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टीवी इंडस्ट्री में पेमेंट की देरी: किशोरी शहाणे बोलीं — फाइनेंशियल प्लानिंग ही एकमात्र रास्ता

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टीवी इंडस्ट्री में पेमेंट की देरी: किशोरी शहाणे बोलीं — फाइनेंशियल प्लानिंग ही एकमात्र रास्ता

सारांश

अनुभवी अभिनेत्री किशोरी शहाणे ने टीवी इंडस्ट्री की पेमेंट देरी को 'कभी न खत्म होने वाला बुरा चक्र' करार दिया। डेली से लेकर लंबे पेमेंट साइकिल तक का अनुभव रखने वाली शहाणे का कहना है — बिना फाइनेंशियल प्लानिंग के इस इंडस्ट्री में टिकना मुश्किल है।

मुख्य बातें

अभिनेत्री किशोरी शहाणे ने 7 जून को टीवी इंडस्ट्री में पेमेंट की देरी को एक गंभीर और पुरानी समस्या बताया।
उन्होंने पेमेंट देरी को 'कभी न खत्म होने वाले बुरे चक्र' की संज्ञा दी, जिससे कलाकारों को आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
शहाणे ने अपने करियर में डेली, मंथली और लंबे पेमेंट साइकिल तीनों के तहत काम किया है।
उन्होंने फाइनेंशियल प्लानिंग और बजट बनाने को इस चुनौती का सबसे व्यावहारिक समाधान बताया।
शहाणे ने डेली ब्रॉडकास्ट के कारण काम के बढ़ते घंटों पर भी चिंता जताई और कहा कि इंडस्ट्री में टिकने के लिए इस प्रतिबद्धता को स्वीकार करना होगा।

अभिनेत्री किशोरी शहाणे ने टेलीविजन इंडस्ट्री में पेमेंट में देरी की पुरानी समस्या पर खुलकर बात की है और कहा है कि इस चुनौती से निपटने के लिए कलाकारों को सावधानीपूर्वक फाइनेंशियल प्लानिंग अपनानी होगी। मुंबई में 7 जून को हुई एक खास बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि पेमेंट में देरी कलाकारों के लिए एक 'कभी न खत्म होने वाले बुरे चक्र' जैसी स्थिति बन जाती है।

मुख्य बातें: पेमेंट की देरी का असर

'गुम है किसी के प्यार में' और 'इश्क में मरजावां' जैसे चर्चित धारावाहिकों में काम कर चुकीं किशोरी शहाणे ने कहा, "यह एक मुश्किल स्थिति है और एक कभी न खत्म होने वाले बुरे चक्र जैसा लग सकता है। पेमेंट का जो समय कम होना चाहिए, वह कभी-कभी काफी लंबा खिंच जाता है। जाहिर है, इससे मुश्किलें पैदा होती हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ प्रोडक्शन हाउस ऐसे भी हैं जो तय शेड्यूल पर पेमेंट करते हैं, और एक बार प्रक्रिया सुचारू हो जाए तो स्थिति संभल जाती है।

अलग-अलग पेमेंट स्ट्रक्चर का अनुभव

शहाणे ने बताया कि अपने लंबे करियर में उन्हें डेली, मंथली और उससे भी लंबे पेमेंट साइकिल के तहत काम करने का अनुभव रहा है। उन्होंने कहा, "सालों से मैंने अलग-अलग पेमेंट स्ट्रक्चर के तहत काम किया है। इसके लिए सावधानीपूर्वक फाइनेंशियल प्लानिंग की जरूरत होती है। मेरा मानना है कि आज कई इंडस्ट्री में प्रोफेशनल्स को ऐसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इसलिए बजट बनाना और प्लानिंग करना जरूरी हो जाता है।" यह टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि यह समस्या केवल मनोरंजन जगत तक सीमित नहीं है।

काम के लंबे घंटे: बढ़ता बोझ

पेमेंट के मुद्दे के साथ-साथ शहाणे ने टेलीविजन इंडस्ट्री में काम के बढ़ते घंटों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, "टेलीविजन में हमेशा कड़ी मेहनत की मांग रही है। पहले शो हफ्ते में एक बार टेलीकास्ट होते थे, फिर हफ्ते में पाँच दिन, और अब कई शो डेली ब्रॉडकास्ट होते हैं। जाहिर है, काम का बोझ बढ़ जाता है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग इस इंडस्ट्री का हिस्सा बनना चाहते हैं, उन्हें इस प्रतिबद्धता को स्वीकार करना होगा।

विशेषज्ञ नज़रिया: इंडस्ट्री की व्यापक तस्वीर

गौरतलब है कि टेलीविजन इंडस्ट्री में पेमेंट में देरी का मुद्दा नया नहीं है — कलाकार संगठन और ट्रेड यूनियनें वर्षों से इस पर आवाज़ उठाती रही हैं। यह ऐसे समय में और प्रासंगिक हो जाता है जब ओटीटी प्लेटफॉर्म के विस्तार के कारण कलाकारों के पास विकल्प बढ़े हैं, लेकिन पारंपरिक टेलीविजन का पेमेंट ढाँचा अभी भी पुरानी चुनौतियों से जूझ रहा है।

आगे की राह

शहाणे की सलाह स्पष्ट है — कलाकारों को अनिश्चित पेमेंट साइकिल को ध्यान में रखते हुए अपनी वित्तीय योजना बनानी चाहिए। उनका यह अनुभव-आधारित दृष्टिकोण उन नए कलाकारों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो इस इंडस्ट्री में कदम रख रहे हैं और पेमेंट की अनिश्चितता के लिए तैयार नहीं होते।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह दरअसल एक संरचनात्मक खामी की ओर इशारा करती है जिसे इंडस्ट्री दशकों से नज़रअंदाज़ करती आई है। जब एक अनुभवी अभिनेत्री को भी 'सावधानीपूर्वक फाइनेंशियल प्लानिंग' की ज़रूरत पड़े, तो सवाल यह उठता है कि नए और कम स्थापित कलाकारों का क्या हाल होता होगा। ओटीटी के दौर में जब प्रोडक्शन हाउसों की आय के स्रोत विविध हो गए हैं, पेमेंट का पुराना ढाँचा बदलने में नाकामी एक जानबूझकर की गई उपेक्षा लगती है। कलाकार संगठनों और उद्योग नियामकों की चुप्पी इस मुद्दे को और गंभीर बनाती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किशोरी शहाणे ने टीवी इंडस्ट्री में पेमेंट देरी पर क्या कहा?
किशोरी शहाणे ने पेमेंट देरी को 'कभी न खत्म होने वाले बुरे चक्र' जैसा बताया और कहा कि इससे कलाकारों को आर्थिक मुश्किलें होती हैं। उन्होंने यह भी माना कि कुछ प्रोडक्शन हाउस समय पर पेमेंट करते हैं, जिससे स्थिति बेहतर होती है।
टीवी कलाकारों को पेमेंट देरी से कैसे निपटना चाहिए?
किशोरी शहाणे के अनुसार, सावधानीपूर्वक फाइनेंशियल प्लानिंग और बजट बनाना इसका सबसे व्यावहारिक समाधान है। उन्होंने कहा कि डेली, मंथली और लंबे पेमेंट साइकिल — सभी के लिए अलग-अलग तैयारी ज़रूरी होती है।
टेलीविजन इंडस्ट्री में काम के घंटे इतने लंबे क्यों हो गए हैं?
शहाणे ने बताया कि पहले शो हफ्ते में एक बार आते थे, फिर पाँच दिन और अब कई शो डेली ब्रॉडकास्ट होते हैं। इससे कलाकारों पर काम का बोझ काफी बढ़ गया है और एक्स्ट्रा घंटे काम करना अनिवार्य हो गया है।
किशोरी शहाणे कौन हैं और उन्होंने किन धारावाहिकों में काम किया है?
किशोरी शहाणे एक अनुभवी टेलीविजन अभिनेत्री हैं जो 'गुम है किसी के प्यार में' और 'इश्क में मरजावां' जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों में काम कर चुकी हैं। उनका करियर लंबा रहा है और उन्होंने विभिन्न पेमेंट स्ट्रक्चर के तहत काम किया है।
क्या टीवी इंडस्ट्री में पेमेंट देरी की समस्या सिर्फ भारत में है?
शहाणे ने कहा कि पेमेंट की अनिश्चितता केवल मनोरंजन जगत तक सीमित नहीं है — कई इंडस्ट्री में प्रोफेशनल्स को ऐसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हालाँकि, टेलीविजन में डेली कंटेंट की माँग के कारण यह समस्या यहाँ अधिक प्रत्यक्ष रूप से महसूस होती है।
राष्ट्र प्रेस
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