ईशा देओल बोलीं — साउथ इंडियन एक्सेंट मुझे बहुत प्यारा लगता है, 'प्रताप' से कर रही हैं वापसी
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री ईशा देओल एक्शन-क्राइम ड्रामा फिल्म 'प्रताप' के साथ 15 साल बाद बॉलीवुड में वापसी कर रही हैं। इस मौके पर उन्होंने साउथ इंडियन अभिनेताओं के एक्सेंट को लेकर होने वाली ऑनलाइन ट्रोलिंग पर अपना नजरिया साझा किया और कहा कि उन्हें यह लहजा 'प्यारा' और 'क्यूट' लगता है।
ईशा देओल की प्रतिक्रिया
ईशा ने एक बातचीत में कहा, 'जब मैं अपने डायलॉग बोलती हूं, खासकर हिंदी में, तो मैं काफी हद तक अपनी मां जैसी लगती हूं, लेकिन असल में मैं वैसी ही हूं और जिन्होंने मुझे किसी खास किरदार के लिए लिया है, वो ये बात अच्छे से जानते हैं। तो मुझे लगता है कि साउथ इंडियन लोगों का हल्का-सा एक्सेंट सुनना बहुत प्यारा और क्यूट लगता है।'
ईशा ने यह भी जोड़ा कि बॉलीवुड में कई दिग्गज अभिनेत्रियों की बोली में साउथ इंडियन एक्सेंट की झलक रही है। उन्होंने कहा, 'श्री आंटी, मेरी मम्मी और उर्मिला में भी साउथ इंडियन एक्सेंट सुनने को मिलता है। उर्मिला की तो मैं बहुत बड़ी फैन हूं और उनकी बोली में जो हल्का-सा एक्सेंट आता है, वो मुझे पसंद है।'
भाषाई विविधता पर जोर
ईशा ने स्पष्ट किया कि लोगों के बोलने के तरीके का मजाक उड़ाने के बजाय भाषाई और सांस्कृतिक विविधता की सराहना करना जरूरी है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब साउथ इंडियन एक्सेंट को लेकर बहस ने सोशल मीडिया पर नई गति पकड़ी है।
रश्मिका मंदाना ने क्यों छेड़ी थी बहस
गौरतलब है कि इस चर्चा की शुरुआत तब हुई जब अभिनेत्री रश्मिका मंदाना ने करण जौहर के टॉक शो 'कॉफी विद करण सीजन 9' में अपने साउथ इंडियन एक्सेंट को लेकर होने वाली ट्रोलिंग पर खुलकर बात की। इस एपिसोड में रश्मिका अपने पति और अभिनेता विजय देवरकोंडा के साथ नजर आई थीं।
रश्मिका ने शो में कहा था कि वे दक्षिण भारत से हैं, इसलिए उनके लहजे में वहाँ की झलक होना बिल्कुल स्वाभाविक है और इसमें परेशान होने वाली कोई बात नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी फिल्मों के लिए खुद अलग-अलग भाषाओं में डबिंग करने में गर्व महसूस करती हैं और ऑनलाइन ट्रोलिंग उन्हें अपना काम करने से नहीं रोक सकती।
ईशा देओल की बॉलीवुड वापसी
फिल्म 'प्रताप' ईशा देओल की 15 साल की लंबी अनुपस्थिति के बाद हिंदी सिनेमा में वापसी है। एक्शन-क्राइम ड्रामा की इस फिल्म से उनके प्रशंसकों में उत्साह है। ईशा की यह वापसी ऐसे दौर में हो रही है जब दक्षिण भारतीय सिनेमा और उसके कलाकार पूरे देश में अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सेंट को लेकर होने वाली ट्रोलिंग दरअसल क्षेत्रीय पहचान और राष्ट्रीय मीडिया स्पेस में प्रतिनिधित्व के व्यापक सवाल से जुड़ी है। ईशा और रश्मिका जैसी अभिनेत्रियों का खुलकर बोलना इस बहस को एक सकारात्मक दिशा देता है।