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तमिल सिनेमा के दिग्गज निर्देशक के. भाग्यराज का निधन, 75 से अधिक फिल्मों की विरासत छोड़ गए

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तमिल सिनेमा के दिग्गज निर्देशक के. भाग्यराज का निधन, 75 से अधिक फिल्मों की विरासत छोड़ गए

सारांश

तमिल सिनेमा के बहुआयामी कलाकार के. भाग्यराज नहीं रहे। 27 जून को चेन्नई में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। 75 से अधिक फिल्मों में लेखक, निर्देशक और अभिनेता की भूमिका निभाने वाले भाग्यराज ने 'वो सात दिन' और 'आखिरी रास्ता' जैसी अंतर-भाषाई कृतियों से भारतीय सिनेमा पर अमिट छाप छोड़ी।

मुख्य बातें

तमिल फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और अभिनेता के.
भाग्यराज का 27 जून को चेन्नई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।
उनका जन्म 7 जनवरी 1953 को तमिलनाडु में हुआ था; उन्होंने 75 से अधिक फिल्मों में काम किया।
उनकी प्रमुख फिल्मों में 'अंधा 7 नाटकाल' (हिंदी रीमेक: 'वो सात दिन'), 'मुंधानई मुदिचू' और 'मौना गीथांगल' शामिल हैं।
उन्होंने 'ओरु कैधियिन डायरी' की पटकथा लिखी; इसका हिंदी रीमेक 'आखिरी रास्ता' उन्होंने स्वयं निर्देशित किया, जिसमें अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में थे।
राजेश सहित फिल्म उद्योग ने सोशल मीडिया पर गहरा दुख व्यक्त किया।

तमिल सिनेमा के महान पटकथा लेखक, निर्देशक और अभिनेता कृष्णस्वामी भाग्यराज (के. भाग्यराज) का शनिवार, 27 जून को चेन्नई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। 7 जनवरी 1953 को तमिलनाडु में जन्मे भाग्यराज ने 75 से अधिक फिल्मों में अपनी बहुआयामी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनके जाने से भारतीय सिनेमा जगत ने एक ऐसा स्तंभ खो दिया है जिसकी कहानी कहने की कला ने पीढ़ियों को प्रेरित किया।

के. भाग्यराज की सिनेमाई विरासत

भाग्यराज अपनी तीखी सामाजिक टिप्पणी और बेजोड़ हास्य के संयोजन के लिए पहचाने जाते थे। उनकी फिल्में हर वर्ग के दर्शकों तक पहुँचती थीं — चाहे वे शहरी हों या ग्रामीण। उनकी कई कालजयी फिल्में जैसे 'अंधा 7 नाटकाल', 'मुंधानई मुदिचू', 'थूरल निन्नु पोचु', 'डार्लिंग डार्लिंग डार्लिंग', 'इधु नम्मा आलू', 'इंद्रु पोई नालई वा', 'मौना गीथांगल' और 'रुद्र' सुपरहिट रहीं।

उनकी फिल्मों की पहुँच केवल तमिल सिनेमा तक सीमित नहीं रही — इनके हिंदी, कन्नड़, तेलुगु और ओड़िया सहित कई भाषाओं में डब और रीमेक बने। उनकी फिल्म 'अंधा 7 नाटकाल' का हिंदी रीमेक 'वो सात दिन' के नाम से बना, जो व्यापक रूप से सराही गई।

गुरु और शिष्य का अनूठा रिश्ता

भाग्यराज ने 'ओरु कैधियिन डायरी' की पटकथा लिखी थी, जिसका निर्देशन उनके गुरु भरथिराजा ने किया और जिसमें कमल हासन ने मुख्य भूमिका निभाई। इस फिल्म का हिंदी रीमेक 'आखिरी रास्ता' के नाम से बना, जिसमें अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में थे और निर्देशन स्वयं के. भाग्यराज ने किया। यह उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण था कि वे लेखक, निर्देशक और अभिनेता — तीनों भूमिकाओं में समान दक्षता से काम करते थे।

फिल्म उद्योग की श्रद्धांजलि

निर्देशक एम. राजेश ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए लिखा, 'भगवान आपकी आत्मा को शांति दे, दिग्गज के. भाग्यराज सर। आपकी कहानी कहने की कला, ह्यूमर और सदाबहार पटकथाओं ने लेखकों और निर्देशकों की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। आपकी विरासत आपकी यादगार फिल्मों और उन अनगिनत फिल्म निर्माताओं के माध्यम से जीवित रहेगी जिन्हें आपने प्रभावित किया है। शांति से आराम करें, सर।'

तमिल सिनेमा पर अमिट छाप

यह ऐसे समय में आया है जब तमिल सिनेमा अपनी वैश्विक पहचान को लगातार मज़बूत कर रहा है। गौरतलब है कि भाग्यराज उस पीढ़ी के निर्माताओं में थे जिन्होंने 1970-80 के दशक में तमिल सिनेमा को सामाजिक यथार्थवाद और मनोरंजन का अनूठा मिश्रण दिया। उनकी विरासत उन फिल्म निर्माताओं की हर कृति में जीवित रहेगी जिन्हें उन्होंने प्रेरित किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब यह याद करना ज़रूरी है कि उस नींव को भाग्यराज जैसे कलाकारों ने रखा था जो एक साथ लेखक, निर्देशक और अभिनेता थे। उनकी फिल्मों के अंतर-भाषाई रीमेक इस बात के प्रमाण हैं कि अच्छी कहानी की कोई भाषा नहीं होती। मुख्यधारा की श्रद्धांजलियाँ उनके हास्य का उल्लेख करती हैं, लेकिन असली विरासत वह सामाजिक टिप्पणी है जो उन्होंने मनोरंजन की चाशनी में लपेटकर दी।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

के. भाग्यराज कौन थे?
के. भाग्यराज तमिल सिनेमा के प्रतिष्ठित पटकथा लेखक, निर्देशक और अभिनेता थे, जिनका पूरा नाम कृष्णस्वामी भाग्यराज था। उन्होंने 75 से अधिक फिल्मों में काम किया और सामाजिक विषयों पर हास्यपूर्ण शैली में फिल्में बनाने के लिए जाने जाते थे।
के. भाग्यराज का निधन कब और कैसे हुआ?
के. भाग्यराज का निधन 27 जून को चेन्नई में दिल का दौरा पड़ने से हुआ। उनका जन्म 7 जनवरी 1953 को तमिलनाडु में हुआ था।
के. भाग्यराज की सबसे मशहूर फिल्में कौन सी थीं?
उनकी प्रमुख फिल्मों में 'अंधा 7 नाटकाल', 'मुंधानई मुदिचू', 'थूरल निन्नु पोचु', 'डार्लिंग डार्लिंग डार्लिंग', 'मौना गीथांगल' और 'रुद्र' शामिल हैं। इनमें से कई फिल्मों के हिंदी, तेलुगु, कन्नड़ और ओड़िया में रीमेक भी बने।
के. भाग्यराज का हिंदी सिनेमा से क्या संबंध था?
भाग्यराज ने हिंदी फिल्म 'आखिरी रास्ता' का निर्देशन किया, जो तमिल फिल्म 'ओरु कैधियिन डायरी' का रीमेक था और जिसमें अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में थे। इसके अलावा उनकी फिल्म 'अंधा 7 नाटकाल' का हिंदी रीमेक 'वो सात दिन' के नाम से बना।
निर्देशक एम. राजेश ने के. भाग्यराज को कैसे याद किया?
निर्देशक एम. राजेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भाग्यराज की कहानी कहने की कला, हास्य और सदाबहार पटकथाओं ने लेखकों और निर्देशकों की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि उनकी विरासत उनकी यादगार फिल्मों और उन अनगिनत फिल्म निर्माताओं के माध्यम से जीवित रहेगी जिन्हें उन्होंने प्रभावित किया।
राष्ट्र प्रेस
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