और विक्रेता दोनों सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित थे। हालाँकि ज़मीन की रजिस्ट्री में अभी अड़चन है — चूँकि पितृ पक्ष चल रहा है, खरीदार नवरात्रि के बाद बिक्री दस्तावेज़ों का पंजीकरण कराना चाहता है।
बावजूद इसके, खरीदार ने ₹85 लाख अग्रिम राशि के तौर पर देने की सहमति जताई है ताकि कुल रकम ₹2 करोड़ तक पहुँच सके। वकील ने सुझाव दिया कि यह राशि डिमांड ड्राफ्ट के ज़रिए जमा की जा सकती है। पीठ ने इस पर विचार करते हुए RTGS से भुगतान का निर्देश दिया और अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद के लिए निर्धारित की।
पिछली सुनवाइयों का संदर्भ
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी राजपाल यादव की ओर से भुगतान में देरी और न्यायालय के आदेशों का पूर्ण अनुपालन न होने पर असंतोष व्यक्त कर चुकी है। पिछली सुनवाई में अदालत ने ₹2 करोड़ जमा करने को 'आखिरी मौका' करार दिया था। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सातों चेक बाउंस प्रकरणों में यादव को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक में तीन महीने की कारावास की सजा सुनाई थी, जो एक साथ चलने का आदेश था। राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह कानूनी लड़ाई करीब 16 साल पुरानी है। 2010 में राजपाल यादव ने निर्देशक की भूमिका में अपनी फिल्म 'अता पता लापता' बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से ₹5 करोड़ का ऋण लिया था। फिल्म 2012 में प्रदर्शित हुई, परंतु बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता नहीं मिली। ऋण न चुका पाने के कारण ब्याज और अन्य राशि जुड़ते-जुड़ते विवाद करीब ₹9 करोड़ तक पहुँच गया।
कर्ज चुकाने के लिए दिए गए चेक बाउंस होने पर मामला अदालत पहुँचा। 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और राधा यादव को दोषी ठहराया। इसके बाद यह मामला विभिन्न अदालतों से होता हुआ दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुँचा, जहाँ सजा बरकरार रखी गई और शिकायतकर्ताओं को रकम वापस करने का भी निर्देश दिया गया।
क्या होगा आगे
अब सभी की निगाहें 13 अक्टूबर 2026 पर टिकी हैं, जब ₹85 लाख की शेष राशि RTGS से जमा होनी है। यदि भुगतान समय पर हो जाता है, तो दो सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई में आगे की कार्यवाही पर फैसला हो सकता है। अदालत के धैर्य की सीमा स्पष्ट है — बार-बार दी जाने वाली मोहलत के बाद इस बार पूर्ण अनुपालन ही एकमात्र विकल्प प्रतीत होता है।