आर. बी. चौधरी की 100वीं फिल्म में अभिनय करने की आखिरी इच्छा: रजनीकांत ने साझा की दिल की बातें
सारांश
मुख्य बातें
चेन्नई, 7 मई (राष्ट्र प्रेस)। दिग्गज फिल्म निर्माता आर. बी. चौधरी की सड़क हादसे में अचानक मृत्यु से तमिल फिल्म इंडस्ट्री में गहरा शोक छाया है। इसी बीच सुपरस्टार रजनीकांत ने चौधरी को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी जीवन दर्शन और अधूरे सपनों के बारे में कई भावुक विवरण साझा किए, जिसमें उनकी 100वीं फिल्म प्रोजेक्ट की अंतिम इच्छा भी शामिल थी।
100वीं फिल्म का सपना
रजनीकांत ने मीडिया को बताया कि करीब चार महीने पहले जब चौधरी 'जेलर 2' की शूटिंग के दौरान उनसे मिलने आए थे, तब उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात साझा की। चौधरी ने कहा था, ''मैंने अब तक 99 फिल्में बना चुका हूँ और 100वीं फिल्म के बाद फिल्म निर्माण से संन्यास लेना चाहता हूँ। मेरी यह 100वीं फिल्म बेहद खास होगी और उसमें आपको अभिनय करना होगा।''
रजनीकांत ने आगे बताया कि चौधरी के पास दो-तीन कहानियाँ थीं जिन्हें वह सुनाना चाहते थे। इस पर रजनीकांत ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि वह उनकी फिल्म जरूर करेंगे। गौरतलब है कि रजनीकांत ने कहा कि आज तक उन्होंने चौधरी के साथ कोई फिल्म नहीं की थी, लेकिन उनके बीच गहरा सम्मान और करीबी रिश्ता था।
इंडस्ट्री के लिए उनका योगदान
रजनीकांत ने चौधरी के कैरियर की विरासत पर जोर दिया और कहा कि निर्देशक के. एस. रविकुमार ने दो महीने पहले उनसे चौधरी के बारे में बात की थी। रविकुमार ने कहा था कि चौधरी ने फिल्म इंडस्ट्री को कई प्रतिभाशाली निर्देशक दिए और अनगिनत लोगों का करियर बनाया, इसलिए सभी निर्माताओं और निर्देशकों को मिलकर उनके सम्मान में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए।
शांत स्वभाव और विवाद-मुक्त जीवन
रजनीकांत ने चौधरी के व्यक्तित्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह ऐसे इंसान थे जिन्होंने सिर्फ फिल्में नहीं बनाईं, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार और पहचान भी दी। उन्होंने कहा, ''99 फिल्मों के विशाल कैरियर के बावजूद उनकी किसी भी फिल्म को लेकर कभी कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया।'' रजनीकांत के अनुसार, अगर कभी कोई समस्या होती भी थी, तो चौधरी खुद जाकर संबंधित व्यक्ति से बात करते थे और वहीं बैठकर समझदारी से मामला सुलझा लेते थे।
जीवन दर्शन और सकारात्मकता
रजनीकांत ने बताया कि चौधरी हमेशा खुश और सकारात्मक रहते थे। जब भी रजनीकांत उनसे पूछते थे कि वह इतने स्वस्थ और प्रसन्न कैसे रहते हैं, तो वह कहते थे कि वह कभी अपनी क्षमता से बाहर जाकर जोखिम नहीं लेते। चौधरी का मानना था कि इंसान को उतना ही काम करना चाहिए जितना वह संभाल सके, और बाकी सब भगवान पर छोड़ देना चाहिए। उनका दर्शन यह था कि ''इंसान दुनिया में कुछ लेकर नहीं आता और न ही कुछ साथ लेकर जाता है।''
इंडस्ट्री के लिए अपूरणीय क्षति
रजनीकांत ने भावुक होकर कहा कि ऐसा अच्छा इंसान और इतना बड़ा निर्माता इस तरह अचानक दुनिया छोड़कर चला जाए, यह बात अंदर तक झकझोर देती है। उन्होंने कहा, ''चौधरी की अचानक मृत्यु पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी क्षति है।'' उनकी यह टिप्पणी चौधरी के फिल्म इंडस्ट्री में दिए गए महान योगदान और उनके निर्माण कार्य की विरासत को दर्शाती है।