कावेरी जल विवाद: भाकपा सांसद पी. संतोष बोले — केंद्र सरकार मूकदर्शक न बने, देश की एकता सर्वोपरि
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के सांसद पी. संतोष ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में कावेरी जल विवाद पर केंद्र सरकार की भूमिका को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्र को इस अंतरराज्यीय जल संकट में महज मूकदर्शक बने रहने की बजाय सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए, क्योंकि देश की एकता और अखंडता हर विवाद से ऊपर है।
मुख्य बयान और माँग
सांसद पी. संतोष ने कहा, 'पानी से जुड़े विवाद गंभीर चिंता का विषय हैं, लेकिन इन सभी मुद्दों को सुलझाने के लिए हमें और अधिक बातचीत व चर्चा की जरूरत है। तमिलनाडु और केरल व केरल और कर्नाटक के बीच मुद्दे हैं। केंद्र सरकार को सिर्फ मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि संबंधित पक्षों को यह मामला ईमानदारी और गंभीरता से सुलझाना होगा।
विभाजनकारी तत्वों पर चेतावनी
भाकपा सांसद ने आगाह किया कि कई ऐसे तत्व हैं जो इस तरह के अंतरराज्यीय विवादों का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं — यानी 'गंदले पानी में मछली पकड़ने' की फिराक में हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि कर्नाटक और तमिलनाडु का समझदार राज्य नेतृत्व इस विवाद का समाधान निकाल लेगा।
छात्र आंदोलन और भाजपा पर टिप्पणी
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा नए प्रदर्शन की घोषणा के संदर्भ में पी. संतोष ने कहा कि भाजपा के अपने लोगों को इस्तीफा देना पड़ा और उनकी 'पोल खुल गई।' उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन को 'देश-विरोधी' करार देने की कोशिश गलत थी। उन्होंने स्पष्ट किया, 'आम तौर पर हम विरोध कर रहे छात्रों के साथ हैं। सरकार ने अधिकतर माँगें मान ली हैं, लेकिन कुछ जायज माँगें अभी बाकी हैं और बातचीत से उन्हें सुलझाया जा सकता है।'
विशेषाधिकार हनन विवाद पर प्रतिक्रिया
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सांसद जॉन ब्रिटास द्वारा 'लुंगी वाला' बयान पर विशेषाधिकार हनन नोटिस लाने के मामले पर पी. संतोष ने कहा कि यह मामला अब खत्म हो चुका है। उन्होंने बताया कि राज्यसभा के चेयरमैन ने मुद्दा उठाने की अनुमति दी और सुष्मिता ने भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'हम समाज में बंटवारा करने वाली ऐसी बातों को और नहीं बढ़ाना चाहते।'
आगे की राह
कावेरी जल विवाद दशकों पुरानी समस्या है जिसमें कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुदुच्चेरी के बीच जल बँटवारे को लेकर तनाव बना रहता है। भाकपा सांसद की यह माँग कि केंद्र सक्रिय भूमिका निभाए, इस बहस को नई दिशा दे सकती है — विशेष रूप से तब जब चुनावी मौसम में इस तरह के विवाद राजनीतिक रंग ले लेते हैं।