26 सितंबर 2026
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जूही चावला ने मुंबई गणपति उत्सव की सुरक्षा व्यवस्था को सराहा, पर्यावरण अनुकूल आयोजन की भी अपील

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जूही चावला ने मुंबई गणपति उत्सव की सुरक्षा व्यवस्था को सराहा, पर्यावरण अनुकूल आयोजन की भी अपील

सारांश

अभिनेत्री जूही चावला ने मुंबई गणपति उत्सव में पहुँचकर सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण माहौल की तारीफ की। साथ ही उन्होंने बड़े पंडाल आयोजकों से सीधे अपील की कि वे पर्यावरण अनुकूल गणपति बनाने में पहल करें — ताकि बाकी सभी उनका अनुसरण कर सकें।

मुख्य बातें

जूही चावला ने 26 सितंबर 2026 को मुंबई के गणपति उत्सव में शिरकत की और सुरक्षा व्यवस्था की प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि हज़ारों-लाखों श्रद्धालु — पुरुष और महिलाएँ दोनों — पूर्ण सुरक्षा के साथ उत्सव में शामिल हुए।
जूही ने इस उत्सव को महाराष्ट्र और गुजरात की अनूठी सांस्कृतिक धरोहर बताया।
बड़े गणपति पंडालों के आयोजकों से पर्यावरण अनुकूल मूर्तियाँ बनाने की विशेष अपील की।
चार दशकों से अधिक के करियर में जूही चावला सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर मुखर रही हैं।

अभिनेत्री जूही चावला ने 26 सितंबर 2026 को मुंबई में आयोजित गणपति उत्सव की सुरक्षा व्यवस्था और उत्सवी माहौल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने इस बात पर विशेष प्रसन्नता जताई कि हज़ारों-लाखों श्रद्धालु — जिनमें पुरुष और महिलाएँ दोनों शामिल थे — पूर्ण सुरक्षा और सौहार्द के साथ भगवान गणेश की आराधना में सम्मिलित हुए।

उत्सव के माहौल से अभिभूत हुईं जूही

जूही चावला ने उत्सव स्थल पर अपनी भावनाएँ साझा करते हुए कहा, 'जैसा कि आप देख सकते हैं, यहाँ बहुत ही प्रसन्नतापूर्ण और सम्मानपूर्ण वातावरण रहा। इतने सारे लोग पूजा करने आए, पूरे आदर के साथ। मुझे आश्चर्य है, और यह बहुत अच्छी बात है कि यहाँ महिलाएँ और पुरुष दोनों मौजूद रहे और सभी सुरक्षित रहे।'

उन्होंने आगे कहा, 'सभी लोग सुरक्षित हैं। आप देख सकते हैं कि कितने सारे लोग थे — हज़ारों, लाखों — लेकिन सभी सुरक्षित हैं। सभी ने सहजता से, अपनी खुशी के साथ बाबा की पूजा की। यह बहुत ही सुंदर वातावरण रहा।'

मुंबई का गौरव और व्यक्तिगत अनुभव

जूही चावला ने इस आयोजन को मुंबई की पहचान और गौरव से जोड़ते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि यह मुंबई का गौरव है, और मुझे यहाँ आमंत्रित करने के लिए शाइना, आपका धन्यवाद। इसे टीवी पर देखना एक बात है, लेकिन असल ज़िंदगी में देखना दिल छू जाता है।' यह टिप्पणी दर्शाती है कि उत्सव की भव्यता किसी भी माध्यम से कहीं अधिक प्रत्यक्ष अनुभव में निखरती है।

महाराष्ट्र-गुजरात की सांस्कृतिक विरासत

अभिनेत्री ने गणपति उत्सव को महाराष्ट्र और गुजरात की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने कहा, 'यह त्योहार महाराष्ट्र और गुजरात के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यहाँ हम इसे बहुत प्रेम से मनाते हैं और यह बहुत खास है। आप यहाँ जो देख रहे हैं, शायद दुनिया में कहीं और ऐसा नहीं होता।' गौरतलब है कि गणपति उत्सव की सार्वजनिक परम्परा को बाल गंगाधर तिलक ने 19वीं सदी में राष्ट्रीय एकजुटता के प्रतीक के रूप में स्थापित किया था।

पर्यावरण अनुकूल आयोजन की अपील

उत्सव की प्रशंसा के साथ-साथ जूही ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने बड़े गणपति पंडालों के आयोजकों से सीधे आग्रह किया: 'कृपया आप पर्यावरण के अनुकूल गणपति कब बनाएंगे? जब आप ऐसा करेंगे, तो सभी पंडाल आपका अनुसरण करेंगे। इसलिए कृपया, पहले पर्यावरण के अनुकूल बनने का प्रयास करें।' यह अपील ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब प्रतिवर्ष मूर्ति विसर्जन से जल निकायों में प्रदूषण की चिंता उठती रहती है।

चार दशकों से सामाजिक सरोकार

हिंदी सिनेमा में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए जानी जाने वाली जूही चावला चार दशकों से अधिक समय से मनोरंजन उद्योग से जुड़ी हैं। वर्षों से वे कई सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर मुखर रही हैं। उनकी यह उपस्थिति और अपील, गणपति उत्सव की लोकप्रियता तथा पर्यावरण जागरूकता के बीच एक सेतु के रूप में देखी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनकी असली अहमियत पर्यावरण अनुकूल गणपति की अपील में है — जो मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर पीछे रह जाती है। हर वर्ष मूर्ति विसर्जन के बाद जल प्रदूषण की गंभीर रिपोर्टें आती हैं, फिर भी बड़े पंडाल पीओपी मूर्तियों का उपयोग जारी रखते हैं। जब किसी सार्वजनिक हस्ती की अपील केवल भावनात्मक न होकर सीधे आयोजकों को जवाबदेह ठहराने की कोशिश करे, तो यह महज सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट से अलग है। सवाल यह है कि क्या इस अपील को नीतिगत दबाव में तब्दील किया जाएगा या यह महज उत्सवी सुर्खी बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जूही चावला ने मुंबई गणपति उत्सव के बारे में क्या कहा?
जूही चावला ने उत्सव को 'बहुत ही प्रसन्नतापूर्ण और सम्मानपूर्ण' बताया और कहा कि हज़ारों-लाखों श्रद्धालु — पुरुष और महिलाएँ दोनों — पूरी सुरक्षा के साथ भगवान गणेश की पूजा में शामिल हुए। उन्होंने इस अनुभव को टीवी पर देखने से कहीं अधिक हृदयस्पर्शी बताया।
जूही चावला ने पर्यावरण को लेकर क्या अपील की?
जूही चावला ने बड़े गणपति पंडालों के आयोजकों से अपील की कि वे पर्यावरण के अनुकूल गणपति मूर्तियाँ बनाने में पहल करें। उनका तर्क था कि जब बड़े आयोजक यह कदम उठाएंगे, तो बाकी सभी पंडाल उनका अनुसरण करेंगे।
गणपति उत्सव महाराष्ट्र और गुजरात के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
गणपति उत्सव महाराष्ट्र और गुजरात की प्रमुख सांस्कृतिक पहचान है, जिसे बाल गंगाधर तिलक ने 19वीं सदी में सार्वजनिक एकता के प्रतीक के रूप में स्थापित किया था। जूही चावला ने कहा कि यह त्योहार इन राज्यों में बहुत प्रेम से मनाया जाता है और दुनिया में इसके जैसा कहीं और नहीं होता।
इस उत्सव में जूही चावला के साथ कौन उपस्थित थीं?
जूही चावला ने अपने वक्तव्य में 'शाइना' का नाम लेते हुए उन्हें इस अवसर पर आमंत्रित करने के लिए धन्यवाद दिया। जूही चावला चार दशकों से अधिक समय से हिंदी सिनेमा और सामाजिक-पर्यावरणीय मुद्दों से जुड़ी हैं।
पर्यावरण अनुकूल गणपति क्यों ज़रूरी है?
प्रतिवर्ष गणेश विसर्जन के दौरान प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियाँ जल निकायों में प्रदूषण फैलाती हैं। मिट्टी या अन्य विघटनशील सामग्री से बनी मूर्तियाँ इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकती हैं, और इसीलिए जूही चावला ने बड़े आयोजकों से नेतृत्व की माँग की।
राष्ट्र प्रेस
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