15 सितंबर 2026
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राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से आखिरी मौका, ₹2 करोड़ जमा करने के लिए 2 हफ्ते की मोहलत

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राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से आखिरी मौका, ₹2 करोड़ जमा करने के लिए 2 हफ्ते की मोहलत

सारांश

करीब 16 साल पुराने कर्ज विवाद में राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट ने 2 हफ्ते की आखिरी मोहलत दी है — ₹2 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा। अदालत ने पासपोर्ट भी जमा कराया और पुराने आचरण पर सख्त टिप्पणी की। 5 अक्टूबर की सुनवाई निर्णायक होगी।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 15 सितंबर 2026 को अभिनेता राजपाल यादव को ₹2 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने के लिए 2 हफ्ते की अंतिम मोहलत दी।
मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लिए गए ₹5 करोड़ के कर्ज से जुड़े 7 चेक बाउंस मामलों से संबंधित है; कुल विवाद ₹9 करोड़ तक पहुँच गया।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रत्येक मामले में 3 महीने की जेल सजा बरकरार रखी थी।
अदालत ने राजपाल यादव का पासपोर्ट जमा कराने और उनके पूर्व आचरण पर कड़ी टिप्पणी की।
राजपाल यादव व पत्नी राधा यादव ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने 15 सितंबर 2026 को अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस के सात मामलों में अंतरिम राहत देते हुए ₹2 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने के लिए दो हफ्ते का अंतिम अवसर प्रदान किया। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि यह उन्हें दिया गया आखिरी मौका है और इसके साथ ही उनका पासपोर्ट भी जमा कराया जाएगा।

अदालत में क्या हुआ

राजपाल यादव के वकील ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की कि अभिनेता को इस समय पुनः जेल भेजने से कोई व्यावहारिक लाभ नहीं होगा और उन्हें रकम के इंतजाम के लिए कुछ वक्त दिया जाए। अदालत ने इस अनुरोध पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए दो सप्ताह की मोहलत दी, परंतु यह भी साफ किया कि कम से कम ₹2 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना अनिवार्य होगा।

सुनवाई के दौरान राजपाल यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए ऑनलाइन उपस्थित थे। अदालत ने उनके पिछले आचरण को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पूर्व व्यवहार को देखते हुए उन पर भरोसा करना कठिन है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि राजपाल यादव फिल्मों में बेहतरीन अभिनय करते हैं, और उम्मीद है कि वह अदालत में ऐसा नहीं करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद करीब 16 साल पुराना है। 2010 में राजपाल यादव ने बतौर निर्देशक अपनी फिल्म 'अता पता लापता' बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से ₹5 करोड़ का कर्ज लिया था। फिल्म 2012 में रिलीज़ हुई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर नाकाम रही। फिल्म के असफल होने के बाद कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया और ब्याज समेत यह राशि बढ़कर करीब ₹9 करोड़ तक पहुँच गई।

कर्ज चुकाने के लिए दिए गए चेक बाउंस होने पर मामला अदालत पहुँचा। 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को दोषी ठहराया।

हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सफर

मामला विभिन्न अदालतों से होते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय तक पहुँचा, जहाँ सातों मामलों में राजपाल यादव की सजा बरकरार रखी गई और प्रत्येक मामले में तीन महीने की जेल की सजा सुनाई गई। सभी सज़ाएँ एक साथ चलाने का आदेश दिया गया और शिकायतकर्ताओं को रकम लौटाने का निर्देश भी दिया गया।

राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव ने दिल्ली उच्च न्यायालय के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने अब नोटिस जारी किया है और अभिनेता को यह अंतिम अवसर दिया है।

आगे क्या होगा

यदि राजपाल यादव निर्धारित समय के भीतर ₹2 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने में विफल रहते हैं, तो अदालत उनके विरुद्ध कठोर कदम उठा सकती है। पासपोर्ट जमा कराने का निर्देश संकेत देता है कि अदालत किसी भी तरह की चूक को गंभीरता से लेगी। 5 अक्टूबर की सुनवाई इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजपाल यादव का चेक बाउंस मामला क्या है?
राजपाल यादव ने 2010 में फिल्म 'अता पता लापता' बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से ₹5 करोड़ का कर्ज लिया था। फिल्म के 2012 में फ्लॉप होने के बाद कर्ज नहीं चुकाया गया, और चेक बाउंस होने पर सात आपराधिक मामले दर्ज हुए जो बढ़कर ₹9 करोड़ के विवाद में बदल गए।
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को क्या निर्देश दिए हैं?
सर्वोच्च न्यायालय ने 15 सितंबर 2026 को राजपाल यादव को 2 हफ्ते के भीतर ₹2 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट भी अदालत में जमा कराना होगा और अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या फैसला दिया था?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सातों चेक बाउंस मामलों में राजपाल यादव को दोषी मानते हुए प्रत्येक मामले में तीन महीने की जेल सजा सुनाई थी। सभी सजाएँ एक साथ चलने का आदेश दिया गया था और शिकायतकर्ताओं को रकम वापस करने का निर्देश भी दिया गया था।
अगर राजपाल यादव ₹2 करोड़ जमा नहीं कर पाए तो क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि यह उनके लिए आखिरी मौका है। समय सीमा में भुगतान न होने पर अदालत उन्हें जेल भेजने सहित अन्य कड़े कदम उठा सकती है। 5 अक्टूबर की सुनवाई में मामले की दिशा तय होगी।
राधा यादव इस मामले में कैसे जुड़ी हैं?
राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव को भी 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसी मामले में दोषी ठहराया था। दोनों ने मिलकर दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
राष्ट्र प्रेस
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