भारतीराजा को PM मोदी की श्रद्धांजलि: 'तमिल सिनेमा को नई पहचान देने वाले महान फिल्मकार'
सारांश
मुख्य बातें
तमिल सिनेमा के महान निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक भारतीराजा के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार, 11 जून को गहरा शोक व्यक्त किया। मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर भारतीराजा के अतुलनीय योगदान को याद किया और उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट कीं। चेन्नई में बुधवार को 84 वर्ष की आयु में निधन के बाद से फिल्म जगत और राजनीति दोनों में शोक की लहर है।
PM मोदी का भावुक संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, 'थिरु भारतीराजा का निधन बेहद दुखद है। वह सिनेमा की दुनिया का एक बड़ा नाम थे, जिनके काम ने तमिल सिनेमा को नई पहचान दी। खास तौर पर, उन्होंने ग्रामीण जीवन को सच्चाई के साथ पर्दे पर उतारा।' उन्होंने आगे लिखा, 'इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और चाहने वालों के साथ हैं। ओम शांति।'
गौरतलब है कि भारतीराजा को तमिल सिनेमा में ग्रामीण यथार्थवाद का पुरोधा माना जाता था। उनकी फिल्में केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक दस्तावेज़ थीं।
लंबी बीमारी और व्यक्तिगत त्रासदी
भारतीराजा लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे और चेन्नई के एक निजी अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। दिसंबर 2024 में सांस लेने में गंभीर कठिनाई के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
व्यक्तिगत जीवन में भी वह गहरे आघात से गुज़रे। 2024 में उनके पुत्र और अभिनेता मनोज भारतीराजा का मात्र 48 वर्ष की आयु में हृदयाघात से निधन हो गया था। पुत्र की असमय मृत्यु के बाद उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता चला गया।
करियर: तमिल सिनेमा में क्रांति
1977 में आई उनकी पहली फिल्म '16 वयथिनिले' ने तमिल सिनेमा की दिशा बदल दी। इस फिल्म में रजनीकांत, कमल हासन और श्रीदेवी जैसे कलाकार थे। पहली ही फिल्म पर उन्हें सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार मिला।
इसके बाद उन्होंने 'किझाके पोगम रेल', 'सिगप्पु रोजक्कल', 'अलाइगल ओइवथिल्लई', 'कादल ओवियम', 'मुधल मरियाथाई', 'करुथम्मा' और 'मन वासनाई' जैसी कालजयी फिल्में दीं। अपने लंबे करियर में उन्होंने लगभग 44 फिल्मों का निर्देशन किया।
पुरस्कार और विरासत
भारतीराजा ने अपने नाम छह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान किए। उनकी सबसे बड़ी पहचान ग्रामीण जीवन की सादगी, संघर्ष, प्रेम और सामाजिक विसंगतियों को बड़े पर्दे पर जीवंत करने की उनकी अद्वितीय क्षमता थी। यह ऐसे समय में आया है जब तमिल सिनेमा वैश्विक मंच पर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है — भारतीराजा उस नींव के अहम पत्थर थे।
उनके जाने से तमिल सिनेमा ने अपना एक ऐसा स्तंभ खो दिया है जिसने पीढ़ियों के फिल्मकारों को प्रेरित किया।