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राजपाल यादव चेक बाउंस केस: ₹1.15 करोड़ जमा, बाकी ₹85 लाख के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दी 13 अक्टूबर की मोहलत

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राजपाल यादव चेक बाउंस केस: ₹1.15 करोड़ जमा, बाकी ₹85 लाख के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दी 13 अक्टूबर की मोहलत

सारांश

₹5 करोड़ का कर्ज, फ्लॉप फिल्म और 16 साल की कानूनी लड़ाई — अभिनेता राजपाल यादव के चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अब 13 अक्टूबर तक ₹85 लाख जमा करने की सख्त मोहलत दी है। पुश्तैनी ज़मीन बिक्री की उम्मीद पर टिकी है यह आखिरी कोशिश।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव को शेष ₹85 लाख RTGS से 13 अक्टूबर 2026 तक जमा करने का निर्देश दिया।
कुल ₹2 करोड़ की शर्त में से ₹1 करोड़ 15 लाख पहले ही जमा हो चुके हैं।
शेष राशि पुश्तैनी ज़मीन के खरीदार द्वारा अग्रिम के रूप में दी जानी है; रजिस्ट्री नवरात्रि के बाद होगी।
मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 7 चेक बाउंस से संबंधित है; दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रत्येक में 3 महीने की सजा सुनाई थी।
विवाद की जड़ 2010 में लिया गया ₹5 करोड़ का ऋण है जो ब्याज सहित करीब ₹9 करोड़ तक पहुँच गया।
अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित है।

सुप्रीम कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को अभिनेता राजपाल यादव के चेक बाउंस मामले में सुनवाई करते हुए शेष ₹85 लाख RTGS के ज़रिए 13 अक्टूबर 2026 तक जमा करने का निर्देश दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष यादव के वकील ने बताया कि अदालत द्वारा तय की गई ₹2 करोड़ की शर्त में से ₹1 करोड़ 15 लाख का इंतज़ाम हो चुका है।

मुख्य घटनाक्रम

अदालत में यादव के वकील ने स्पष्ट किया कि शेष ₹85 लाख की व्यवस्था उनकी पुश्तैनी ज़मीन की बिक्री से होनी है। खरीदार और विक्रेता दोनों सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित थे। हालाँकि ज़मीन की रजिस्ट्री में अभी अड़चन है — चूँकि पितृ पक्ष चल रहा है, खरीदार नवरात्रि के बाद बिक्री दस्तावेज़ों का पंजीकरण कराना चाहता है।

बावजूद इसके, खरीदार ने ₹85 लाख अग्रिम राशि के तौर पर देने की सहमति जताई है ताकि कुल रकम ₹2 करोड़ तक पहुँच सके। वकील ने सुझाव दिया कि यह राशि डिमांड ड्राफ्ट के ज़रिए जमा की जा सकती है। पीठ ने इस पर विचार करते हुए RTGS से भुगतान का निर्देश दिया और अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद के लिए निर्धारित की।

पिछली सुनवाइयों का संदर्भ

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले भी राजपाल यादव की ओर से भुगतान में देरी और न्यायालय के आदेशों का पूर्ण अनुपालन न होने पर असंतोष व्यक्त कर चुकी है। पिछली सुनवाई में अदालत ने ₹2 करोड़ जमा करने को 'आखिरी मौका' करार दिया था। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सातों चेक बाउंस प्रकरणों में यादव को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक में तीन महीने की कारावास की सजा सुनाई थी, जो एक साथ चलने का आदेश था। राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह कानूनी लड़ाई करीब 16 साल पुरानी है। 2010 में राजपाल यादव ने निर्देशक की भूमिका में अपनी फिल्म 'अता पता लापता' बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से ₹5 करोड़ का ऋण लिया था। फिल्म 2012 में प्रदर्शित हुई, परंतु बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता नहीं मिली। ऋण न चुका पाने के कारण ब्याज और अन्य राशि जुड़ते-जुड़ते विवाद करीब ₹9 करोड़ तक पहुँच गया।

कर्ज चुकाने के लिए दिए गए चेक बाउंस होने पर मामला अदालत पहुँचा। 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और राधा यादव को दोषी ठहराया। इसके बाद यह मामला विभिन्न अदालतों से होता हुआ दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुँचा, जहाँ सजा बरकरार रखी गई और शिकायतकर्ताओं को रकम वापस करने का भी निर्देश दिया गया।

क्या होगा आगे

अब सभी की निगाहें 13 अक्टूबर 2026 पर टिकी हैं, जब ₹85 लाख की शेष राशि RTGS से जमा होनी है। यदि भुगतान समय पर हो जाता है, तो दो सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई में आगे की कार्यवाही पर फैसला हो सकता है। अदालत के धैर्य की सीमा स्पष्ट है — बार-बार दी जाने वाली मोहलत के बाद इस बार पूर्ण अनुपालन ही एकमात्र विकल्प प्रतीत होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कई अदालतें और बार-बार मिली मोहलत — फिर भी भुगतान पूरा नहीं हुआ; यह न्यायपालिका के धैर्य और प्रभावी संपत्ति-वसूली तंत्र की सीमाओं पर सवाल उठाता है। पुश्तैनी ज़मीन की बिक्री पर निर्भरता दर्शाती है कि अभिनेता के पास तरल संपत्ति कितनी सीमित है। यदि 13 अक्टूबर की समय-सीमा चूकती है, तो सर्वोच्च न्यायालय की दीर्घकालिक उदारता पर भी सार्वजनिक बहस अवश्यंभावी होगी।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजपाल यादव का चेक बाउंस मामला क्या है?
यह मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े सात चेक बाउंस प्रकरणों से संबंधित है। 2010 में फिल्म 'अता पता लापता' बनाने के लिए राजपाल यादव ने ₹5 करोड़ का ऋण लिया था, जो फिल्म की असफलता के बाद ब्याज सहित करीब ₹9 करोड़ तक पहुँच गया और भुगतान के लिए दिए चेक बाउंस हो गए।
सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर की डेडलाइन क्यों दी?
अदालत की तय ₹2 करोड़ की जमा शर्त में से ₹1.15 करोड़ ही उपलब्ध हो पाए थे। शेष ₹85 लाख पुश्तैनी ज़मीन की बिक्री से आने थे, इसलिए पीठ ने RTGS के ज़रिए 13 अक्टूबर 2026 तक भुगतान पूरा करने का अंतिम समय दिया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को क्या सजा दी थी?
दिल्ली हाईकोर्ट ने सातों चेक बाउंस मामलों में राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक में तीन महीने की कारावास की सजा सुनाई थी, जो सभी एक साथ चलनी थी। शिकायतकर्ताओं को रकम वापस करने का भी आदेश दिया गया था।
क्या राजपाल यादव की पत्नी भी इस मामले में शामिल हैं?
हाँ, राधा यादव (राजपाल यादव की पत्नी) को भी 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मामले में दोषी ठहराया था। दोनों ने मिलकर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
यदि 13 अक्टूबर 2026 तक ₹85 लाख RTGS से जमा हो जाते हैं, तो इससे कुल ₹2 करोड़ की शर्त पूरी हो जाएगी। इसके बाद दो सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई में पीठ आगे की कार्यवाही तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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