17 अगस्त 2026
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लिसा रे का 'घर' पर दिल खोलकर खुलासा: 'जहाँ खुद को बदलना न पड़े, वही असली घर'

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लिसा रे का 'घर' पर दिल खोलकर खुलासा: 'जहाँ खुद को बदलना न पड़े, वही असली घर'

सारांश

लिसा रे का यह पोस्ट सिर्फ एक अभिनेत्री की यात्रा-कथा नहीं है — यह उस आधुनिक इंसान की आवाज़ है जिसने दुनिया तो देखी, पर 'घर' को महसूस करने में दशकों लगे। 16 साल की उम्र से शुरू हुआ सफर आज गोवा और बेटियों की मौजूदगी में ठहरा है।

मुख्य बातें

लिसा रे ने 17 अगस्त को इंस्टाग्राम पर एक भावपूर्ण वीडियो के ज़रिए 'घर' की अपनी व्यक्तिगत परिभाषा साझा की।
उन्होंने बताया कि 16 साल की उम्र से यात्राएँ शुरू करने के बाद घर का अर्थ किसी एक पते तक सीमित नहीं रहा।
लिसा के अनुसार घर वह जगह है जहाँ खुद को बदलने की ज़रूरत न हो — चाहे वह कोई इंसान हो, गली हो या खुशबू।
अपनी बेटियों की मौजूदगी को उन्होंने सबसे गहरा 'घर जैसा एहसास' बताया।
आज गोवा उन्हें अपना घर महसूस होता है क्योंकि वहाँ उन्हें हर वक्त आगे बढ़ने की ज़रूरत नहीं लगती।

अभिनेत्री लिसा रे ने 17 अगस्त को इंस्टाग्राम पर एक भावपूर्ण वीडियो साझा करते हुए 'घर' की अपनी बदली हुई परिभाषा दुनिया के सामने रखी। मुंबई से जुड़ी इस अभिनेत्री ने बताया कि दशकों तक अलग-अलग शहरों, देशों और महाद्वीपों में जीवन बिताने के बाद उनके लिए घर का अर्थ अब किसी एक पते या चार दीवारों तक सीमित नहीं रहा। उनके लिए घर वह जगह है जहाँ वे बिना किसी संकोच या भय के पूरी तरह खुद रह सकें।

यात्राओं से उपजी नई सोच

लिसा ने अपने पोस्ट में लिखा, 'पूरी जिंदगी लोगों ने मुझे यह समझाया कि इंसान के पास एक स्थायी ठिकाना होना चाहिए। लेकिन मेरा अनुभव इससे बिल्कुल अलग रहा है।' उन्होंने बताया कि महज 16 साल की उम्र से उन्होंने सफर करना शुरू कर दिया था और धीरे-धीरे घूमना उनकी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बन गया।

लिसा ने कहा कि वे दुनिया को तस्वीरों में कैद करने के बजाय उसे जीना पसंद करती हैं — इसीलिए इतनी यात्राओं के बावजूद उनके पास अधिक तस्वीरें नहीं हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ अनजान जगहें पहली नज़र में ही घर जैसी लगीं, जबकि कुछ घरों में रहते हुए भी वे हमेशा अस्थायी महसूस करती रहीं।

घर की असली परिभाषा

लिसा ने स्पष्ट किया कि किसी जगह से जुड़ाव का सीधा संबंध वहाँ रखे सामान या फर्नीचर से नहीं है। उनके शब्दों में, 'घर मेरे लिए ऐसी जगह या ऐसा व्यक्ति हो सकता है, जो मेरे व्यक्तित्व के हर बदलते और विकसित होते रूप को खुले दिल से स्वीकार करे। ऐसी जगह जहाँ मुझे यह सोचने की ज़रूरत न पड़े कि मैं क्या कहूँ, कैसे व्यवहार करूँ।'

उन्होंने आगे जोड़ा कि इतने वर्षों की आवाजाही के बाद अब उनके लिए 'सुरक्षित महसूस करना' ही सबसे बड़ी विलासिता बन गई है। उनके अनुसार घर कभी किसी इंसान में मिल सकता है, कभी किसी अनजान शहर की जानी-पहचानी गली में, कभी खाना पकने की खुशबू में, और कभी बिस्तर के पास रखी किसी किताब में।

बेटियों की मौजूदगी — सबसे खास एहसास

लिसा ने अपनी बेटियों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा, 'मेरी बेटियाँ जब मेरे पास होती हैं, तो वह एहसास भी मेरे लिए घर जैसा होता है। जिंदगी के वे खास पल, जब मेरे भीतर का शोर अचानक शांत हो जाता है और मुझे लगता है कि दुनिया बिल्कुल उसी जगह है जहाँ उसे होना चाहिए — मेरे लिए वे पल घर की तरह हैं।' यह स्वीकारोक्ति उनके लेखन का सबसे संवेदनशील हिस्सा रही।

गोवा — अभी का घर

जब उनसे पूछा जाता है कि वे कहाँ से हैं, तो लिसा के अनुसार इसका जवाब आसान नहीं है। उन्होंने कहा, 'मैं कई जगहों से बनी हूँ, और मेरी जिंदगी पर उससे भी ज़्यादा जगहों का असर रहा है।' हालाँकि आज गोवा उन्हें अपना घर महसूस होता है — इसलिए नहीं कि उन्होंने घूमना बंद कर दिया, बल्कि इसलिए कि वहाँ उन्हें पहली बार लगता है कि हर वक्त आगे बढ़ते रहने की ज़रूरत नहीं है। यह बयान उनकी दीर्घ यात्रा-यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अक्सर सतही रहते हैं। लिसा की बात इसलिए अलग है क्योंकि वे एक ऐसी हस्ती हैं जिन्होंने कैंसर से जूझने के बाद सार्वजनिक रूप से जीवन को नए सिरे से परिभाषित किया है। उनका 'घर' की खोज का सफर दरअसल पहचान की खोज का रूपक है — और गोवा में ठहरने का उनका फैसला उस व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है जिसमें शहरी भारतीय महानगरों से इतर शांत जीवन की ओर रुख कर रहे हैं।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लिसा रे ने 'घर' को लेकर क्या कहा?
लिसा रे ने कहा कि घर वह जगह है जहाँ उन्हें खुद को बदलने की ज़रूरत न हो और जो उनके व्यक्तित्व के हर रूप को स्वीकार करे। उनके अनुसार यह कोई पता नहीं, बल्कि एक एहसास है।
लिसा रे ने यह पोस्ट कहाँ और कब साझा किया?
लिसा रे ने यह भावपूर्ण वीडियो पोस्ट 17 अगस्त को इंस्टाग्राम पर साझा किया, जिसमें उन्होंने घर, अपनापन और सुरक्षित महसूस करने पर अपने विचार व्यक्त किए।
लिसा रे को अभी कौन सी जगह घर लगती है?
लिसा रे ने बताया कि आज गोवा उन्हें अपना घर महसूस होता है। इसकी वजह यह है कि वहाँ उन्हें पहली बार लगता है कि हर वक्त आगे बढ़ते रहने की ज़रूरत नहीं है।
लिसा रे की बेटियाँ उनके लिए क्यों खास हैं?
लिसा ने कहा कि जब उनकी बेटियाँ उनके पास होती हैं तो वह एहसास उनके लिए घर जैसा होता है — वे पल जब उनके भीतर का शोर शांत हो जाता है और दुनिया सही जगह पर लगती है।
लिसा रे ने कितनी उम्र से यात्राएँ शुरू कीं?
लिसा रे ने 16 साल की उम्र से यात्राएँ शुरू कीं और धीरे-धीरे अलग-अलग देशों और महाद्वीपों में रहना उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन गया।
राष्ट्र प्रेस
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