28 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

के. भाग्यराज को चेन्नई में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई, 73 वर्ष की आयु में हुआ निधन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
के. भाग्यराज को चेन्नई में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई, 73 वर्ष की आयु में हुआ निधन

सारांश

तमिल सिनेमा के बहुआयामी फिल्मकार के. भाग्यराज अब नहीं रहे। 73 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से हुए निधन के बाद चेन्नई में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। 'मौना गीथंगल' से 'मुथानई मुधिचु' तक — उनकी फिल्में तमिल दर्शकों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी।

मुख्य बातें

तमिल सिनेमा के दिग्गज फिल्मकार के.
भाग्यराज का शनिवार को दिल का दौरा पड़ने से 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
उनका अंतिम संस्कार चेन्नई के बेसेंट नगर इलेक्ट्रिक श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
भाग्यराज का जन्म तमिलनाडु के इरोड ज़िले के वेल्लाकोईल में हुआ था।
उनकी प्रमुख फिल्मों में 'मौना गीथंगल' , 'अंधा 7 नाटकल' और 'मुथानई मुधिचु' शामिल हैं, जिन्हें तमिल सिनेमा की क्लासिक कृतियाँ माना जाता है।
वह निर्देशक, अभिनेता, पटकथा लेखक, संवाद लेखक और संगीत रचनाकार के रूप में एक साथ सक्रिय रहे।
उनके आवास पर फिल्म जगत के कलाकारों, राजनेताओं और हज़ारों प्रशंसकों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

तमिल सिनेमा के बहुआयामी फिल्मकार के. भाग्यराज को 29 जून 2025 को चेन्नई के बेसेंट नगर इलेक्ट्रिक श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। शनिवार को दिल का दौरा पड़ने से 73 वर्ष की आयु में उनके निधन की खबर ने तमिल फिल्म जगत को गहरे शोक में डुबो दिया। उनके पार्थिव शरीर को चेन्नई स्थित उनके आवास पर रखा गया, जहाँ फिल्म उद्योग के कलाकार, राजनेता और हज़ारों प्रशंसक श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुँचे।

तमिल सिनेमा का एक युग समाप्त

भाग्यराज तमिल सिनेमा के उन विरले कलाकारों में से थे जिन्होंने निर्देशन, अभिनय, पटकथा लेखन, संवाद लेखन और संगीत रचना — एक साथ कई मोर्चों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह आम भारतीय जीवन की कहानियों को अत्यंत सहज और प्रामाणिक तरीके से पर्दे पर उतारते थे, जिससे दर्शक पात्रों से सीधा जुड़ाव महसूस करते थे।

उनका जन्म तमिलनाडु के इरोड ज़िले के वेल्लाकोईल में हुआ था। दशकों के करियर में उन्होंने तमिल सिनेमा को एक अलग दिशा दी — रोमांस, पारिवारिक नाटक और हास्य का ऐसा संयोजन जो उनकी अपनी पहचान बन गया।

यादगार फिल्में और करियर की शुरुआत

भाग्यराज ने अपने निर्देशन करियर की शुरुआत फिल्म 'सुवरिल्लाथ चिथिरंगल' से की थी। इसके बाद उन्होंने कई ऐसी फिल्में दीं जिन्हें तमिल सिनेमा की क्लासिक कृतियों में गिना जाता है। उनकी प्रमुख फिल्मों में 'मौना गीथंगल', 'अंधा 7 नाटकल' और 'मुथानई मुधिचु' शामिल हैं। इन फिल्मों के संवाद सीधे दर्शकों के दिल तक पहुँचते थे और उनकी कहानी कहने की शैली अपने समय से बिल्कुल अलग थी।

फिल्म जगत और राजनेताओं की श्रद्धांजलि

भाग्यराज के निधन की सूचना मिलते ही तमिल फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई। उनके आवास पर फिल्म जगत के अनेक वरिष्ठ कलाकारों और राजनेताओं ने पहुँचकर अंतिम दर्शन किए। बेसेंट नगर इलेक्ट्रिक श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, जो उनके तमिल सांस्कृतिक जगत में अतुलनीय योगदान का प्रमाण था।

तमिल सिनेमा पर स्थायी छाप

भाग्यराज ऐसे विषयों को अपनी फिल्मों में उठाते थे जो आम जन-जीवन से गहराई से जुड़े होते थे। उनकी पटकथाओं में ग्रामीण और मध्यवर्गीय जीवन की सच्चाइयाँ इस तरह पिरोई होती थीं कि दर्शक पर्दे पर अपनी ही कहानी देखते थे। आलोचकों के अनुसार, तमिल सिनेमा में 'रियलिस्टिक सिनेमा' की नींव रखने में भाग्यराज का योगदान अविस्मरणीय है। उनके जाने से तमिल फिल्म जगत ने एक ऐसा स्तंभ खो दिया है जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

सिर्फ मानवीय कहानियों के बल पर करोड़ों दर्शकों का दिल जीतते थे। आज जब तमिल सिनेमा वैश्विक मंच पर 'मास एंटरटेनमेंट' की दौड़ में है, भाग्यराज की विरासत यह याद दिलाती है कि सिनेमा की असली ताकत उसकी सादगी और सच्चाई में होती है। राजकीय सम्मान मिलना इस बात का प्रमाण है कि तमिलनाडु ने उनके सांस्कृतिक योगदान को उचित मान्यता दी — लेकिन उनके जैसे फिल्मकारों की परंपरा को आगे ले जाने की ज़िम्मेदारी अब नई पीढ़ी पर है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

के. भाग्यराज कौन थे?
के. भाग्यराज तमिल सिनेमा के प्रतिष्ठित फिल्मकार, अभिनेता, पटकथा लेखक, संवाद लेखक और संगीत रचनाकार थे। उन्होंने 'मौना गीथंगल', 'अंधा 7 नाटकल' और 'मुथानई मुधिचु' जैसी क्लासिक फिल्में दीं और अपनी सहज कहानी कहने की शैली के लिए जाने जाते थे।
के. भाग्यराज का निधन कैसे हुआ?
के. भाग्यराज का निधन शनिवार को दिल का दौरा पड़ने से हुआ। वह 73 वर्ष के थे। उनका जन्म तमिलनाडु के इरोड ज़िले के वेल्लाकोईल में हुआ था।
के. भाग्यराज का अंतिम संस्कार कहाँ हुआ?
उनका अंतिम संस्कार चेन्नई के बेसेंट नगर इलेक्ट्रिक श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इससे पहले उनके पार्थिव शरीर को चेन्नई स्थित उनके आवास पर रखा गया था।
के. भाग्यराज की सबसे प्रसिद्ध फिल्में कौन सी हैं?
उनकी प्रमुख फिल्मों में 'मौना गीथंगल', 'अंधा 7 नाटकल' और 'मुथानई मुधिचु' शामिल हैं। उन्होंने अपने निर्देशन करियर की शुरुआत 'सुवरिल्लाथ चिथिरंगल' से की थी।
के. भाग्यराज को राजकीय सम्मान क्यों दिया गया?
तमिल सिनेमा और संस्कृति में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। दशकों के करियर में उन्होंने निर्देशन, अभिनय और लेखन के ज़रिए तमिल सिनेमा को एक नई पहचान दी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 18 घंटे पहले
  2. 20 घंटे पहले
  3. 23 घंटे पहले
  4. कल
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 2 सप्ताह पहले
  8. 2 सप्ताह पहले