जन्माष्टमी पर हेमा मालिनी बनीं राधा, 'राधा रास बिहारी' बैले की झलक से मोहा मन
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड की 'ड्रीम गर्ल' हेमा मालिनी ने जन्माष्टमी 2026 के पावन अवसर पर अपने प्रसिद्ध डांस बैले 'राधा रास बिहारी' की एक मनमोहक झलक साझा की। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें वह पारंपरिक परिधान और भव्य आभूषणों से सजी राधा की भूमिका में नज़र आ रही हैं। शास्त्रीय नृत्य की सुंदर मुद्राओं में उनका यह रूप दर्शकों के दिलों को छू गया।
मंच पर जीवंत हुई राधा-कृष्ण की भक्ति
वीडियो में हेमा मालिनी अपनी नृत्य मंडली के साथ मंच पर प्रस्तुति देती दिखाई दे रही हैं। उनके साथ एक अन्य कलाकार कृष्ण की भूमिका में हैं। शास्त्रीय नृत्य के माध्यम से राधा और कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति को इस प्रस्तुति में बेहद भावपूर्ण तरीके से उकेरा गया है।
वीडियो के साथ हेमा मालिनी ने लिखा, 'जन्माष्टमी के पावन अवसर पर अपने डांस बैले 'राधा रास बिहारी' की एक झलक साझा कर रही हूं। यह जन्माष्टमी सभी के जीवन में शांति, खुशियां और समृद्धि लेकर आए। राधे-राधे... जय श्री कृष्ण।'
'राधा रास बिहारी' — हेमा की सांस्कृतिक धरोहर
'राधा रास बिहारी' हेमा मालिनी की सर्वाधिक चर्चित नृत्य प्रस्तुतियों में से एक है। इस बैले में राधा-कृष्ण के रिश्ते, उनके प्रेम और अध्यात्म को शास्त्रीय नृत्य शैली के ज़रिए दर्शाया जाता है। हेमा अपने करियर में इस बैले को कई बार मंच पर प्रस्तुत कर चुकी हैं। यह प्रस्तुति उनके लिए भारतीय संस्कृति और कृष्ण भक्ति से जुड़ा एक गहरा भावनात्मक अनुभव है।
पाँच साल की उम्र से शुरू हुई नृत्य की साधना
गौरतलब है कि हेमा मालिनी ने महज पाँच वर्ष की आयु में भरतनाट्यम सीखना आरंभ कर दिया था। उनकी माँ जया चक्रवर्ती ने बेटी की इस प्रतिभा को पहचाना और उनके नृत्य करियर को आगे बढ़ाने में पूर्ण सहयोग दिया। बचपन दिल्ली में बिताने वाली हेमा ने छोटी उम्र से ही मंच पर प्रस्तुतियाँ देना शुरू कर दिया था।
भरतनाट्यम के बाद उन्होंने कुचिपुड़ी भी सीखी। इसके लिए उन्होंने चेन्नई में प्रख्यात गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम से प्रशिक्षण लिया।
रेखा से जुड़ी दिलचस्प याद
हेमा मालिनी की नृत्य यात्रा से जुड़ा एक रोचक प्रसंग अभिनेत्री रेखा से भी जुड़ा है। हाल ही में 'इंडियन आइडल' में हेमा ने बताया कि जब वह चेन्नई में गुरु वेम्पति चिन्ना सत्यम से कुचिपुड़ी की ट्रेनिंग ले रही थीं, तब रेखा भी उन्हीं डांस क्लासेज़ में आती थीं। उन्होंने बताया कि रेखा बचपन में काफी शरारती थीं और कई बार रिहर्सल के बीच से भाग जाती थीं, जिससे गुरुजी के लिए उन्हें संभालना आसान नहीं होता था।
पौराणिक कथाओं को मंच पर उतारने की विरासत
समय के साथ हेमा मालिनी ने नृत्य को एक बड़े मंच तक पहुँचाया और अनेक यादगार डांस बैले तैयार किए। 'दुर्गा', 'मीरा', 'रामायण', 'सावित्री', 'राधा कृष्ण' और 'राधा रास बिहारी' जैसी प्रस्तुतियों के ज़रिए उन्होंने पौराणिक और आध्यात्मिक कथाओं को शास्त्रीय नृत्य की भाषा में जीवंत किया है। उनकी यह कला-साधना भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनी हुई है।