रश्मिका मंदाना के एक्सेंट पर ट्रोलिंग के बीच कशिका कपूर बोलीं — 'भाषा कभी रुकावट नहीं बननी चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री कशिका कपूर ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले दक्षिण भारतीय कलाकारों को उनके हिंदी एक्सेंट के आधार पर ट्रोल किए जाने की प्रवृत्ति पर खुलकर अपनी बात रखी है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब रश्मिका मंदाना को उनके लहजे को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। कशिका ने स्पष्ट कहा कि किसी भी अभिनेता की पहचान उनके टैलेंट से होनी चाहिए, न कि उनके बोलने के तरीके से।
कशिका का स्पष्ट रुख
एक खास बातचीत में कशिका से पूछा गया कि हिंदी फिल्मों में काम करने वाले दक्षिण भारतीय कलाकारों को उनके एक्सेंट की वजह से आलोचना झेलनी पड़ती है — इस पर उनकी क्या राय है। इस पर उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि ऐसा अक्सर होता है, लेकिन एक एक्टर की पहचान हमेशा एक परफॉर्मर के तौर पर होनी चाहिए। भाषा कभी कोई रुकावट नहीं बननी चाहिए।'
उन्होंने यह भी जोड़ा, 'हमें इंडस्ट्री को यह कहकर नहीं बांटना चाहिए कि यह तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री है या यह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री है।' यह बयान ऐसे दौर में महत्वपूर्ण है जब पैन-इंडिया सिनेमा का विस्तार हो रहा है और विभिन्न भाषाओं के कलाकार एक-दूसरे की इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं।
रश्मिका मंदाना का संदर्भ
'कॉफी विद करण' शो में रश्मिका मंदाना ने खुद स्वीकार किया था कि उन्हें अपने पूरे करियर में एक्सेंट को लेकर आलोचना झेलनी पड़ी है। उन्होंने कहा था कि दक्षिण भारत से होने के कारण उनका लहजा स्वाभाविक है, और वह इसे अपनी पहचान का हिस्सा मानती हैं। 'पुष्पा' फेम इस अभिनेत्री ने जोर दिया था कि वह खुद को किसी एक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रखना चाहतीं।
गौरतलब है कि रश्मिका 'एनिमल', 'पुष्पा' और हाल की 'द गर्लफ्रेंड' जैसी बड़ी फिल्मों में काम कर चुकी हैं और उन्होंने हिंदी, तेलुगु और कन्नड़ — तीनों भाषाओं में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
रश्मिका के पक्ष में कशिका
कशिका ने रश्मिका का सीधा बचाव करते हुए कहा, 'वह एक शानदार एक्टर और परफॉर्मर हैं और मुझे नहीं लगता कि किसी को भी उन्हें उनकी भाषा या एक्सेंट के आधार पर जज करना चाहिए। यह उनकी पहचान का ही एक हिस्सा है जो उन्हें सबसे अलग बनाता है।'
उन्होंने आगे कहा, 'उनकी जड़ें वहाँ से जुड़ी हैं, लेकिन अंत में उनकी परफॉर्मेंस ही मायने रखती है। एक्टर्स को उनके एक्सेंट के लिए जज करने के बजाय, उनके टैलेंट के लिए सराहा जाना चाहिए।'
व्यापक बहस: इंडस्ट्री और भाषा का विभाजन
यह बहस महज एक अभिनेत्री के लहजे तक सीमित नहीं है — यह उस बड़े सवाल को छूती है कि क्या हिंदी सिनेमा में दर्शक और आलोचक अभी भी भाषाई और क्षेत्रीय पहचान के आधार पर कलाकारों को परखते हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसी ट्रोलिंग न केवल कलाकारों की मेहनत को नज़रअंदाज़ करती है, बल्कि पैन-इंडिया सिनेमा की भावना के भी विरुद्ध है।
कशिका कपूर की यह टिप्पणी दर्शाती है कि इंडस्ट्री के भीतर से भी ऐसी सोच के खिलाफ आवाज़ें उठ रही हैं। आने वाले समय में देखना होगा कि क्या यह बहस इंडस्ट्री के व्यवहार में कोई ठोस बदलाव ला पाती है।