पलाश दत्ता का दर्द: 'पेमेंट न मिलने और पिता के निधन ने मुझे मानसिक रूप से तोड़ दिया था'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता और कास्टिंग डायरेक्टर पलाश दत्ता ने फिल्म और टीवी इंडस्ट्री के उस कड़वे सच को उजागर किया है, जो अक्सर चमक-दमक की आड़ में छिपा रहता है — काम पूरा होने के बाद भी पेमेंट न मिलना। दत्ता ने बताया कि लंबे समय तक मेहनताना न मिलने और उसी दौरान पिता के निधन ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया था।
मुख्य घटनाक्रम
पलाश दत्ता ने बताया कि शुरुआत में उन्हें एक छोटा-सा एडवांस अमाउंट दिया गया था। जब अगले शेड्यूल के लिए बुलाया गया, तो उन्होंने साफ कहा कि पहले पुराना पेमेंट और एग्रीमेंट दिया जाए। उन्होंने कहा, 'शुरुआत में मुझे छोटा-सा एडवांस अमाउंट दिया गया था। बाद में जब मुझे अगले शेड्यूल के लिए बुलाया गया, तो मैंने साफ तौर पर कहा कि पहले मेरा पुराना पेमेंट और एग्रीमेंट दिया जाए।'
उन्होंने आगे बताया कि कुछ महीनों का इंतजार धीरे-धीरे सालों में बदल गया। इस दौरान उन्होंने कई बार प्रोडक्शन ऑफिस जाकर अधिकारियों से मुलाकात की, फोन कॉल किए और मैसेज भेजे — लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं निकला।
व्यक्तिगत और आर्थिक संकट का एक साथ सामना
दत्ता ने बताया कि उन्होंने संबंधित लोगों को सूचित किया था कि उनके पिता का निधन हो गया है और वे जीवन के मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'अगर मुझे समय पर मेरा मेहनताना मिल जाता, तो उस मुश्किल घड़ी में कुछ राहत मिल जाती। लेकिन परिस्थितियां नहीं बदलीं और पेमेंट का इंतजार जारी रहा। आर्थिक परेशानी और पारिवारिक दुख एक साथ झेलना मेरे लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। मैं मानसिक रूप से टूटने लगा था।'
इंडस्ट्री के नियम और कलाकारों के अधिकार
पलाश दत्ता सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) के लंबे समय से सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री के नियमों के अनुसार किसी भी कलाकार को शूटिंग शुरू करने से पहले एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर लेने चाहिए, ताकि भविष्य में विवाद न हो। उन्होंने स्वीकार किया, 'मैंने प्रोडक्शन टीम के भरोसे और आश्वासनों पर विश्वास किया और काम जारी रखा' — एक ऐसी भूल जिसकी कीमत उन्हें चुकानी पड़ी।
गौरतलब है कि पेमेंट विवाद इंडस्ट्री में नई बात नहीं है। सिंटा जैसे संगठन वर्षों से कलाकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन अनुबंध के बिना काम करने की प्रवृत्ति अभी भी कई कलाकारों को कमज़ोर स्थिति में छोड़ देती है।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर
दत्ता ने कहा, 'एक कलाकार के तौर पर मैं हमेशा अपने काम को पूरी जिम्मेदारी के साथ करते रहा हूं। काम के सिलसिले में एक जगह से दूसरी जगह जाना, पर्सनल लाइफ के सुनहरे पलों का त्याग करना और हर प्रोफेशनल कमिटमेंट्स को निभाना मेरे काम का हमेशा हिस्सा रहा है। लेकिन जब काम पूरा करने के बाद भी पेमेंट में लगातार देरी होती है, तो यह स्थिति बेहद निराशाजनक हो जाती है।' उन्होंने जोड़ा कि ऐसी परिस्थितियां किसी भी कलाकार को भावनात्मक रूप से थका देती हैं और उसे यह महसूस कराती हैं कि उसकी मेहनत की कद्र नहीं की जा रही।
आगे की राह
पलाश दत्ता का यह खुलासा इंडस्ट्री में पारदर्शिता और समय पर भुगतान की मांग को एक बार फिर केंद्र में ले आता है। यह देखना बाकी है कि सिंटा और संबंधित प्रोडक्शन पक्ष इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं।