इम्तियाज अली जन्मदिन: अभिनेता बनने का सपना लेकर आए मुंबई, निर्देशन ने बना दिया 'जब वी मेट' का जादूगर
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली आज 16 जून 2025 को अपना 54वाँ जन्मदिन मना रहे हैं — वही इम्तियाज, जो कभी पर्दे पर हीरो बनने का सपना लेकर मुंबई आए थे, लेकिन कैमरे के पीछे खड़े होकर हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार प्रेम कहानियाँ गढ़ गए। 'जब वी मेट', 'रॉकस्टार', 'हाइवे' और 'तमाशा' जैसी फिल्मों के किरदार और संवाद आज भी दर्शकों के ज़ेहन में ज़िंदा हैं।
जमशेदपुर से मुंबई तक का सफर
इम्तियाज अली का जन्म 16 जून 1971 को झारखंड के जमशेदपुर में हुआ था। उनके पिता सिंचाई विभाग में इंजीनियर थे और माँ गृहिणी थीं। बचपन का कुछ हिस्सा पटना में बीता, जहाँ उन्होंने शुरुआती शिक्षा ली। बाद में वे जमशेदपुर लौट आए, जहाँ उनके रिश्तेदारों के कई सिनेमाघर थे और एक थिएटर घर के बिल्कुल नज़दीक था — यहीं से फिल्मों के प्रति उनका लगाव जड़ें पकड़ने लगा।
दिल्ली के रंगमंच ने दी असली तराश
उच्च शिक्षा के लिए इम्तियाज दिल्ली पहुँचे और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज में दाखिला लिया। कॉलेज के दिनों में उन्होंने थिएटर में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया — नाटक लिखे, उनका निर्देशन किया और खुद अभिनय भी किया। यही वह दौर था जब उन्होंने तय कर लिया कि मनोरंजन की दुनिया ही उनकी मंज़िल है। गौरतलब है कि रंगमंच का यह अनुभव बाद में उनकी फिल्मों की कथा-शैली में साफ़ झलका।
अभिनेता बनने का सपना और टेलीविज़न का मोड़
कॉलेज के बाद इम्तियाज अभिनेता बनने का सपना लेकर मुंबई पहुँचे। उन्होंने अभिनय के कई प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। धीरे-धीरे उनका झुकाव फिल्म निर्माण और निर्देशन की ओर होने लगा। टेलीविज़न इंडस्ट्री में काम करते हुए उन्होंने 'कुरुक्षेत्र', 'इम्तिहान' और 'महाभारत' जैसे शोज़ का निर्देशन किया, जिससे कैमरे के पीछे काम करने की बारीकियाँ सीखने का मौका मिला।
अभिनय का सपना पूरी तरह छूटा नहीं था — 2004 में उन्हें निर्देशक अनुराग कश्यप की चर्चित फिल्म 'ब्लैक फ्राइडे' में याकूब मेमन का किरदार निभाने का अवसर मिला। लेकिन इस अनुभव के बाद उन्हें स्वयं महसूस हुआ कि उनकी असली ताकत अभिनय में नहीं, बल्कि कहानियाँ गढ़ने और उन्हें पर्दे पर उतारने में है।
संघर्ष से 'जब वी मेट' तक
2005 में उनकी पहली फिल्म 'सोचा न था' रिलीज़ हुई। समीक्षकों ने सराहा, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर फिल्म उम्मीद पर खरी नहीं उतरी। इसके बाद 'आहिस्ता आहिस्ता' भी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। लगातार दो फिल्मों की नाकामी के बावजूद इम्तियाज डटे रहे। फिर 2007 में 'जब वी मेट' आई — शाहिद कपूर और करीना कपूर की इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया और इम्तियाज रातोंरात चर्चित निर्देशकों की पंक्ति में आ खड़े हुए।
फिल्मोग्राफी और सम्मान
'जब वी मेट' की सफलता के बाद इम्तियाज ने 'लव आज कल', 'रॉकस्टार', 'हाइवे', 'तमाशा' और 'अमर सिंह चमकीला' जैसी फिल्मों का निर्देशन कर अपनी अलग पहचान स्थापित की। उनके काम को आईफा, गिल्ड अवॉर्ड, इंडियन टेली अवार्ड और ज़ी सिने अवॉर्ड सहित कई पुरस्कारों से नवाज़ा जा चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी सिनेमा में 'स्लाइस-ऑफ-लाइफ' कहानियों की माँग लगातार बढ़ रही है — और इम्तियाज इस शैली के सबसे मज़बूत हस्ताक्षरों में से एक बने हुए हैं।