हर्ष छाया बोले: युवा मुझे न पहचानें तो कोई बात नहीं, वरिष्ठ कलाकारों पर बहस बेमानी
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता हर्ष छाया ने 6 जुलाई को मुंबई में एक बातचीत के दौरान उस बहस को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें युवा पीढ़ी पर वरिष्ठ कलाकारों को न पहचानने का आरोप लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी अपने समय के कलाकारों को देखकर बड़ी होती है और इसीलिए नई पीढ़ी से यह अपेक्षा रखना उचित नहीं कि वे हर पुराने कलाकार को जानें।
युवाओं पर दोष नहीं
हर्ष छाया ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'अगर कोई युवा मुझे नहीं पहचानता तो मुझे इससे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता। किसी व्यक्ति ने अगर मेरा काम नहीं देखा है तो मैं उन्हें कैसे पहचान सकता हूँ? नई पीढ़ी के लोगों के लिए हमें पहचानना कोई जरूरी बात नहीं है।' उन्होंने तर्क दिया कि आज के 20 साल के युवा के लिए उनका काम करीब 30 साल पुराना है। उनके अनुसार, यह उस युवा की जिम्मेदारी नहीं है कि वह उनके दौर की फिल्में या धारावाहिक खोजकर देखे।
खुद भी नहीं जानते थे सभी वरिष्ठ कलाकारों को
हर्ष छाया ने अपना निजी अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब वे पहली बार इंडस्ट्री में आए, तब वे दिलीप कुमार और राजेंद्र कुमार को जानते थे क्योंकि वे बहुत बड़े सितारे थे। लेकिन उनके साथ काम करने वाले बाकी कलाकारों के बारे में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं थी, क्योंकि वे उनसे करीब 40 साल पहले की पीढ़ी के थे। यह स्वीकारोक्ति इस बहस को एक नया आयाम देती है।
हर पीढ़ी के अपने आइकन
उन्होंने आगे कहा कि उनके दौर के सबसे बड़े सितारे अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना और ऋषि कपूर थे — यही कलाकार उनकी पीढ़ी की प्रेरणा का स्रोत थे। हर्ष छाया के अनुसार, 'हर पीढ़ी के अपने आइकन होते हैं और यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।' उन्होंने इस पूरी बहस को 'फिजूल' करार देते हुए कहा कि कलाकारों की पहचान उनके काम से बनती है और जिस पीढ़ी ने वह काम देखा, वही उन्हें बेहतर जानती है।
'अनदेखी' से मिले नए दर्शक
हर्ष छाया ने अपनी चर्चित वेब सीरीज 'अनदेखी' का जिक्र करते हुए बताया कि इस सीरीज के बाद बड़ी संख्या में नए दर्शक उन्हें पहचानने लगे हैं। उन्होंने कहा कि कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने उन्हें पहली बार 'अनदेखी' में देखा और उसके बाद उनके बारे में जानना शुरू किया। यह उदाहरण बताता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म किस तरह पुराने और नए दर्शकों के बीच सेतु का काम कर सकते हैं।
बदलते दौर में कलाकार की प्रासंगिकता
गौरतलब है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के उभार के बाद से यह बहस और तेज हुई है कि क्या नई पीढ़ी को पुराने कलाकारों की जानकारी होनी चाहिए। हर्ष छाया का यह बेबाक रुख इंडस्ट्री में एक अलग आवाज़ के रूप में सामने आया है। समय के साथ दर्शकों की पसंद बदलती है और हर दौर में नए चेहरे उभरते हैं — इस सच्चाई को स्वीकार करना ही, उनके अनुसार, एक परिपक्व नज़रिया है।