धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मुंबई में गणपति दर्शन किए, PM मोदी के 76वें जन्मदिन पर दी शुभकामनाएं
सारांश
मुख्य बातें
बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 17 सितंबर 2026 को गणपति उत्सव के अवसर पर मुंबई के कांदिवली और भिवंडी में भगवान गणपति के दर्शन किए तथा देश की शांति, समृद्धि और सनातन एकता के लिए प्रार्थना की। इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 76वें जन्मदिन पर बधाई देते हुए उनके कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था और वित्तीय व्यवस्था के सुदृढ़ होने की सराहना की।
गणपति दर्शन और प्रार्थना
शास्त्री ने कांदिवली और भिवंडी में भगवान गणपति का आशीर्वाद लेते हुए कहा कि इस समय पूरा महाराष्ट्र गजानन की भक्ति में डूबा हुआ है। भिवंडी में उन्होंने बताया कि वहाँ पिछले 38 वर्षों से भगवान गणपति विराजमान हैं और उन्हें यहाँ दर्शन एवं आशीर्वाद लेने का सौभाग्य मिला।
शास्त्री ने जानकारी दी कि भिवंडी में बागेश्वर धाम का एक आश्रम भी है और वे प्रत्येक दो-तीन महीने में वहाँ जाते रहते हैं। उन्होंने विश्व की भलाई, भारत में सनातन एकता और विश्व शांति के लिए प्रार्थना करने की बात कही।
PM मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं
शास्त्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा, 'प्रधानमंत्री को उनके 76वें जन्मदिन पर बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।' उन्होंने प्रधानमंत्री के सफर को भारत की प्रगति और विकास से जोड़ते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था और वित्तीय व्यवस्था मजबूत हुई है।
शास्त्री ने भगवान बागेश्वर बालाजी से प्रधानमंत्री मोदी की लंबी और स्वस्थ आयु के लिए प्रार्थना भी की। गौरतलब है कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री का जन्मदिन होता है और इस अवसर पर देशभर से नेता, धर्मगुरु और आम नागरिक उन्हें शुभकामनाएं देते हैं।
नवरात्रि और वीएचपी की अपील पर प्रतिक्रिया
नवरात्रि के दौरान मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाने की विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की अपील से जुड़े सवाल पर शास्त्री ने कहा कि हर समुदाय को अपने-अपने त्योहार मनाने चाहिए। उन्होंने नवरात्रि को सनातन परंपरा का पर्व बताते हुए कहा कि इस्लाम में मूर्ति पूजा की अनुमति नहीं है, जबकि हिंदू परंपरा में दुर्गा पूजा और गरबा जैसे आयोजनों में धार्मिक प्रतीकों की पूजा होती है।
विश्वगुरु भारत का संकल्प
शास्त्री ने अपने गुरु-परंपरा के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य केवल शिष्य बनाना नहीं, बल्कि लोगों को गुरु बनने के लिए प्रेरित करना है। उनके अनुसार, जब भारत के लोग गुरु बनेंगे, तभी भारत विश्वगुरु बनेगा।
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब महाराष्ट्र में गणपति उत्सव अपने चरम पर है और धार्मिक-सामाजिक आयोजनों में जनभागीदारी उल्लेखनीय रूप से दिख रही है।