जूही बब्बर: NIFT से फैशन डिजाइनिंग, फिर थिएटर में 100 शो की ऐतिहासिक पारी
सारांश
मुख्य बातें
जूही बब्बर — अभिनेता राज बब्बर और थिएटर की दिग्गज हस्ती नादिरा बब्बर की बेटी — ने अभिनय की पारंपरिक राह नहीं चुनी, बल्कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT), मुंबई से फैशन डिजाइनिंग में स्नातक करके कला की दुनिया में कदम रखा। 20 जुलाई 1976 को लखनऊ में जन्मी जूही की विरासत साहित्य और संस्कृति से गहरी जुड़ी है — उनके नाना-नानी सैयद सज्जाद जहीर और रजिया सज्जाद जहीर उर्दू के प्रतिष्ठित प्रगतिशील लेखक थे।
कॉस्ट्यूम डिजाइनर से अभिनेत्री तक का सफर
जूही बब्बर ने अपनी कलात्मक यात्रा की शुरुआत नाटकों में कॉस्ट्यूम डिजाइनर के रूप में की। अभिनय का कोई औपचारिक प्रशिक्षण न लेने के बावजूद, उन्होंने 2003 में फिल्म 'काश आप हमारे होते' में अमृता की भूमिका से बॉलीवुड में कदम रखा। 2005 में पंजाबी फिल्म 'यारां नाल बहारां' में हरमन कौर का किरदार निभाया, और 2009 में टीवी शो 'घर की बात है' में राधिका याग्निक बनीं। 2018 में फिल्म 'अय्यारी' में कर्नल अभय सिंह की पत्नी की भूमिका में नजर आईं, जबकि 2023 में 'फराज' और 'फर्रे' में क्रमशः सिमीन और जोया की भूमिकाएं निभाईं।
व्यक्तिगत जीवन और संघर्ष
27 जून 2007 को फिल्म निर्माता बिजॉय नांबियार के साथ उनका पहला विवाह हुआ, जो वैचारिक मतभेदों के कारण जनवरी 2009 में टूट गया। इस व्यक्तिगत उथल-पुथल ने उनकी कलात्मक प्रतिबद्धता को और दृढ़ किया। 2011 में उन्होंने अभिनेता अनूप सोनी के साथ दूसरा विवाह किया। उनके बेटे का नाम इमान सोनी है।
थिएटर में असली पहचान
जूही बब्बर की सबसे बड़ी उपलब्धि उनका एकल नाटक 'विद लव, आपकी सैयारा' है, जिसकी वे लेखिका, निर्देशिका और मुख्य अभिनेत्री — तीनों हैं। यह नाटक एक आधुनिक भारतीय महिला की पहचान, तलाक, सपनों और सामाजिक बंधनों को बेबाकी से उकेरता है। जून 2024 में इस नाटक ने 100 शानदार शो पूरे किए। जावेद अख्तर, विशाल भारद्वाज और अनुपम खेर जैसी हस्तियों ने इस प्रस्तुति की मुक्त कंठ से सराहना की है।
दादी की भूमिका और साहित्यिक श्रद्धांजलि
अक्टूबर 2025 में 'खुशवंत सिंह लिटरेरी फेस्टिवल' में प्रीमियर हुए नाटक 'ए लव स्टोरी 1938-1979' में जूही ने अपनी ही दादी रजिया सज्जाद जहीर का ऐतिहासिक और भावनात्मक किरदार निभाया, जो दर्शकों के दिलों को गहराई से छू गया। यह नाटक उनकी पारिवारिक विरासत को कला के माध्यम से जीवंत करने का एक अनूठा प्रयास था।
सम्मान और आगे की राह
2010 में जूही बब्बर को प्रतिष्ठित 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा राष्ट्रीय पुरस्कार' से नवाजा गया। आज वे भारतीय रंगमंच की सबसे सशक्त आवाजों में गिनी जाती हैं और मुख्य रूप से थिएटर में सक्रिय हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि कलाकार की असली पहचान बॉक्स ऑफिस के आँकड़ों से नहीं, बल्कि दर्शकों के दिलों में उतरने की क्षमता से बनती है।