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जन्माष्टमी पर हेमा मालिनी बनीं राधा, 'राधा रास बिहारी' बैले की झलक से मोहा मन

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जन्माष्टमी पर हेमा मालिनी बनीं राधा, 'राधा रास बिहारी' बैले की झलक से मोहा मन

सारांश

जन्माष्टमी पर हेमा मालिनी ने 'राधा रास बिहारी' की झलक साझा कर एक बार फिर साबित किया कि उनकी शास्त्रीय नृत्य साधना केवल मंच तक सीमित नहीं — यह उनकी आत्मा की अभिव्यक्ति है। पाँच दशकों की यह यात्रा भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता की गवाह है।

मुख्य बातें

हेमा मालिनी ने जन्माष्टमी 2026 पर डांस बैले 'राधा रास बिहारी' की झलक सोशल मीडिया पर साझा की।
वीडियो में वह पारंपरिक परिधान और आभूषणों में राधा की भूमिका में शास्त्रीय नृत्य मुद्राओं में नज़र आईं।
हेमा मालिनी ने पाँच वर्ष की आयु में भरतनाट्यम सीखना शुरू किया था; बाद में चेन्नई में गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम से कुचिपुड़ी भी सीखी।
'इंडियन आइडल' में उन्होंने खुलासा किया कि अभिनेत्री रेखा भी उन्हीं डांस क्लासेज़ में आती थीं और अक्सर रिहर्सल बीच में छोड़ भाग जाती थीं।
उनके प्रमुख बैले में 'दुर्गा' , 'मीरा' , 'रामायण' , 'सावित्री' और 'राधा रास बिहारी' शामिल हैं।

बॉलीवुड की 'ड्रीम गर्ल' हेमा मालिनी ने जन्माष्टमी 2026 के पावन अवसर पर अपने प्रसिद्ध डांस बैले 'राधा रास बिहारी' की एक मनमोहक झलक साझा की। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें वह पारंपरिक परिधान और भव्य आभूषणों से सजी राधा की भूमिका में नज़र आ रही हैं। शास्त्रीय नृत्य की सुंदर मुद्राओं में उनका यह रूप दर्शकों के दिलों को छू गया।

मंच पर जीवंत हुई राधा-कृष्ण की भक्ति

वीडियो में हेमा मालिनी अपनी नृत्य मंडली के साथ मंच पर प्रस्तुति देती दिखाई दे रही हैं। उनके साथ एक अन्य कलाकार कृष्ण की भूमिका में हैं। शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से राधा और कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति को इस प्रस्तुति में बेहद भावपूर्ण तरीके से उकेरा गया है।

वीडियो के साथ हेमा मालिनी ने लिखा, 'जन्माष्टमी के पावन अवसर पर अपने डांस बैले 'राधा रास बिहारी' की एक झलक साझा कर रही हूं। यह जन्माष्टमी सभी के जीवन में शांति, खुशियां और समृद्धि लेकर आए। राधे-राधे... जय श्री कृष्ण।'

'राधा रास बिहारी' — हेमा की सांस्कृतिक धरोहर

'राधा रास बिहारी' हेमा मालिनी की सर्वाधिक चर्चित नृत्य प्रस्तुतियों में से एक है। इस बैले में राधा-कृष्ण के रिश्ते, उनके प्रेम और अध्यात्म को शास्त्रीय नृत्य शैली के ज़रिए दर्शाया जाता है। हेमा अपने करियर में इस बैले को कई बार मंच पर प्रस्तुत कर चुकी हैं। यह प्रस्तुति उनके लिए भारतीय संस्कृति और कृष्ण भक्ति से जुड़ा एक गहरा भावनात्मक अनुभव है।

पाँच साल की उम्र से शुरू हुई नृत्य की साधना

गौरतलब है कि हेमा मालिनी ने महज पाँच वर्ष की आयु में भरतनाट्यम सीखना आरंभ कर दिया था। उनकी माँ जया चक्रवर्ती ने बेटी की इस प्रतिभा को पहचाना और उनके नृत्य करियर को आगे बढ़ाने में पूर्ण सहयोग दिया। बचपन दिल्ली में बिताने वाली हेमा ने छोटी उम्र से ही मंच पर प्रस्तुतियाँ देना शुरू कर दिया था।

भरतनाट्यम के बाद उन्होंने कुचिपुड़ी भी सीखी। इसके लिए उन्होंने चेन्नई में प्रख्यात गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम से प्रशिक्षण लिया।

रेखा से जुड़ी दिलचस्प याद

हेमा मालिनी की नृत्य यात्रा से जुड़ा एक रोचक प्रसंग अभिनेत्री रेखा से भी जुड़ा है। हाल ही में 'इंडियन आइडल' में हेमा ने बताया कि जब वह चेन्नई में गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम से कुचिपुड़ी की ट्रेनिंग ले रही थीं, तब रेखा भी उन्हीं डांस क्लासेज़ में आती थीं। उन्होंने बताया कि रेखा बचपन में काफी शरारती थीं और कई बार रिहर्सल के बीच से भाग जाती थीं, जिससे गुरुजी के लिए उन्हें संभालना आसान नहीं होता था।

पौराणिक कथाओं को मंच पर उतारने की विरासत

समय के साथ हेमा मालिनी ने नृत्य को एक बड़े मंच तक पहुँचाया और अनेक यादगार डांस बैले तैयार किए। 'दुर्गा', 'मीरा', 'रामायण', 'सावित्री', 'राधा कृष्ण' और 'राधा रास बिहारी' जैसी प्रस्तुतियों के ज़रिए उन्होंने पौराणिक और आध्यात्मिक कथाओं को शास्त्रीय नृत्य की भाषा में जीवंत किया है। उनकी यह कला-साधना भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हेमा का दशकों पुराना यह नृत्य-समर्पण एक वैकल्पिक आख्यान प्रस्तुत करता है। 'राधा रास बिहारी' जैसे बैले केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय पौराणिक परंपरा को जीवित रखने के सांस्कृतिक प्रयास हैं — और यही उन्हें एक अभिनेत्री से परे एक सांस्कृतिक दूत बनाता है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हेमा मालिनी का डांस बैले 'राधा रास बिहारी' क्या है?
'राधा रास बिहारी' हेमा मालिनी की एक प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति है जिसमें राधा और कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति को मंच पर उकेरा जाता है। हेमा इसे अपने करियर में कई बार प्रस्तुत कर चुकी हैं और इसे भारतीय संस्कृति से जुड़ा एक भावनात्मक अनुभव मानती हैं।
हेमा मालिनी ने जन्माष्टमी पर क्या साझा किया?
हेमा मालिनी ने जन्माष्टमी 2026 पर सोशल मीडिया पर अपने डांस बैले 'राधा रास बिहारी' का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह पारंपरिक परिधान और आभूषणों में राधा की भूमिका में शास्त्रीय नृत्य मुद्राओं में नज़र आईं। उन्होंने सभी को जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ देते हुए 'राधे-राधे... जय श्री कृष्ण' लिखा।
हेमा मालिनी ने नृत्य की शुरुआत कब और कहाँ से की?
हेमा मालिनी ने मात्र पाँच वर्ष की आयु में भरतनाट्यम सीखना शुरू किया था। उनकी माँ जया चक्रवर्ती ने उनकी प्रतिभा पहचानी और उनका पूरा साथ दिया। बाद में उन्होंने चेन्नई में गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम से कुचिपुड़ी का भी प्रशिक्षण लिया।
हेमा मालिनी और रेखा की डांस क्लास वाली कहानी क्या है?
'इंडियन आइडल' में हेमा मालिनी ने बताया कि जब वह चेन्नई में गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम से कुचिपुड़ी सीख रही थीं, तब अभिनेत्री रेखा भी उन्हीं क्लासेज़ में आती थीं। रेखा बचपन में शरारती थीं और अक्सर रिहर्सल बीच में छोड़कर भाग जाती थीं।
हेमा मालिनी के प्रमुख डांस बैले कौन-से हैं?
हेमा मालिनी ने अपने करियर में 'दुर्गा', 'मीरा', 'रामायण', 'सावित्री', 'राधा कृष्ण' और 'राधा रास बिहारी' जैसे कई यादगार डांस बैले प्रस्तुत किए हैं। इन प्रस्तुतियों के ज़रिए उन्होंने पौराणिक और आध्यात्मिक कथाओं को शास्त्रीय नृत्य की भाषा में जीवंत किया है।
राष्ट्र प्रेस
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