टुन टुन की 103वीं जयंती पर जैकी श्रॉफ की श्रद्धांजलि: 'हमेशा हमारे दिलों में रहेंगी'
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ ने 11 जुलाई 2026 को हिंदी सिनेमा की पहली महिला कॉमेडियन टुन टुन (असली नाम: उमा देवी खत्री) की 103वीं जयंती पर सोशल मीडिया के ज़रिए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जैकी ने एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'उमा देवी खत्री (टुन टुन जी) हमेशा हमारे दिलों में रहेंगी।'
श्रद्धांजलि का संदेश
जैकी श्रॉफ द्वारा साझा की गई पोस्ट में उमा देवी खत्री के सुनहरे दौर की एक तस्वीर के साथ हाथ जोड़ने वाला इमोजी लगाया गया। पोस्ट में उनकी जन्म तिथि 11 जुलाई 1923 और निधन की तारीख 24 नवंबर 2003 का भी उल्लेख किया गया, जो उनके जीवन की पूरी यात्रा को रेखांकित करती है।
टुन टुन का सफ़रनामा: गायिका से कॉमेडियन तक
उमा देवी खत्री का जन्म 11 जुलाई 1923 को हुआ था। बॉलीवुड की सर्वप्रिय कॉमेडियन बनने से पहले उन्होंने 1940 के दशक के उत्तरार्ध में एक प्लेबैक सिंगर के रूप में अपना करियर शुरू किया था। मशहूर म्यूज़िक डायरेक्टर नौशाद ने उन्हें शुरुआती दौर में अवसर दिया।
वर्ष 1947 की फिल्म 'दर्द' में उनके गाए गीत 'अफसाना लिख रही हूं दिल-ए-बेकरार का' ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने खुद को 'टुन टुन' नाम से स्थापित किया, जो आगे चलकर हिंदी फिल्मों में हास्य का पर्याय बन गया।
पहली महिला कॉमेडियन की विरासत
टुन टुन को बॉलीवुड की पहली महिला कॉमेडियन के रूप में जाना जाता है। उस युग में जब कॉमेडी भूमिकाएँ लगभग पूरी तरह पुरुषों के लिए आरक्षित थीं, उन्होंने नई राहें बनाईं। अपनी बेजोड़ कॉमिक टाइमिंग, स्वाभाविक हास्य और अदाकारी से उन्होंने कई दशकों तक दर्शकों का मन मोहा।
उन्होंने 'मिस्टर एंड मिसेज 55', 'प्यासा', 'मुजरिम', 'कोहिनूर', 'हाफ टिकट', 'दिल अपना और प्रीत पराई', 'आया सावन झूम के' और 'आंखें' जैसी कालजयी फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी।
निधन और अमर स्मृति
24 नवंबर 2003 को 80 वर्ष की आयु में उमा देवी खत्री का निधन हो गया। यह ऐसे समय में आया जब हिंदी सिनेमा उनके योगदान को पूरी तरह रेखांकित भी नहीं कर पाया था। आज भी उनकी फिल्में और उनका अनोखा अंदाज़ दर्शकों के ज़ेहन में ज़िंदा है। जैकी श्रॉफ जैसे कलाकारों की श्रद्धांजलि यह दर्शाती है कि बॉलीवुड उनकी अमिट विरासत को आज भी सम्मान देता है।