'लगान' के 'घनन घनन' गाने की शूटिंग: राजू खान ने बताया करियर का सबसे मुश्किल अनुभव
सारांश
मुख्य बातें
हिंदी सिनेमा की कालजयी फिल्मों में शुमार 'लगान' का गाना 'घनन घनन' आज भी दर्शकों के दिलों में ताज़ा है, लेकिन इस गाने की शूटिंग के पीछे की कहानी उतनी ही दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण है। दिवंगत कोरियोग्राफर सरोज खान के बेटे और फिल्म की कोरियोग्राफी टीम के सदस्य राजू खान ने हाल ही में इस गाने से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि सीमित समय, प्रतिकूल मौसम और विशाल सेट के कारण यह उनके करियर का सबसे कठिन शूट साबित हुआ।
पहले दिन की तैयारी और पहला शॉट
राजू खान के अनुसार, जब उन्हें इस गाने की जिम्मेदारी सौंपी गई, तब तैयारी के लिए बेहद कम वक्त था। उन्होंने बताया, 'जब मुझे इस गाने पर काम करने की जिम्मेदारी मिली, तब तैयारी के लिए बहुत कम समय था।' सेट देखने के अगले ही दिन शूटिंग शुरू होनी थी। पहले दिन वह दृश्य फिल्माया गया जिसमें आमिर खान की माँ यशोदा कुएं से पानी निकालने की कोशिश करती हैं, लेकिन कुआँ सूखा निकलता है और वह आसमान की ओर देखकर बारिश की उम्मीद करती हैं।
राजू खान ने आगे बताया, 'उसी दिन मुझे सेट का निरीक्षण करने के लिए भेजा गया। वहाँ मैंने फिल्म के कलाकारों से मुलाकात की। इसी दौरान मैंने पहली बार 'घनन घनन' गीत सुना और मुझे बताया गया कि इसमें सभी कलाकार शामिल होंगे। ऐसे में पूरी प्लानिंग रातों-रात करनी पड़ी और अगले दिन काम शुरू कर दिया गया।'
मौसम की मार और तकनीकी चुनौतियाँ
राजू खान ने बताया कि असली मुश्किलें गाने के दूसरे हिस्से में सामने आईं। गाने में लंबे सूखे के बाद आसमान में बादल छाने और गाँव वालों में बारिश की उम्मीद जागने का दृश्य दिखाना था, लेकिन शूटिंग के दौरान आसमान में बादल नहीं, बल्कि तेज धूप थी। उन्होंने कहा, 'इतने बड़े सेट पर बादलों से घिरा माहौल दिखाना लगभग असंभव लग रहा था। साथ ही धूप की वजह से पड़ने वाली परछाइयों को भी कैमरे में आने से रोकना था।'
यह ऐसे समय में था जब डिजिटल विजुअल इफेक्ट्स आज जितने सुलभ नहीं थे, इसलिए हर समस्या का हल सेट पर ही खोजना पड़ता था।
सूर्यास्त की रोशनी में निकला हल
इस चुनौती से पार पाने के लिए टीम ने सोच-समझकर रणनीति बनाई। राजू खान के अनुसार, कई शॉट सीमित क्षेत्रों में फिल्माए गए ताकि सेट का पूरा हिस्सा एक साथ न दिखे। कैमरे के एंगल इस तरह चुने गए कि जमीन पर पड़ रही परछाइयाँ नज़र न आएं।
उन्होंने बताया, 'जब सूरज लगभग डूब जाता था और केवल 40 से 45 मिनट की प्राकृतिक रोशनी बचती थी, तब टीम तेजी से शूटिंग करती थी। उस समय परछाइयाँ काफी कम हो जाती थीं, जिससे बादलों वाला माहौल दिखाना आसान हो जाता था।' गाने के दूसरे हिस्से की अधिकांश शूटिंग इसी सूर्यास्त की बेला में की गई।
फिल्म और टीम के बारे में
गौरतलब है कि 'लगान' का निर्देशन आशुतोष गोवारिकर ने किया था। फिल्म में आमिर खान, ग्रेसी सिंह, रेचल शेली और पॉल ब्लैकथॉर्न ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाई थीं। यह फिल्म ऑस्कर में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि भी रही थी और हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में आज भी इसकी गिनती होती है।
राजू खान ने इस अनुभव को याद करते हुए कहा, 'तकनीकी और रचनात्मक दोनों स्तरों पर यह मेरे लिए एक बड़ी परीक्षा थी।' उनकी यह साझा की गई यादें 'घनन घनन' जैसे कालजयी गानों के पीछे की मेहनत और जुनून को नए सिरे से उजागर करती हैं।