तमिल सिनेमा के ट्रेंडसेटर निर्देशक भारतीराजा का 84 वर्ष की आयु में निधन
सारांश
मुख्य बातें
तमिल सिनेमा के दिग्गज और ट्रेंडसेटर निर्देशक भारतीराजा का बुधवार, 10 जून 2026 को निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे और लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके जाने की खबर से पूरी तमिल फिल्म इंडस्ट्री शोक में डूब गई है।
ग्रामीण जीवन के अद्वितीय चितेरे
भारतीराजा ने अपनी फिल्मों के ज़रिए तमिलनाडु के गाँवों की असली ज़िंदगी को बेहद संवेदनशीलता और सच्चाई के साथ परदे पर उतारा। उनकी फिल्मों में ग्रामीण संस्कृति, मानवीय रिश्ते और सामाजिक मुद्दे प्रमुखता से नज़र आते थे। उनकी फिल्मों की शुरुआत में गूँजने वाले शब्द 'एन इनिया तमिल मक्कले…' आज भी तमिलनाडु के लोगों के दिलों में बसे हैं।
करियर और उल्लेखनीय फिल्में
भारतीराजा का जन्म 17 जुलाई 1941 को तमिलनाडु के थेनी जिले के अल्ली नगरम गाँव में हुआ था। उनके माता-पिता का नाम पेरिया मायाथेवर और मीनाक्षी अम्मल था। उनका असली नाम चिन्नासामी था, किंतु वह भारतीराजा के नाम से विश्वविख्यात हुए।
साधारण पृष्ठभूमि से उठकर उन्होंने अपने दम पर फिल्म जगत में एक अलग पहचान बनाई। अपने करियर में उन्होंने लगभग 44 फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी पहली फिल्म '16 वायथिनिले' ने तमिल सिनेमा में एक नई क्रांति का सूत्रपात किया — इस फिल्म में कमल हासन, रजनीकांत और श्रीदेवी जैसे दिग्गज कलाकार नज़र आए थे। इस फिल्म के लिए उन्हें तमिलनाडु सरकार का सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
उनकी कालजयी फिल्मों में 'मुधल मरियाधई', 'मन वासनाई', 'पुधुमई पेन', 'वेदम पुधिथु', 'किझाक्कु चीमईइले', 'करुथम्मा' और 'नाडोड़ी थेंड्रल' शामिल हैं, जो आज भी क्लासिक का दर्जा रखती हैं।
नए प्रतिभाओं के पारखी और अभिनेता
भारतीराजा नए कलाकारों और प्रतिभाओं को पहचानने में माहिर थे — तमिल सिनेमा के कई बड़े नामों को पहला मौका उन्होंने ही दिया था। निर्देशन के अलावा वह एक सशक्त अभिनेता भी थे। उन्होंने अभिनय की शुरुआत फिल्म 'कल्लुक्कुल ईरम' से की थी। इसके बाद 'निजलगल', 'धावनी कनवुगल', 'इधायम', 'आयुधा एझुथु', 'पांडिया नाडु', 'सीताकाधी', 'मानाडु', 'ईश्वरन' और 'थिरुचित्रंबलम' सहित अनेक फिल्मों में उनकी अभिनय प्रतिभा देखने को मिली।
फिल्म जगत की श्रद्धांजलि
उनके निधन पर फिल्म जगत की अनेक हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। अभिनेत्री खुशबू सुंदर ने सोशल मीडिया पर शोक जताते हुए कहा, 'भारतीराजा का जाना तमिल सिनेमा के लिए बहुत बड़ी क्षति है। उनकी फिल्में फिल्म निर्माण की असली पाठशाला हैं और आने वाली पीढ़ियाँ उनसे सीखती रहेंगी। वह हमेशा मेरे साथ एक फिल्म बनाने की बात करते थे, लेकिन अब यह सपना अधूरा रह गया।'
गौरतलब है कि भारतीराजा वह निर्देशक थे जिन्होंने तमिल सिनेमा को शहरी चकाचौंध से निकालकर ज़मीन से जोड़ा। उनका जाना एक ऐसे युग का अंत है जो तमिल फिल्मों की आत्मा को परिभाषित करता था।