26 जुलाई 2026
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के. एस. चित्रा: टीचर बनने का सपना, किस्मत ने बनाया 'केरल की कोकिला'

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के. एस. चित्रा: टीचर बनने का सपना, किस्मत ने बनाया 'केरल की कोकिला'

सारांश

संगीत की टीचर बनने का सपना देखने वाली के. एस. चित्रा को किस्मत ने 'केरल की कोकिला' बना दिया। 27 जुलाई 1963 को जन्मीं चित्रा ने चार दशकों में छह राष्ट्रीय पुरस्कार, पद्म भूषण और हज़ारों गीतों से भारतीय संगीत को समृद्ध किया।

मुख्य बातें

चित्रा का जन्म 27 जुलाई 1963 को तिरुवनंतपुरम, केरल में हुआ; मूल सपना संगीत शिक्षिका बनने का था।
1978–1984 के बीच भारत सरकार की नेशनल टैलेंट सर्च स्कॉलरशिप से सम्मानित।
1982 में फिल्म 'केलकथा शब्दम' से प्लेबैक सिंगिंग करियर की शुरुआत।
मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी सहित कई भाषाओं में हज़ारों गाने ; 6 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार ।
भारत सरकार ने 2005 में पद्म श्री और 2021 में पद्म भूषण से नवाज़ा।
जरूरतमंद संगीतकारों के लिए 'स्नेहानंदना ट्रस्ट' की स्थापना।

गायिका के. एस. चित्रा का जीवन इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा को किसी एक रास्ते की ज़रूरत नहीं होती — रास्ते खुद उसे ढूंढ लेते हैं। चार दशकों से अधिक के करियर में उन्होंने हज़ारों गीत गाए, छह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते और भारत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में अपनी जगह बनाई — जबकि उनका मूल सपना संगीत की शिक्षिका बनने का था।

तिरुवनंतपुरम से शुरू हुई संगीत की यात्रा

के. एस. चित्रा का जन्म 27 जुलाई 1963 को केरल के तिरुवनंतपुरम में हुआ। उनके पिता कृष्णन नायर स्कूल शिक्षक और संगीत-प्रेमी थे, जबकि माँ शांताकुमारी स्वयं संगीत शिक्षिका थीं। इस तरह घर की दीवारें बचपन से ही सुरों में रंगी हुई थीं। पिता ने बचपन में ही चित्रा की आवाज़ की असाधारण क्षमता को पहचान लिया और उन्हें संगीत की विधिवत शिक्षा दिलाई।

चित्रा ने तिरुवनंतपुरम के एक स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा पूरी की और फिर संगीत में स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान उनका इरादा गायिका बनने का नहीं था — वे बच्चों को संगीत सिखाना चाहती थीं और इसी क्षेत्र में करियर बनाने की योजना थी। लेकिन उनके शिक्षकों और परिवार ने उनकी आवाज़ की असाधारणता को समझा और उन्हें प्रदर्शन की दुनिया की ओर प्रोत्साहित किया।

राष्ट्रीय प्रतिभा छात्रवृत्ति और पहला बड़ा मौका

1978 से 1984 के बीच चित्रा को भारत सरकार की प्रतिष्ठित नेशनल टैलेंट सर्च स्कॉलरशिप प्राप्त हुई, जिसने उनके संगीत सफर को संस्थागत मान्यता और आर्थिक आधार दिया। फिल्मी दुनिया में पहली बड़ी दस्तक मलयालम संगीतकार एम. जी. राधाकृष्णन ने दिलाई, जिन्होंने 1979 में उनकी आवाज़ रिकॉर्ड की। 1982 में आई मलयालम फिल्म 'केलकथा शब्दम' से उनके प्लेबैक सिंगिंग करियर की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है।

भाषाओं की सीमाएँ लाँघती आवाज़

एक बार फिल्मी करियर की नींव पड़ने के बाद चित्रा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी सहित कई भाषाओं में हज़ारों गाने गाए। संगीतकार ए. आर. रहमान, इलैयाराजा और एम. एम. कीरवानी जैसे दिग्गजों के साथ उनके सहयोग ने उन्हें पूरे उपमहाद्वीप में पहचान दिलाई। हिंदी सिनेमा में फिल्म 'बॉम्बे' का गीत 'कहना ही क्या' आज भी श्रोताओं की स्मृति में ताज़ा है। उनकी सुरीली आवाज़ और भावप्रवण गायकी ने उन्हें 'केरल की कोकिला' और 'लिटिल नाइटिंगेल ऑफ इंडिया' जैसे उपाधियाँ दिलाईं।

पुरस्कार और उपलब्धियाँ

चित्रा के नाम छह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दर्ज हैं — एक रिकॉर्ड जो उनकी निरंतर उत्कृष्टता का प्रमाण है। इसके अलावा उन्हें अनेक फिल्मफेयर पुरस्कार और विभिन्न राज्य सरकारों के सम्मान मिले। भारत सरकार ने उन्हें 2005 में पद्म श्री और 2021 में पद्म भूषण से नवाज़ा। 2001 में उन्होंने लंदन के प्रतिष्ठित रॉयल अल्बर्ट हॉल में प्रस्तुति देकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी छाप छोड़ी।

संगीत से परे: समाजसेवा का संकल्प

चित्रा ने जरूरतमंद और सेवानिवृत्त संगीतकारों की मदद के लिए 'स्नेहानंदना ट्रस्ट' की स्थापना की। यह पहल उनके उस विनम्र स्वभाव की झलक है जिसके लिए वे उतनी ही जानी जाती हैं जितनी अपनी आवाज़ के लिए। गौरतलब है कि जो महिला एक बार कक्षा में बच्चों को सुर सिखाना चाहती थीं, उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी में करोड़ों लोगों को संगीत का अनुभव दिया — बस मंच अलग था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

के. एस. चित्रा कौन हैं और वे किस लिए जानी जाती हैं?
के. एस. चित्रा भारत की सबसे सम्मानित पार्श्वगायिकाओं में से एक हैं, जिन्होंने मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी सहित कई भाषाओं में हज़ारों गाने गाए हैं। उन्हें 'केरल की कोकिला' और 'लिटिल नाइटिंगेल ऑफ इंडिया' जैसी उपाधियों से नवाज़ा गया है।
के. एस. चित्रा का जन्म कब और कहाँ हुआ?
के. एस. चित्रा का जन्म 27 जुलाई 1963 को केरल के तिरुवनंतपुरम में हुआ। उनके पिता कृष्णन नायर स्कूल शिक्षक और संगीत-प्रेमी थे, जबकि माँ शांताकुमारी संगीत शिक्षिका थीं।
के. एस. चित्रा का फिल्मी करियर कब शुरू हुआ?
1979 में संगीतकार एम. जी. राधाकृष्णन ने उनकी आवाज़ पहली बार रिकॉर्ड की। 1982 में आई मलयालम फिल्म 'केलकथा शब्दम' से उनके प्लेबैक सिंगिंग करियर की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है।
के. एस. चित्रा को कौन-कौन से बड़े पुरस्कार मिले हैं?
चित्रा को छह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, अनेक फिल्मफेयर पुरस्कार और राज्य सरकारों के सम्मान मिले हैं। भारत सरकार ने उन्हें 2005 में पद्म श्री और 2021 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।
के. एस. चित्रा का 'स्नेहानंदना ट्रस्ट' क्या है?
'स्नेहानंदना ट्रस्ट' चित्रा द्वारा स्थापित एक सामाजिक संगठन है जो जरूरतमंद और सेवानिवृत्त संगीतकारों की मदद करता है। यह उनके संगीत-समुदाय के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
राष्ट्र प्रेस
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