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'कृष्णावतारम' में सत्यभामा बनीं संस्कृति जयना: 'यह पौराणिक कथा नहीं, हमारा इतिहास है'

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'कृष्णावतारम' में सत्यभामा बनीं संस्कृति जयना: 'यह पौराणिक कथा नहीं, हमारा इतिहास है'

सारांश

'कृष्णावतारम' में सत्यभामा बनीं संस्कृति जयना का कहना है कि यह फिल्म पौराणिक नहीं, ऐतिहासिक दृष्टिकोण से बनी है। नरकासुर वध और छोटी दिवाली के अनसुने प्रसंग समेत यह फिल्म आज की पीढ़ी को उनकी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास है।

मुख्य बातें

अभिनेत्री संस्कृति जयना ने फिल्म 'कृष्णावतारम' में सत्यभामा का किरदार निभाया है।
फिल्म की कहानी सत्यभामा के दृष्टिकोण से बुनी गई है और इसमें भगवान कृष्ण, राधा रानी व रुक्मिणी के रिश्तों को भी दर्शाया गया है।
संस्कृति ने बताया कि नरकासुर वध की कहानी — जिससे छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी) की परंपरा जुड़ी है — आज की पीढ़ी के लिए लगभग अनजान है।
अभिनेत्री ने इन कहानियों को 'पौराणिक कथा' नहीं, बल्कि 'इतिहास' कहा और द्वारका के सबूतों का हवाला दिया।
उनके अनुसार सत्यभामा का साहसी और सत्यनिष्ठ चरित्र आज की महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है।

अभिनेत्री संस्कृति जयना इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म 'कृष्णावतारम' को लेकर चर्चा में हैं। इस पौराणिक-ऐतिहासिक फिल्म में उन्होंने सत्यभामा का किरदार निभाया है और फिल्म की पूरी कहानी इसी दृष्टिकोण से बुनी गई है। संस्कृति का कहना है कि यह फिल्म उन कहानियों को सामने लाती है जो आज की पीढ़ी के लिए लगभग अनसुनी हो चुकी हैं।

सत्यभामा के नजरिए से कृष्ण-कथा

संस्कृति जयना ने बताया, 'फिल्म में कई ऐसी कहानियाँ और प्रसंग शामिल किए गए हैं, जिनके बारे में शायद आम लोगों को भगवान कृष्ण के संदर्भ में जानकारी न हो। सत्यभामा भी भगवान श्री कृष्ण के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं।' उन्होंने जोड़ा कि इस फिल्म के माध्यम से दर्शक भगवान कृष्ण, राधा रानी और रुक्मिणी जी के बीच के गहरे रिश्तों को भी एक नए नजरिए से देख पाएँगे।

छोटी दिवाली का ऐतिहासिक संदर्भ

अभिनेत्री ने नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली के ऐतिहासिक पक्ष पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, 'आज बहुत कम लोग जानते हैं कि भगवान श्री कृष्ण और सत्यभामा ने मिलकर अत्याचारी असुर नरकासुर का वध किया था, जिसकी खुशी में हम हर साल छोटी दिवाली मनाते हैं। ये ऐसी अनसुनी कहानियाँ हैं जो आज की पीढ़ी को शायद नहीं पता।' उनके अनुसार यह फिल्म युवाओं को उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से फिर से जोड़ने का एक प्रयास है।

इतिहास और पौराणिक कथा का अंतर

जब उनसे पूछा गया कि क्या आज का सिनेमा अपनी जड़ों और आध्यात्मिकता से दूर हो रहा है, तो संस्कृति ने सीधे जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'मैं पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर टिप्पणी नहीं कर सकती, लेकिन हम अपनी फिल्म के ज़रिए लोगों को संस्कृति और गौरवशाली इतिहास से फिर से जोड़ने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया, 'व्यक्तिगत रूप से मुझे इन कहानियों को 'पौराणिक कथाएँ' कहना पसंद नहीं, क्योंकि हमारे लिए यह इतिहास है। हमारे पास द्वारका जैसी जगहों के सबूत मौजूद हैं।'

सत्यभामा से व्यक्तिगत जुड़ाव

संस्कृति ने अपने किरदार के साथ गहरे भावनात्मक जुड़ाव की बात भी साझा की। उन्होंने कहा, 'सत्यभामा बहुत ही सरल स्वभाव की थीं और अपनी भावनाओं को जाहिर करने से कभी नहीं डरती थीं। वह बहुत साहसी थीं और हमेशा सच के साथ खड़ी रहती थीं — असल में, इसी वजह से उन्हें 'सत्यभामा' नाम मिला था।'

उन्होंने यह भी कहा कि आज की महिलाएँ सत्यभामा की इस यात्रा से विशेष रूप से जुड़ाव महसूस कर सकती हैं। 'वे भी अपनी हिम्मत और अपनी आवाज़ को ढूँढने की कोशिश कर रही हैं — सत्यभामा उसी ताकत और हिम्मत की प्रतीक थीं।' फिल्म 'कृष्णावतारम' के ज़रिए संस्कृति जयना का यह प्रयास भारतीय दर्शकों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से एक नई दृष्टि से परिचित कराने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक बड़े सांस्कृतिक विमर्श को छूता है जो बॉलीवुड में तेज़ी से उभर रहा है। 'आदिपुरुष' जैसी फिल्मों की आलोचना के बाद निर्माता अब सांस्कृतिक प्रामाणिकता को विपणन का केंद्र बना रहे हैं। हालाँकि, 'इतिहास बनाम मिथक' की यह बहस अकादमिक जगत में अभी भी अनसुलझी है और फिल्म का दावा पुरातात्विक साक्ष्यों की व्याख्या पर निर्भर करता है। असली सवाल यह है कि क्या यह फिल्म दर्शकों को विरासत से जोड़ती है या एक विशेष ऐतिहासिक दृष्टिकोण को स्थापित करने की कोशिश करती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिल्म 'कृष्णावतारम' में संस्कृति जयना ने कौन-सा किरदार निभाया है?
संस्कृति जयना ने 'कृष्णावतारम' में भगवान कृष्ण की पत्नी सत्यभामा का किरदार निभाया है। फिल्म की पूरी कहानी सत्यभामा के नजरिए से बुनी गई है और इसमें कृष्ण, राधा रानी व रुक्मिणी के रिश्तों को भी दर्शाया गया है।
छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी) का 'कृष्णावतारम' से क्या संबंध है?
फिल्म में नरकासुर वध के प्रसंग को दिखाया गया है — मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण और सत्यभामा ने मिलकर अत्याचारी असुर नरकासुर का वध किया था, जिसकी खुशी में छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। संस्कृति जयना के अनुसार यह आज की पीढ़ी के लिए एक अनसुना प्रसंग है।
संस्कृति जयना ने इन कहानियों को 'पौराणिक कथा' क्यों नहीं माना?
संस्कृति जयना का कहना है कि उनके लिए कृष्ण से जुड़ी कहानियाँ पौराणिक कथाएँ नहीं बल्कि इतिहास हैं। उन्होंने द्वारका जैसी जगहों के पुरातात्विक सबूतों का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय विरासत के इन पहलुओं को ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाना चाहिए।
सत्यभामा के किरदार से संस्कृति जयना का व्यक्तिगत जुड़ाव क्यों है?
संस्कृति जयना का कहना है कि सत्यभामा का साहसी, सत्यनिष्ठ और भावनात्मक रूप से खुलकर जीने वाला स्वभाव उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रेरित करता है। उनके अनुसार आज की महिलाएँ भी अपनी आवाज़ और हिम्मत खोज रही हैं, और सत्यभामा उसी ताकत की प्रतीक हैं।
'कृष्णावतारम' फिल्म किस दृष्टिकोण से बनाई गई है?
'कृष्णावतारम' एक पौराणिक-ऐतिहासिक फिल्म है जिसे सत्यभामा के नजरिए से बनाया गया है। इसमें भगवान कृष्ण के जीवन के कम-ज्ञात प्रसंग, जैसे नरकासुर वध, को केंद्र में रखा गया है और फिल्म का उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना बताया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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