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जॉनी लीवर जन्मदिन: सड़क पर कलम बेचने से बॉलीवुड के कॉमेडी किंग तक का सफर

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जॉनी लीवर जन्मदिन: सड़क पर कलम बेचने से बॉलीवुड के कॉमेडी किंग तक का सफर

सारांश

सड़क पर कलम बेचते हुए मिमिक्री से लोगों का ध्यान खींचने वाले जॉन प्रकाश राव जनुमाला ने 'जॉनी लीवर' बनकर बॉलीवुड को हास्य की नई भाषा दी। 300 से अधिक फिल्में और फिल्मफेयर अवॉर्ड — यह सफर संघर्ष से शिखर तक की असली कहानी है।

मुख्य बातें

जॉनी लीवर का असली नाम जॉन प्रकाश राव जनुमाला है; जन्म 14 अगस्त 1957 को आंध्र प्रदेश के प्रकाशम में हुआ।
आर्थिक तंगी के कारण सातवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ी; मुंबई की सड़कों पर पेन बेचकर मिमिक्री से गुज़ारा किया।
हिंदुस्तान यूनिलीवर में नौकरी के दौरान सहकर्मियों ने उन्हें 'जॉनी लीवर' नाम दिया, जो उनकी स्थायी पहचान बन गया।
अभिनेता सुनील दत्त की पहचान के बाद फिल्म 'दर्द का रिश्ता' से बॉलीवुड में प्रवेश; 'बाजीगर' से बड़ी पहचान मिली।
300 से अधिक फिल्मों में काम; 'दीवाना मस्ताना' और 'दूल्हे राजा' के लिए फिल्मफेयर बेस्ट कॉमेडियन अवॉर्ड जीता।

बॉलीवुड के सबसे चर्चित हास्य कलाकार जॉनी लीवर आज 14 अगस्त 2025 को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। उनका असली नाम जॉन प्रकाश राव जनुमाला है और उनका जन्म 14 अगस्त 1957 को आंध्र प्रदेश के प्रकाशम इलाके में हुआ था। करोड़ों दर्शकों को हँसाने वाले इस कलाकार की जिंदगी का शुरुआती अध्याय संघर्ष, गरीबी और हिम्मत की एक अनोखी दास्तान है।

मुंबई की सड़कों से शुरू हुई कहानी

जॉनी लीवर का बचपन मुंबई में बीता, जहाँ परिवार की आर्थिक स्थिति कभी मजबूत नहीं रही। सातवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी और परिवार का बोझ उठाने के लिए छोटी उम्र में ही काम पर निकलना पड़ा। वह मुंबई की सड़कों पर पेन बेचते थे — लेकिन उनका तरीका बाकियों से बिल्कुल अलग था। वह फिल्मी सितारों की मिमिक्री करके राहगीरों का ध्यान खींचते और इसी हुनर के दम पर अपना सामान बेचते थे। यह मिमिक्री महज एक बिक्री का हथकंडा नहीं थी — यह एक प्रतिभा की पहली झलक थी।

हिंदुस्तान यूनिलीवर से मिला नया नाम

सड़क के बाद जॉनी लीवर ने हिंदुस्तान यूनिलीवर में नौकरी की। वहाँ भी उनकी मिमिक्री का जादू चलता रहा — साथी कर्मचारी और अधिकारी उनकी नकल देखकर हँसते रहते। एक कार्यक्रम में उनकी परफॉर्मेंस इतनी धमाकेदार रही कि सहकर्मियों ने उन्हें मजाक में 'जॉनी लीवर' पुकारना शुरू कर दिया — कंपनी के नाम से प्रेरित यह उपनाम आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया।

स्टेज से सिल्वर स्क्रीन तक

1981 के आसपास उन्होंने नौकरी छोड़कर मनोरंजन की दुनिया को पूरी तरह अपना लिया। स्टेज शो और लाइव परफॉर्मेंस के ज़रिए उनकी पहचान बढ़ती गई। बड़ा मोड़ तब आया जब अभिनेता सुनील दत्त की नज़र उनकी प्रतिभा पर पड़ी और उन्हें फिल्म 'दर्द का रिश्ता' में काम करने का अवसर मिला। शुरुआती दौर में छोटे और सहायक किरदार मिले, लेकिन उनकी कॉमेडी इतनी अलग थी कि दर्शक उन्हें नोटिस किए बिना नहीं रह सके।

बाजीगर से बनी अलग पहचान

फिल्म 'बाजीगर' ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊँचाई दी। इसके बाद जॉनी लीवर उन गिने-चुने कलाकारों में शामिल हो गए जिनकी स्क्रीन पर एंट्री मात्र से दर्शकों में हँसी की लहर दौड़ जाती थी। 'बाबूलाल', 'छोटा छत्री' और 'असलम भाई' जैसे किरदार आज भी दर्शकों की स्मृति में ताज़े हैं। उनकी खासियत यह रही कि छोटे से छोटे रोल को भी वह अपनी टाइमिंग और एक्सप्रेशन से यादगार बना देते थे।

300 से अधिक फिल्में और राष्ट्रीय पुरस्कार

जॉनी लीवर ने अपने लंबे करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है। उन्हें 'दीवाना मस्ताना' और 'दूल्हे राजा' के लिए फिल्मफेयर बेस्ट कॉमेडियन अवॉर्ड से नवाज़ा गया। फिल्मों के अलावा टेलीविज़न पर भी उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। गौरतलब है कि सड़क पर कलम बेचने वाले इस लड़के ने बॉलीवुड में हास्य को एक नई भाषा दी — और यह सफर आज भी प्रेरणा देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिद चाहिए। सातवीं कक्षा तक पढ़े इस कलाकार ने बॉलीवुड में वह जगह बनाई जो अक्सर प्रशिक्षित अभिनेताओं को भी नसीब नहीं होती। लेकिन यह भी सच है कि हिंदी सिनेमा में हास्य को हमेशा 'सहायक भूमिका' तक सीमित रखा गया — जॉनी लीवर जैसे कलाकारों को मुख्य किरदार शायद ही कभी मिले। उनकी विरासत इस सवाल को भी उठाती है कि क्या भारतीय फिल्म उद्योग ने कॉमेडी को वह सम्मान दिया जिसकी वह हकदार थी।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जॉनी लीवर का असली नाम क्या है?
जॉनी लीवर का असली नाम जॉन प्रकाश राव जनुमाला है। उनका जन्म 14 अगस्त 1957 को आंध्र प्रदेश के प्रकाशम इलाके में हुआ था और उनका बचपन मुंबई में बीता।
जॉनी लीवर को यह नाम कैसे मिला?
हिंदुस्तान यूनिलीवर में काम के दौरान एक कार्यक्रम में उनकी मिमिक्री से प्रभावित सहकर्मियों ने कंपनी के नाम पर उन्हें 'जॉनी लीवर' कहना शुरू किया। यही उपनाम आगे चलकर उनकी स्थायी पहचान बन गया।
जॉनी लीवर ने बॉलीवुड में पहली फिल्म कौन सी की?
अभिनेता सुनील दत्त की नज़र पड़ने के बाद जॉनी लीवर को फिल्म 'दर्द का रिश्ता' में काम करने का अवसर मिला। इसके बाद 'बाजीगर' ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊँचाई दी।
जॉनी लीवर ने कितनी फिल्मों में काम किया है?
जॉनी लीवर ने अपने करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है। उन्हें 'दीवाना मस्ताना' और 'दूल्हे राजा' के लिए फिल्मफेयर बेस्ट कॉमेडियन अवॉर्ड से भी नवाज़ा गया।
जॉनी लीवर ने पढ़ाई क्यों छोड़ी?
परिवार की कमज़ोर आर्थिक स्थिति के कारण जॉनी लीवर सातवीं कक्षा के बाद पढ़ाई नहीं कर सके। परिवार की मदद के लिए उन्हें छोटी उम्र से ही काम करना पड़ा और वह मुंबई की सड़कों पर पेन बेचने लगे।
राष्ट्र प्रेस
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