हमास ने ईरान की क्षेत्रव्यापी युद्धविराम अपील का समर्थन किया, होर्मुज जलडमरूमध्य पर दांव
सारांश
मुख्य बातें
फिलिस्तीनी संगठन हमास ने ईरान के उस रुख का खुलकर समर्थन किया है जिसमें गाजा, लेबनान और पूरे मध्य पूर्व में जारी सभी सशस्त्र संघर्षों को समाप्त कर व्यापक युद्धविराम लागू करने की माँग की गई है। यह घटनाक्रम 13 अगस्त 2026 को सामने आया, जब क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर बना हुआ है।
मोहसेन रेजाई की अपील और हमास की प्रतिक्रिया
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के नवनियुक्त सचिव मोहसेन रेजाई ने मंगलवार को लेबनान और गाजा समेत पूरे क्षेत्र में 'व्यापक युद्धविराम' का आह्वान किया। उनकी यह टिप्पणी ईरानी राज्य प्रसारक आईआरआईबी ने प्रकाशित की। रेजाई ने स्पष्ट किया कि जब तक युद्धविराम की आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद रहेगा।
हमास के अरब और इस्लामी संबंध कार्यालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि युद्धों को समाप्त करना 'क्षेत्र, उसके लोगों और उनके भविष्य के सर्वोत्तम हित में होगा।' संगठन ने यह भी कहा कि संघर्षों के जारी रहने से केवल 'दुश्मनों' को लाभ हो रहा है, जिनका उद्देश्य क्षेत्र को विभाजित करना, अस्थिरता पैदा करना और उसके संसाधनों को समाप्त करना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत
ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को युद्धविराम शर्त से जोड़ना इस जलमार्ग की वैश्विक महत्ता को रेखांकित करता है। दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। रेजाई के अनुसार, होर्मुज को फिर से खोलने के लिए अमेरिका को ईरान की माँगें माननी होंगी — जिनमें सक्रिय संघर्षों को समाप्त करना और क्षेत्रव्यापी युद्धविराम शामिल हैं।
गौरतलब है कि होर्मुज को लेकर इस प्रकार की चेतावनी पहले भी दी जा चुकी है, किंतु इस बार इसे एक ठोस राजनयिक शर्त के रूप में सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया गया है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
ईरानी विदेश मंत्री का अमेरिका पर तंज
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए अमेरिकी खुफिया तंत्र पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने लिखा, 'अमेरिका इंटेलिजेंस की नाकामियों की वजह से लंबे समय से गलत अंदाजा लगाता रहा है, जिसमें ईरान पर युद्ध शुरू करना भी शामिल है।' अराघची ने कहा, 'फेक न्यूज से भी बदतर फेक इंटेलिजेंस है।'
यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान-अमेरिका संबंध पहले से ही अत्यंत तनावपूर्ण हैं और मध्य पूर्व में कूटनीतिक समाधान की राहें संकरी होती जा रही हैं।
क्षेत्रीय संदर्भ और व्यापक प्रभाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब गाजा, लेबनान और ईरान से जुड़े संघर्षों के कारण मध्य पूर्व में तनाव लगातार बना हुआ है। हमास और ईरान के बीच यह सार्वजनिक समन्वय संकेत देता है कि दोनों पक्ष कूटनीतिक मोर्चे पर एक समान स्वर में बोलने की कोशिश कर रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि होर्मुज को शर्त बनाना एक दबाव की रणनीति है, न कि वास्तविक शांति प्रस्ताव। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और अमेरिका का रुख इस समीकरण की दिशा तय करेगा।