राजपाल यादव के चेक बाउंस केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त, वकील की ₹1.15 करोड़ जमा न कर पाने की दलील पर नाराज़गी
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 8 अक्टूबर 2026 को अभिनेता राजपाल यादव के चेक बाउंस मामले में सुनवाई के दौरान तीखा रुख अपनाया, जब उनके वकील अदालत के सामने यह नहीं बता पाए कि ₹1 करोड़ 15 लाख का डिमांड ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के किस सेक्शन में जमा किया जाए। नई दिल्ली स्थित सर्वोच्च न्यायालय की इस सुनवाई में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने अभिनेता और उनके कानूनी प्रतिनिधि, दोनों पर कड़ी टिप्पणियाँ कीं।
अदालत में क्या हुआ
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने राजपाल यादव के वकील ने कहा कि रकम का इंतज़ाम तो हो चुका है, लेकिन उन्हें यह ज्ञात नहीं कि डिमांड ड्राफ्ट कोर्ट के किस विभाग में जमा होगा। इस पर जस्टिस बागची ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड को इतनी बुनियादी प्रक्रिया की जानकारी नहीं है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। मुख्य न्यायाधीश ने वकील को तुरंत जाकर रकम जमा कराने का निर्देश दिया।
राजपाल यादव की विश्वसनीयता पर सवाल
जस्टिस वी. मोहना ने अभिनेता पर सीधी नाराज़गी जताते हुए कहा कि उन्हें 7 अक्टूबर की शाम 7 बजे तक पूरी रकम जमा कराने का समय दिया गया था, फिर भी ऐसी स्थिति सामने आना दुर्भाग्यपूर्ण है। न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह की दलीलें अदालत के सामने उनकी विश्वसनीयता को कमज़ोर करती हैं। गौरतलब है कि राजपाल यादव पर चेक बाउंस के सात अलग-अलग मामले दर्ज हैं।
पूरी रकम जमा कराने की व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को कुल ₹2 करोड़ जमा कराने का अवसर दिया था। 7 अक्टूबर की सुनवाई में उनकी ओर से बताया गया था कि ₹1 करोड़ 15 लाख का प्रबंध हो चुका है और शेष ₹85 लाख उनकी पुश्तैनी ज़मीन के खरीदार द्वारा अदा किए जाएँगे। वह खरीदार उस दिन अदालत में स्वयं उपस्थित भी था। इस व्यवस्था को देखते हुए कोर्ट ने शेष रकम जमा कराने के लिए समय दिया था, लेकिन 8 अक्टूबर को ₹1.15 करोड़ के डिमांड ड्राफ्ट को भी जमा न करा पाने की स्थिति ने पीठ को नाराज़ कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद राजपाल यादव की फिल्म 'अता पता लापता' से जुड़ा है। 2010 में इस फिल्म के निर्माण हेतु राजपाल यादव और उनकी पत्नी से संबंधित कंपनी को मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब ₹5 करोड़ मिले थे। रकम लौटाने को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ और शिकायतकर्ता का आरोप था कि भुगतान के लिए दिए गए चेक बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गए, जिसके चलते सात मामले दर्ज हुए। यह ऐसे समय में सामने आया है जब उच्चतम न्यायालय वित्तीय अनुशासन और समयबद्ध अनुपालन पर विशेष ज़ोर दे रहा है।
आगे क्या होगा
अदालत ने राजपाल यादव के वकील को अविलंब रजिस्ट्री में डिमांड ड्राफ्ट जमा कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि शेष ₹85 लाख की व्यवस्था हुई या नहीं। यदि राजपाल यादव पूरी रकम जमा कराने में विफल रहे, तो उनकी याचिका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और चेक बाउंस के सातों मामलों में सज़ा की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।