'लगान' के 25 साल: पॉल ब्लैकथॉर्न बोले — 'गुजरात में शराब न मिलना था सबसे बड़ा झटका'
सारांश
मुख्य बातें
ब्रिटिश अभिनेता पॉल ब्लैकथॉर्न, जिन्होंने आमिर खान की क्लासिक फिल्म 'लगान' में खलनायक कैप्टन एंड्रयू रसेल का किरदार निभाया था, ने फिल्म की 25वीं वर्षगाँठ के अवसर पर भारत में शूटिंग के दौरान के कई अनोखे और मज़ेदार अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने खुलासा किया कि गुजरात में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध उनकी पूरी ब्रिटिश टीम के लिए सबसे बड़ा सांस्कृतिक झटका साबित हुआ।
गुजरात में शराब का 'झटका'
पॉल ब्लैकथॉर्न ने बताया, 'हम ब्रिटिश लोगों का सबसे पहला सवाल यही होता था कि शराब कहाँ मिलेगी। गुजरात में इसकी बिक्री नहीं होती थी, इसलिए शनिवार की रात जश्न मनाने के लिए हमें अलग-अलग जगहों से शराब का इंतज़ाम करना पड़ता था। यह अनुभव हमारे लिए बिल्कुल नया था, क्योंकि हम ऐसे माहौल के आदी नहीं थे।' उनके इस बयान में हास्य था, लेकिन यह भारतीय राज्यों की विविध सामाजिक-सांस्कृतिक नीतियों से एक विदेशी कलाकार की पहली मुलाकात का सच्चा चित्रण भी था।
भुज की चिलचिलाती धूप और टीम की एकजुटता
पॉल ने भुज में शूटिंग के अनुभव को याद करते हुए कहा, 'भुज शहर में शूटिंग करना आसान नहीं था। वहाँ मौसम बेहद गर्म और सूखा रहता था। तेज़ धूप और गर्म हवाओं के बीच घंटों शूटिंग करनी पड़ती थी।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद पूरी टीम ने एक परिवार की तरह मिलकर काम किया और सभी कलाकारों ने मुश्किल हालात में भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया।
आमिर खान और 'बस छूटने' का किस्सा
जब पॉल से पूछा गया कि क्या उन्हें वह घटना याद है जब आमिर खान शूटिंग के दौरान एक बार बस छूट जाने की वजह से पीछे रह गए थे, तो उन्होंने कहा, 'मुझे यह किस्सा याद नहीं है। अगर ऐसा हुआ भी होगा तो ज़रूर कोई ज़रूरी वजह रही होगी।' उन्होंने आमिर की दोहरी भूमिका — अभिनेता और निर्माता — का उल्लेख करते हुए कहा कि उन पर कई तरह की ज़िम्मेदारियाँ थीं, इसलिए अगर वे कभी देर से पहुँचे होंगे तो उसके पीछे कोई कारण ज़रूर रहा होगा।
फिल्म 'लगान' की विरासत
'लगान' हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में से एक है जिसने न केवल बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई, बल्कि ऑस्कर में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। फिल्म की कहानी औपनिवेशिक काल में एक गाँव के किसानों और ब्रिटिश अफसरों के बीच क्रिकेट मैच की शर्त पर केंद्रित है — यदि गाँव वाले जीत जाते हैं तो उन्हें लगान (कर) नहीं देना होगा। कैप्टन एंड्रयू रसेल के रूप में पॉल का किरदार इस कहानी का केंद्रीय प्रतिपक्षी था, जिसे दर्शकों ने आज भी याद रखा है।
'लगान' की 25वीं वर्षगाँठ का महत्व
25 साल बाद भी 'लगान' की प्रासंगिकता बरकरार है। यह फिल्म भारतीय दर्शकों की सामूहिक स्मृति का हिस्सा बन चुकी है। पॉल ब्लैकथॉर्न जैसे अंतरराष्ट्रीय कलाकारों का इस फिल्म से जुड़ाव और उनके अनुभव यह दर्शाते हैं कि 'लगान' केवल एक भारतीय फिल्म नहीं, बल्कि एक वैश्विक सिनेमाई अनुभव था। आने वाले समय में इस फिल्म की विरासत और भी गहरी होती जाएगी।