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अमजद खान: 'शोले' के गब्बर सिंह से अमर हुए अभिनेता, 27 जुलाई 1992 को हुआ था निधन

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अमजद खान: 'शोले' के गब्बर सिंह से अमर हुए अभिनेता, 27 जुलाई 1992 को हुआ था निधन

सारांश

गब्बर सिंह सिर्फ एक किरदार नहीं था — वह अमजद खान की प्रतिभा का आईना था। 'शोले' (1975) से मिली अमरता के बाद भी उन्होंने अभिनय और निर्देशन दोनों में अपनी छाप छोड़ी। 27 जुलाई को उनकी पुण्यतिथि पर हिंदी सिनेमा उस बहुआयामी कलाकार को याद करता है जो महज 51 वर्ष में चला गया।

मुख्य बातें

अमजद खान का जन्म 12 नवंबर 1940 को रीवा, मध्य प्रदेश में हुआ था।
मात्र 11 वर्ष की उम्र में फिल्म 'नाजनीन' से बाल अभिनेता के रूप में करियर की शुरुआत की।
1975 में 'शोले' में गब्बर सिंह की भूमिका ने उन्हें हिंदी सिनेमा में अमर कर दिया।
बीएफजेए अवार्ड्स 1976 सहित 'दादा' , 'याराना' और 'माँ कसम' के लिए कई पुरस्कार जीते।
1983 में 'चोर पुलिस' से निर्देशन में कदम रखा; 1985 में 'अमीर आदमी गरीब आदमी' सफल रही।
27 जुलाई 1992 को 51 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से निधन हुआ।

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अमजद खान ने 1975 में आई फिल्म 'शोले' में गब्बर सिंह का किरदार इस कदर जीवंत कर दिया कि दशकों बाद भी वह चरित्र भारतीय दर्शकों के ज़ेहन में गहराई से बसा हुआ है। महज 51 वर्ष की आयु में 27 जुलाई 1992 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया — लेकिन पर्दे पर उनके निभाए किरदार आज भी उतने ही ताज़ा हैं।

प्रारंभिक जीवन और विरासत में मिला अभिनय

अमजद खान का जन्म 12 नवंबर 1940 को मध्य प्रदेश के रीवा जिले में प्रसिद्ध अभिनेता जयंत खान के घर हुआ था। अभिनय उन्हें विरासत में मिला — पिता स्वयं हिंदी सिनेमा के जाने-माने कलाकार थे। मात्र 11 वर्ष की उम्र में उन्होंने फिल्म 'नाजनीन' से बाल कलाकार के रूप में पर्दे पर कदम रखा। 17 वर्ष की आयु में वे फिल्म 'अब दिल्ली दूर नहीं' में अपने पिता के साथ नज़र आए।

करियर का सफर: 'हिंदुस्तान की कसम' से 'शोले' तक

वर्ष 1973 में फिल्म 'हिंदुस्तान की कसम' में अमजद खान एक स्वतंत्र कलाकार के रूप में सिल्वर स्क्रीन पर उभरे। इसके दो वर्ष बाद 1975 में आई 'शोले' ने उनकी पहचान हमेशा के लिए बदल दी। गब्बर सिंह के संवाद और भाव-भंगिमाएँ हिंदी सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर बन गईं। यह ऐसे समय में आया जब हिंदी फिल्मों में खलनायक की भूमिकाएँ प्रायः एकआयामी होती थीं — अमजद खान ने उस साँचे को तोड़ा।

निर्देशन में भी आज़माया हाथ

अभिनय के साथ-साथ अमजद खान ने निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रखा। वर्ष 1983 में फिल्म 'चोर पुलिस' से उन्होंने निर्देशक के रूप में शुरुआत की। इसके बाद 1985 में उनके निर्देशन में बनी फिल्म 'अमीर आदमी गरीब आदमी' सफल रही।

पुरस्कार और सम्मान

वर्ष 1976 में बीएफजेए अवार्ड्स में 'शोले' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला। फिल्म 'दादा' और 'याराना' में भी उन्होंने यही पुरस्कार जीता। फिल्म 'माँ कसम' में उनके हास्य अभिनय को बेस्ट परफॉर्मेंस इन कॉमिक रोल अवार्ड से नवाज़ा गया।

व्यक्तित्व: साहित्य, भाषाएँ और पारिवारिक जीवन

अमजद खान केवल अभिनेता नहीं, एक विद्वान व्यक्तित्व भी थे। उन्होंने दर्शनशास्त्र में प्रथम श्रेणी से मास्टर डिग्री हासिल की थी। अंग्रेज़ी और उर्दू के अलावा वे फ़ारसी भाषा में भी पारंगत थे। वर्ष 1972 में उन्होंने शेहला खान से निकाह किया और दंपती के तीन बच्चे हुए। 27 जुलाई 1992 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ — हिंदी सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खोया जिसकी छाप आज भी मिटी नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह स्क्रिप्ट से उतनी नहीं, अमजद खान के दर्शनशास्त्र की पढ़ाई और बहुभाषी सांस्कृतिक समझ से आई। दुर्भाग्य यह है कि मुख्यधारा की कवरेज उन्हें केवल एक किरदार तक सीमित कर देती है, जबकि एक निर्देशक, एक विद्वान और एक बहुआयामी कलाकार के रूप में उनका योगदान उतना रेखांकित नहीं हुआ जितना होना चाहिए था।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमजद खान कौन थे और वे किस फिल्म से प्रसिद्ध हुए?
अमजद खान हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता थे, जो 1975 की फिल्म 'शोले' में गब्बर सिंह की भूमिका से अमर हो गए। वे अभिनेता जयंत खान के पुत्र थे और बचपन से ही अभिनय से जुड़े रहे।
अमजद खान का निधन कब और कैसे हुआ?
अमजद खान का निधन 27 जुलाई 1992 को दिल का दौरा पड़ने से हुआ। उस समय उनकी आयु मात्र 51 वर्ष थी।
अमजद खान को कौन-कौन से पुरस्कार मिले?
अमजद खान को 1976 में बीएफजेए अवार्ड्स में 'शोले' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला। इसके अलावा 'दादा' और 'याराना' के लिए भी यही पुरस्कार जीता, तथा 'माँ कसम' में बेस्ट परफॉर्मेंस इन कॉमिक रोल अवार्ड हासिल किया।
क्या अमजद खान ने निर्देशन भी किया?
हाँ, अमजद खान ने 1983 में फिल्म 'चोर पुलिस' से निर्देशन की शुरुआत की। 1985 में उनके निर्देशन में बनी 'अमीर आदमी गरीब आदमी' भी सफल रही।
अमजद खान की शिक्षा और व्यक्तिगत जीवन कैसा था?
अमजद खान ने दर्शनशास्त्र में प्रथम श्रेणी से मास्टर डिग्री हासिल की थी और अंग्रेज़ी, उर्दू के साथ-साथ फ़ारसी भाषा में भी पारंगत थे। 1972 में उन्होंने शेहला खान से निकाह किया और दंपती के तीन बच्चे हुए।
राष्ट्र प्रेस
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