गोल्डी बहल का बर्थडे स्पेशल: प्यार और दोस्ती की अनोखी कहानी सोनाली बेंद्रे के साथ

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गोल्डी बहल का बर्थडे स्पेशल: प्यार और दोस्ती की अनोखी कहानी सोनाली बेंद्रे के साथ

सारांश

गोल्डी बहल और सोनाली बेंद्रे की प्रेम कहानी धैर्य और दोस्ती का अनूठा उदाहरण है। गोल्डी के प्यार ने कैसे एकतरफा से परिपूर्ण रिश्ते में बदल लिया, जानें उनके जीवन के इस रोमांचक सफर में।

Key Takeaways

  • धैर्य और दोस्ती रिश्तों की नींव होते हैं।
  • पहली नजर का प्यार कैसे विकसित होता है।
  • सफलता के लिए निर्देशन की महत्ता।
  • परिवार और सामाजिक मुद्दों पर आधारित शो का निर्माण।
  • एक सफल बेटे के जन्म का अनुभव।

मुंबई, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई फिल्म जगत में कई प्रेम कहानियाँ बनीं और टूटीं, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे भी हैं, जो धैर्य, दोस्ती और समय की कसौटी पर खरे उतरे। गोल्डी बहल और सोनाली बेंद्रे की कहानी ऐसी ही है। कहा जाता है कि गोल्डी को सोनाली से पहली नजर में प्यार हो गया था, लेकिन यह प्यार लंबे समय तक एकतरफा ही रहा। धैर्य और संघर्ष के बाद, यह रिश्ता एक परफेक्ट बंधन में बदल गया।

गोल्डी बहल का जन्म 23 फरवरी 1978 को हुआ। वे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के प्रसिद्ध बहल परिवार से हैं। उनके पिता रमेश बहल एक जाने-माने फिल्म निर्देशक थे। फिल्मी माहौल में पले-बढ़े गोल्डी ने बचपन से ही कैमरा, सेट और कलाकारों को बहुत करीब से देखा और फिल्म निर्माण की बारीकियों को समझा।

गोल्डी और सोनाली की पहली मुलाकात 1994 में फिल्म 'नाराज' के सेट पर हुई थी। उस समय सोनाली अपने करियर की शुरुआत कर रही थीं, जबकि गोल्डी इंडस्ट्री को बेहतर समझने की कोशिश कर रहे थे। गोल्डी के लिए यह प्यार की पहली झलक थी, लेकिन सोनाली उन्हें केवल एक दोस्त के रूप में देखती थीं। गोल्डी ने समय के साथ इस दोस्ती को मजबूत किया।

गोल्डी के करियर की बात करें तो उन्होंने 2001 में बतौर निर्देशक फिल्म 'बस इतना सा ख्वाब है' से निर्देशन में कदम रखा। इस फिल्म में अभिषेक बच्चन, रानी मुखर्जी, सुष्मिता सेन और जैकी श्रॉफ जैसे कलाकार शामिल थे। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास सफलता नहीं हासिल कर सकी, लेकिन गोल्डी की निर्देशन शैली की सराहना की गई।

इसके बाद उन्होंने फिल्म 'द्रोण' का निर्देशन किया, जिसमें भारतीय पौराणिक कथाओं को आधुनिकता से जोड़ा गया।

फिल्मों के साथ-साथ, गोल्डी बहल ने टीवी और वेब की दुनिया में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने अपनी बहन सृष्टि आर्या के साथ मिलकर 'रोज ऑडियो विजुअल्स' की स्थापना की। इस बैनर के तहत कई चर्चित टीवी शोज और वेब सीरीज बनीं, जिनमें पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक मुद्दों को दर्शाया गया। बतौर निर्माता और निर्देशक, गोल्डी ने यह साबित किया कि वे सिर्फ बड़े पर्दे तक सीमित नहीं हैं।

इस बीच, सोनाली बेंद्रे के साथ उनकी दोस्ती और गहरी होती गई। पांच साल तक दोनों दोस्त बने रहे। गोल्डी का प्यार धीरे-धीरे सोनाली के दिल तक पहुंचा। अंततः, अभिषेक बच्चन की एक पार्टी में गोल्डी ने सोनाली को प्रपोज किया और इस बार सोनाली का जवाब 'हां' था।

12 नवंबर 2002 को उन्होंने शादी कर ली, और यह एकतरफा प्यार एक मजबूत रिश्ते में बदल गया। 2005 में उनके बेटे रणवीर का जन्म हुआ, जिसे वे अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा मानते हैं। गोल्डी बहल इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और नई कहानियों पर काम कर रहे हैं।

Point of View

बल्कि यह दर्शाती है कि धैर्य और सच्ची दोस्ती किस प्रकार प्यार में बदल सकती है। यह कहानी एक प्रेरणा स्रोत है, जो हमें रिश्तों की गहराई और महत्व को समझने में मदद करती है।
NationPress
24/02/2026

Frequently Asked Questions

गोल्डी बहल का जन्म कब हुआ?
गोल्डी बहल का जन्म 23 फरवरी 1978 को हुआ।
गोल्डी और सोनाली की पहली मुलाकात कब हुई?
गोल्डी और सोनाली की पहली मुलाकात 1994 में फिल्म 'नाराज' के सेट पर हुई।
गोल्डी बहल ने अपने करियर की शुरुआत कब की?
गोल्डी बहल ने 2001 में बतौर निर्देशक अपने करियर की शुरुआत की।
गोल्डी और सोनाली की शादी कब हुई?
गोल्डी और सोनाली की शादी 12 नवंबर 2002 को हुई।
गोल्डी बहल के बेटे का नाम क्या है?
गोल्डी बहल के बेटे का नाम रणवीर है।
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