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'लगान' के 'घनन घनन' गाने की शूटिंग: राजू खान ने बताया करियर का सबसे मुश्किल अनुभव

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'लगान' के 'घनन घनन' गाने की शूटिंग: राजू खान ने बताया करियर का सबसे मुश्किल अनुभव

सारांश

'घनन घनन' सिर्फ एक गाना नहीं था — यह 40 मिनट की रोशनी, रातों-रात की प्लानिंग और तेज धूप में बादलों का भ्रम पैदा करने की जद्दोजहद थी। राजू खान की यह दास्तान बताती है कि कालजयी सिनेमा के पीछे कितनी अदृश्य मेहनत छिपी होती है।

मुख्य बातें

कोरियोग्राफर राजू खान ने 'लगान' के 'घनन घनन' गाने को अपने करियर का सबसे कठिन शूट बताया।
सेट देखने के अगले ही दिन शूटिंग शुरू हुई — पूरी प्लानिंग रातों-रात करनी पड़ी।
शूटिंग के दौरान आसमान में बादल नहीं, तेज धूप थी, जिससे परछाइयाँ छिपाना बड़ी चुनौती बन गई।
गाने के दूसरे हिस्से की शूटिंग सूर्यास्त के महज 40-45 मिनट की प्राकृतिक रोशनी में की गई।
फिल्म का निर्देशन आशुतोष गोवारिकर ने किया था; मुख्य भूमिकाओं में आमिर खान और ग्रेसी सिंह थे।

हिंदी सिनेमा की कालजयी फिल्मों में शुमार 'लगान' का गाना 'घनन घनन' आज भी दर्शकों के दिलों में ताज़ा है, लेकिन इस गाने की शूटिंग के पीछे की कहानी उतनी ही दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण है। दिवंगत कोरियोग्राफर सरोज खान के बेटे और फिल्म की कोरियोग्राफी टीम के सदस्य राजू खान ने हाल ही में इस गाने से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि सीमित समय, प्रतिकूल मौसम और विशाल सेट के कारण यह उनके करियर का सबसे कठिन शूट साबित हुआ।

पहले दिन की तैयारी और पहला शॉट

राजू खान के अनुसार, जब उन्हें इस गाने की जिम्मेदारी सौंपी गई, तब तैयारी के लिए बेहद कम वक्त था। उन्होंने बताया, 'जब मुझे इस गाने पर काम करने की जिम्मेदारी मिली, तब तैयारी के लिए बहुत कम समय था।' सेट देखने के अगले ही दिन शूटिंग शुरू होनी थी। पहले दिन वह दृश्य फिल्माया गया जिसमें आमिर खान की माँ यशोदा कुएं से पानी निकालने की कोशिश करती हैं, लेकिन कुआँ सूखा निकलता है और वह आसमान की ओर देखकर बारिश की उम्मीद करती हैं।

राजू खान ने आगे बताया, 'उसी दिन मुझे सेट का निरीक्षण करने के लिए भेजा गया। वहाँ मैंने फिल्म के कलाकारों से मुलाकात की। इसी दौरान मैंने पहली बार 'घनन घनन' गीत सुना और मुझे बताया गया कि इसमें सभी कलाकार शामिल होंगे। ऐसे में पूरी प्लानिंग रातों-रात करनी पड़ी और अगले दिन काम शुरू कर दिया गया।'

मौसम की मार और तकनीकी चुनौतियाँ

राजू खान ने बताया कि असली मुश्किलें गाने के दूसरे हिस्से में सामने आईं। गाने में लंबे सूखे के बाद आसमान में बादल छाने और गाँव वालों में बारिश की उम्मीद जागने का दृश्य दिखाना था, लेकिन शूटिंग के दौरान आसमान में बादल नहीं, बल्कि तेज धूप थी। उन्होंने कहा, 'इतने बड़े सेट पर बादलों से घिरा माहौल दिखाना लगभग असंभव लग रहा था। साथ ही धूप की वजह से पड़ने वाली परछाइयों को भी कैमरे में आने से रोकना था।'

यह ऐसे समय में था जब डिजिटल विजुअल इफेक्ट्स आज जितने सुलभ नहीं थे, इसलिए हर समस्या का हल सेट पर ही खोजना पड़ता था।

सूर्यास्त की रोशनी में निकला हल

इस चुनौती से पार पाने के लिए टीम ने सोच-समझकर रणनीति बनाई। राजू खान के अनुसार, कई शॉट सीमित क्षेत्रों में फिल्माए गए ताकि सेट का पूरा हिस्सा एक साथ न दिखे। कैमरे के एंगल इस तरह चुने गए कि जमीन पर पड़ रही परछाइयाँ नज़र न आएं।

उन्होंने बताया, 'जब सूरज लगभग डूब जाता था और केवल 40 से 45 मिनट की प्राकृतिक रोशनी बचती थी, तब टीम तेजी से शूटिंग करती थी। उस समय परछाइयाँ काफी कम हो जाती थीं, जिससे बादलों वाला माहौल दिखाना आसान हो जाता था।' गाने के दूसरे हिस्से की अधिकांश शूटिंग इसी सूर्यास्त की बेला में की गई।

फिल्म और टीम के बारे में

गौरतलब है कि 'लगान' का निर्देशन आशुतोष गोवारिकर ने किया था। फिल्म में आमिर खान, ग्रेसी सिंह, रेचल शेली और पॉल ब्लैकथॉर्न ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाई थीं। यह फिल्म ऑस्कर में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि भी रही थी और हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में आज भी इसकी गिनती होती है।

राजू खान ने इस अनुभव को याद करते हुए कहा, 'तकनीकी और रचनात्मक दोनों स्तरों पर यह मेरे लिए एक बड़ी परीक्षा थी।' उनकी यह साझा की गई यादें 'घनन घनन' जैसे कालजयी गानों के पीछे की मेहनत और जुनून को नए सिरे से उजागर करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

धैर्य और रचनात्मकता काम आती थी। राजू खान का यह किस्सा सिर्फ एक गाने की मुश्किलों का बयान नहीं, बल्कि यह भी बताता है कि दिवंगत सरोज खान की विरासत उनके परिवार में किस तरह जीवित है। यह भी उल्लेखनीय है कि 'लगान' जैसी फिल्में आज भी युवा फिल्मकारों और कोरियोग्राफरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं — और ऐसे किस्से उस विरासत को और गहरा करते हैं।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'लगान' के 'घनन घनन' गाने की शूटिंग इतनी मुश्किल क्यों थी?
राजू खान के अनुसार, शूटिंग के दौरान आसमान में बादल नहीं बल्कि तेज धूप थी, जबकि गाने में बादल छाने का दृश्य दिखाना था। इसके अलावा सेट देखने के अगले ही दिन शूटिंग शुरू हुई, जिससे तैयारी के लिए बेहद कम समय मिला।
राजू खान ने धूप और परछाइयों की समस्या कैसे सुलझाई?
टीम ने सूर्यास्त के समय की केवल 40 से 45 मिनट की प्राकृतिक रोशनी का उपयोग किया, जब परछाइयाँ कम होती थीं। कैमरे के एंगल और सीमित क्षेत्रों में शूटिंग करके बादलों वाला माहौल तैयार किया गया।
राजू खान कौन हैं और 'लगान' से उनका क्या संबंध है?
राजू खान दिवंगत प्रसिद्ध कोरियोग्राफर सरोज खान के बेटे हैं और 'लगान' की कोरियोग्राफी टीम का हिस्सा थे। उन्होंने 'घनन घनन' गाने की कोरियोग्राफी में अहम भूमिका निभाई थी।
'लगान' फिल्म में कौन-कौन से कलाकार थे?
'लगान' में आमिर खान, ग्रेसी सिंह, रेचल शेली और पॉल ब्लैकथॉर्न ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाई थीं। फिल्म का निर्देशन आशुतोष गोवारिकर ने किया था।
क्या 'घनन घनन' गाने की शूटिंग एक ही दिन में पूरी हुई थी?
नहीं, गाने की शूटिंग कई दिनों में हुई। पहले दिन कुएं वाला दृश्य फिल्माया गया, जबकि दूसरे हिस्से की अधिकांश शूटिंग सूर्यास्त के सीमित समय में अलग-अलग दिनों में की गई।
राष्ट्र प्रेस
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